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दिल्ली हिंसा: अब तक 17 की मौत, सुनवाई के लिए देर रात खुली कोर्ट

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नई दिल्ली :  नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में पिछले 3 दिनों से जारी हिंसा में मरने वालों का आंकड़ा बढ़कर 17 पहुंच गया है। तनाव के बीच घायलों तक चिकित्सकीय मदद पहुंचाने वाली ऐंबुलेंसों पर भी उपद्रवी भीड़ के हमले का खतरा है। इसके मद्देनजर तमाम सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटलों के डॉक्टरों के एक फोरम ने देर रात दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और ऐंबुलेंसों को पुलिस प्रोटेक्शन की मांग की। रात में ही याचिका पर सुनवाई हुई और हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को मुस्तफाबाद के अस्पतालों में भर्ती सभी घायलों को नजदीक के बेहतर अस्पतालों में शिफ्ट करने को कहा। कोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने देर रात जफरबाद खाली करा लिया है। शाहीनबाग मामले पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।

वार्ताकारों का प्रयास विफल होने के बाद माना जा रहा है कि आज सुप्रीम कोर्ट शाहीनबाग खाली कराने का आदेश दे सकता है। इससे पहले देर रात जस्टिस एस. मुरलीधर की अगुआई वाली बेंच ने दिल्ली पुलिस से कहा कि मुस्तफाबाद के अस्पतालों में भर्ती सभी घायलों को वहां से निकालकर दूसरे बेहतर अस्पतालों में भर्ती कराए और उन्हें बेहतर इलाज मुहैया करवाए। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट को बताया कि वह मुस्तफाबाद के अस्पताल में भर्ती 20 घायलों को पहले ही दूसरे अस्पताल में पहुंचा चुकी है। बेंच अब बुधवार दोपहर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगी।

याचिका पर भी आज सुनवाई
दूसरी तरफ, हाई कोर्ट की एक अन्य बेंच हिंसा की स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग वाली एक याचिका पर भी बुधवार को सुनवाई करेगी। कोर्ट ने मंगलवार को नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुई हिंसा की न्यायिक जांच, मारे गए लोगों के लिए मुआवजे और नेताओं की गिरफ्तारी की याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई। जस्टिस अनूप जयराम भंभानी और जस्टिस जी. एस. सिस्तानी की बेंच ने मामले को बुधवार के लिए सूचीबद्ध किया है। याचिकाकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता हर्ष मंदर ने दावा किया कि बीजेपी से जुड़े संगठन के सदस्यों और दिल्ली पुलिस द्वारा 10 लोग मारे गए हैं। उन्होंने बीजेपी नेता कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की है। मंदर ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि इन तीनों नेताओं के भड़काऊ भाषणों के बाद हमलावरों ने सीएए के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हमले किए।

पुलिस से स्टेटस रिपोर्ट तलब
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर टकराव के कारण हुई हिंसा मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में आधी रात को सुनवाई हुई। जस्टिस एस. मुरलीधर के घर पर मंगलवार देर रात हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को मुस्तफाबाद के एक अस्पताल से एंबुलेंस को सुरक्षित रास्ता और मरीजों को सरकारी अस्पताल में शिफ्ट करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही स्टेटस रिपोर्ट तलब की। दोपहर 2.15 फिर से सुनवाई होगी। दिल्ली हिंसा मामले में राहुल रॉय ने याचिका दाखिल की थी। इस याचिका की पैरवी वरिष्ठ वकील सुरूर मंडेर और चिरायू जैन कर रहे थे। अपने फैसले में जस्टिस एस. मुरलीधर ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस जीएस सिस्तानी बाहर हैं। मामला काफी गंभीर है और घायलों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। इस वजह से मामले की आधी रात सुनवाई की जा रही है।

किसी भी हॉस्पिटल में मिले सुविधा
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि घायलों के लिए सुरक्षित रास्तों पर पर्याप्त फोर्स की तैनाती की जाए। सभी घायलों को इमरजेंसी मदद मिले, अगर जीटीबी हॉस्पिटल में नहीं तो फिर एलएनजेपी हॉस्पिटल में या मौलाना आजाद या फिर किसी भी सरकारी हॉस्पिटल में।

