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भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड के साथ रुपये के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। 1700 करोड़ रुपए की डील हुई है। इसके तहत ब्रह्मोस कंपनी सतह से सतह पर मार करने वाली दोहरी भूमिका वाली ब्रह्मोस मिसाइल रक्षा मंत्रालय को मुहैया कराएगी। इस मिसाइल के उपलब्ध होते ही भारतीय नौसेना की ताकत कई गुना बढ़ जाएगी। नई ब्रह्मोस मिसाइल सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल है जो जमीन की सतह से लेकर आसमान तक दुश्मनों को निशाना बनाती है। इस मिसाइल के रिलीज होते ही दुश्मन दंग रह जाएंगे। दुश्मन यह नहीं समझ पाएगा कि किस तरह की मिसाइल पर हमला किया जा रहा है। हाल ही में देश के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया है। इसके पास बराक मिसाइलें हैं। भविष्य में दोहरी भूमिका में सक्षम ब्रह्मोस या वीएलएसआरएएम मिसाइलों को भी तैनात किया जा सकता है। इससे अरब सागर और बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में पाकिस्तान की गतिविधियों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। यह तकनीक कई मायनों में उपयोगी हो सकती है। इसे नौसेना के अन्य युद्धपोतों पर भी तैनात किया जा सकता है।

भारतीय सेना की ब्रह्मोस मिसाइल ब्रह्मास्त्र

ब्रह्मोस मिसाइल को जमीन, पानी या हवा, कहीं से भी लॉन्च किया जा सकता है। इस मिसाइल का निशाना कोई भी हो, उसका मरना तय है। भारतीय सेना लगातार तीनों दिशाओं में इस मिसाइल के अलग-अलग वेरिएंट का परीक्षण कर रही है, ताकि दुश्मन को याद रहे कि भारत के पास ब्रह्मास्त्र है।

लड़ाकू विमानों से अधिक घातक हो गया ब्रह्मोस

सुखोई-30 एमकेआई भारतीय वायुसेना के सबसे घातक लड़ाकू विमानों में से एक है। यह जेट 2120 KM प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरता है। इसकी रेंज भी 3000 KM है। विमान को ब्रह्मोस के विस्तारित वायु संस्करण से सुसज्जित किया जाएगा। सुखोई में दुश्मन के बंकरों, ठिकानों, शिविरों, टैंकों आदि पर निकट या दूर से सीधे और सटीक रूप से हमला करने की क्षमता है। पिछले साल दिसंबर में इसका सफल परीक्षण किया गया था। इस मिसाइल को सुखोई ने विकसित किया है। लेकिन इसे देश के दूसरे फाइटर जेट्स में लगाया जा सकता है. भविष्य में यह मिसाइल मिकोयान मिग-29के, हल्के लड़ाकू विमान तेजस और राफेल में भी लगाई जाएगी। पनडुब्बियों के लिए ब्रह्मोस का एक नया संस्करण विकसित किया जा रहा है।

 

शत्रु द्वारा न देखे जाने की सबसे बड़ी विशेषता

ब्रह्मोस मिसाइल की खास बात यह है कि यह दुश्मन के लिए अदृश्य है। हवा में दिशा बदलने की क्षमता होती है। यह दौड़ते और चलते हुए लक्ष्यों को भी नष्ट कर सकता है। यह सिर्फ 10 मीटर यानी 33 फीट की ऊंचाई पर उड़ सकता है। यानी यह दुश्मन के राडार पर दिखाई नहीं देगा। मारना लगभग असंभव है। ब्रह्मोस मिसाइल के चार नौसैनिक संस्करण हैं, एक जहाज-रोधी संस्करण और एक भूमि-हमला संस्करण पहले से ही भारतीय नौसेना के साथ सेवा में है। जबकि एंटी-शिप वेरिएंट का सफल परीक्षण किया गया है। चौथे संस्करण में लैंड-अटैक वैरिएंट शामिल है।

जहां ब्रह्मोस मिसाइल तैनात है, युद्धपोतों के नाम

भारतीय नौसेना ने आईएनएस रणवीर – आईएनएस रणविजय में 8 ब्रह्मोस मिसाइलों के साथ एक लांचर स्थापित किया है। इसके अलावा आईएनएस तेग, आईएनएस तारकश और आईएनएस त्रिकंद में समान लॉन्चर सिस्टम स्थापित है। शिवालिक श्रेणी के युद्धपोतों में भी फिट। कोलकाता श्रेणी के विध्वंसक में भी तैनात। आईएनएस विशाखापत्तनम में एक सफल परीक्षण किया गया है। ब्रह्मोस को तैनात करने के लिए नीलगिरी श्रेणी के युद्धपोतों की भी योजना है।

 

 

नौसेना संस्करण ब्रह्मोस अत्यंत शक्तिशाली और घातक

जहाज से प्रक्षेपित ब्रह्मोस मिसाइल 200 किलोग्राम आयुध ले जा सकती है। इस मिसाइल की गति 4321 किमी प्रति घंटा है। इसमें दो चरणों वाली प्रणोदन प्रणाली है। पहला ठोस और दूसरा तरल। दूसरा चरण रैमजेट इंजन है। जो इसे सुपरसोनिक स्पीड देता है।