जयपुर में 400 करोड़ का डिजिटल डकैती कांड, एक्सपोर्टर पोर्टल हैक कर सरकारी खजाने में सेंध, फर्जी डिजिटल सिग्नेचर से उड़ाए करोड़ों
News India Live, Digital Desk: राजस्थान की राजधानी जयपुर से साइबर अपराध का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसने केंद्र और राज्य की जांच एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं। शातिर ठगों ने विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के पोर्टल में सेंध लगाकर निर्यातकों (Exporters) को मिलने वाली सरकारी प्रोत्साहन राशि (Incentive) पर डाका डाला है। प्रारंभिक जांच में यह घोटाला करीब 400 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है। ठगों ने फर्जी डिजिटल सिग्नेचर (DSC) का इस्तेमाल कर एक्सपोर्टर्स के खातों से करोड़ों के 'कूपन' और 'वाउचर' ट्रांसफर कर लिए, जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार में शुल्क माफी के लिए इस्तेमाल होते हैं।
पोर्टल हैक कर 'ई-स्क्रिप्स' की चोरी: ऐसे दिया अंजाम
साइबर ठगों ने इस महाघोटाले को अंजाम देने के लिए बेहद उन्नत तकनीक का सहारा लिया। उन्होंने सबसे पहले देश के बड़े एक्सपोर्टर्स का डेटा हासिल किया और फिर DGFT पोर्टल की सुरक्षा में सेंध लगाई। ठगों ने असली एक्सपोर्टर्स के नाम पर फर्जी डिजिटल सिग्नेचर तैयार किए और पोर्टल में लॉग-इन कर उनकी 'ई-स्क्रिप्स' (e-Scrips) को अपने फर्जी फर्मों के खातों में ट्रांसफर कर लिया। ये ई-स्क्रिप्स नकद के समान होती हैं, जिनका उपयोग कस्टम ड्यूटी चुकाने में किया जाता है या इन्हें बाजार में बेचा जा सकता है।
फर्जी फर्मों का मकड़जाल: कागजों पर खड़ी की कंपनियां
जयपुर पुलिस और साइबर सेल की जांच में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह ने ठगी के पैसे को ठिकाने लगाने के लिए दर्जनों फर्जी कंपनियां और बैंक खाते खोले थे। इन फर्मों का जमीनी स्तर पर कोई अस्तित्व नहीं था, लेकिन कागजों पर इन्हें बड़े एक्सपोर्टर्स के रूप में दिखाया गया था। चोरी की गई प्रोत्साहन राशि को इन फर्जी फर्मों के माध्यम से भुनाया गया और फिर पैसे को अलग-अलग लेयर्स में ट्रांसफर कर निकाल लिया गया। पुलिस को शक है कि इस गिरोह के तार दिल्ली, मुंबई और दुबई तक जुड़े हो सकते हैं।
एक्सपोर्टर्स में हड़कंप: सरकारी पोर्टल की सुरक्षा पर सवाल
इतने बड़े पैमाने पर हुई डिजिटल चोरी के बाद राजस्थान और देशभर के निर्यातकों में डर का माहौल है। जयपुर के कई बड़े ज्वैलरी और टेक्सटाइल एक्सपोर्टर्स ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकारी पोर्टल से ही डेटा और डिजिटल सिग्नेचर के जरिए चोरी हो रही है, तो यह 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' के लिए बड़ा खतरा है। केंद्र सरकार के वाणिज्य मंत्रालय और आयकर विभाग की टीमें भी अब इस मामले की जांच में शामिल हो गई हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या विभाग के भीतर से भी किसी ने ठगों की मदद की है।
पुलिस की कार्रवाई: मास्टरमाइंड की तलाश में छापेमारी
जयपुर पुलिस कमिश्नरेट की विशेष टीम ने इस मामले में कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया है और कई लैपटॉप व मोबाइल फोन जब्त किए हैं। सूत्रों के अनुसार, गिरोह का मास्टरमाइंड एक हाई-प्रोफाइल सॉफ्टवेयर इंजीनियर हो सकता है जिसे पोर्टल की बारीकियों की गहरी समझ है। पुलिस अब उन बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया में है जिनमें ठगी की राशि ट्रांसफर की गई थी। अधिकारियों ने निर्यातकों को सलाह दी है कि वे तुरंत अपने पासवर्ड और डिजिटल सिग्नेचर के क्रेडेंशियल्स अपडेट करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल साइबर सेल को दें।