हॉस्पिटल में बने कंट्रोल रूम
इसके साथ ही दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि घायलों अपने परिजनों या दोस्तों से मिल नहीं पा रहा है, इस वजह से जीटीबी, एलएनजेपी और मौलाना आजाद हॉस्पिटल में मेडिकल/पुलिस कंट्रोल रूम की स्थापना की जाए।
डोभाल ने हालात का जायजा लिया
हालात का जायजा लेने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल मंगलवार देर रात हिंसा प्रभावित इलाकों में पहुंचे। उन्होंने गाड़ी में बैठकर सीलमपुर, भजनपुरा, मौजपुर, यमुना विहार जैसे हिंसा प्रभावित इलाकों की स्थिति का जायजा लिया। एनएसए डोभाल रात करीब साढ़े 11 बजे सीलमपुर स्थित नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के डीसीपी (डेप्युटी कमिश्नर ऑफ पुलिस) दफ्तर पहुंचे और वहां बैठक कर शहर में सुरक्षा की स्थिति की समीक्षा की। करीब एक घंटे तक चली बैठक में डीसीपी नॉर्थ-ईस्ट, स्पेशल पुलिस कमिश्नर (लॉ ऐंड ऑर्डर) एस. एन. श्रीवास्तव और दूसरे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।

जाफराबाद और मौजपुर चौक में अब शांति
दिल्ली पुलिस के स्पेशल कमिश्नर (क्राइम) सतीश गोलचा ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने जाफराबाद मेट्रो स्टेशन और मौजपुर चौक को खाली कर दिया है। हालात नियंत्रण में हैं। इससे पहले गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली पुलिस और गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक की थी। पिछले 24 घंटों में शाह की यह तीसरी बैठक थी। सूत्रों के मुताबिक यह बैठक रात 7 बजे शुरू हुई और रात 10 बजे तक चली। बता दें कि पिछले 3 दिनों से नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में जारी उपद्रव में अबतक एक हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल समेत 17 लोगों की जान जा चुकी है। उपद्रव में दो दर्जन से ज्यादा वाहनों और दुकानों को आग लगा दिया गया है। इन घटनाओं में 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।

एफआईआर की मांग वाली याचिका पर आज सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट
दिल्ली में संशोधित नागरिकता कानून को लेकर हिंसा संबंधी शिकायतों पर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने के अनुरोध वाली एक याचिका पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को तैयार हो गया। यह याचिका पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला और अन्य ने दाखिल की है। जस्टिस एस. के. कौल और जस्टिस के. एम. जोसफ की एक बेंच के सामने याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया। बेंच ने कहा कि वह बुधवार को इस पर सुनवाई करेगी। उत्तर पूर्वी दिल्ली में संशोधित नागरिकता कानून को लेकर हिंसा में मंगलवार को मृतकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई। हबीबुल्ला, भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और सामाजिक कार्यकर्ता बहादुर अब्बास नकवी ने यह याचिका दायर की है। इसमें सीएए को लेकर शाहीन बाग और राष्ट्रीय राजधानी के अन्य हिस्सों में जारी धरनों में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को निर्देश देने की मांग भी की गई है। शीर्ष अदालत को शाहीन बाग से प्रदर्शनकारियों को हटाये जाने की मांग वाली दो अलग-अलग याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई करनी है। अपनी नई याचिका में हबीबुल्ला, आजाद और नकवी ने आरोप लगाया कि, कपिल मिश्रा, जो भीड़ को हिंसा और तोडफ़ोड़ के वास्ते उकसाने वाले बयान देने के लिए जाने जाते है, ने मौजपुर-बाबरपुर मेट्रो स्टेशन के पास सीएए के समर्थन में एक रैली निकाली थी। इसी मेट्रो स्टेशन से दो किलोमीटर दूर जाफराबाद में शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहे थे।

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