Dhanbad Judge Death Case: हाई कोर्ट ने कहा – स्वीकार करने लायक नहीं है सीबीआई की थ्योरी, आरोपियों की नार्कों और ब्रेन मैपिंग जांच करने के दिए निर्देश

धनबाद जिला अदालत (Dhanbad District Court) के जज उत्तम आनंद (Judge Uttam Anand) की जुलाई, 2021 में हुई अप्राकृतिक मौत (Death) मामले की जांच उचित तरीके से नहीं करने को लेकर सीबीआई (CBI) की खिंचाई की. उन्होंने कहा कि वह इसके पीछे पैठी गहरी साजिश का पता लगाए. झारखंड उच्च न्यायालय (Jharkhand High Court) के मुख्य न्यायाधीश डॉ रवि रंजन एवं न्यायमूर्ति एस. एन. प्रसाद की खंड पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि मोबाइल फोन झपटमारी की नियत से हत्या करने की बात स्वीकार करने योग्य नहीं है.

कोर्ट ने कहा कि इससे जुड़ा सीसीटीवी फुटेज देखने से कहीं भी ऐसा नहीं लगता है कि ऑटोचालक ने सिर्फ मोबाइल फोन छीनने के लक्ष्य से अपने सहयोगी के साथ मिलकर न्यायाधीश की हत्या कर दी और यदि ऐसा था तो उन्होंने फोन क्यों नहीं लूटा? इसपर सीबीआई के जांच अधिकारी ने कहा कि ऑटो से न्यायाधीश को धक्का मारने के दौरान दोनों ओर से बाइकें आ रही थीं. इसीलिए ऑटोचालक ने पकड़े जाने के डर से फोन नहीं लूटा.

21 जनवरी को होगी अगली सुनवाई

पीठ ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह इस मामले में ऑटो चालक और उसके सहयोगी की नार्को, ब्रेन मैपिंग परीक्षण की दोनों रिपोर्टें सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत करे. मामले की अगली सुनवाई अब 21 जनवरी को होनी है. न्यायाधीश उत्तर आनंद पिछले साल 28 जुलाई को सुबह सैर करने निकले थे. इस दौरान एक ऑटो रिक्शा ने उन्हें कुचल दिया था. इस घटना के बाद पूरी न्यायपालिक में सुरक्षा को लेकर चिंता होने लगी थी. धनबाद से चोरी किया गया रात रिक्शा उसी रात पड़ोस के गिरिडीह जिले से बरामद किया गया था.

31 जुलाई को सीबीआई ने शुरू की थी जांच

दो दिन बाद ऑटो ड्राइवर लखन वर्मा और उसके साथी 21 साल के राहुल वर्मा को गिरफ्तार किया गया था. अक्टूबर में केंद्रीय जांच एजेंसी ने दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 201 और 34 के तहत आरोप पत्र दायर किया था.

सुप्रीम कोर्ट और झारखंड हाई कोर्ट ने हिट एंड रन केस का स्वत संज्ञान लिया, जब सीसीटीवी फुटेज में ऑटो खाली सड़क पर उन्हें मारने के लिए घुमाते हुए साफ नजर आया. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में कहा कि इस घटना का न्यायपालिका की स्वंत्रता पर व्यापक प्रभाव पड़ने वाला है. इसके बाद 31 जुलाई को सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली थी. राज्य सरकार ने भी मामले में केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की सिफारिश की थी.

Check Also

अनुबंध नर्सों ने दिया नामकुम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में धरना

रांची, 17 जनवरी (हि.स.)। पांच महीने से लंबित मानदेय का भुगतान करने की मांग को …