मुंबई : राज्य सरकार की छात्र समग्र विकास नीति के तहत राज्य में स्कूली छात्रों के स्वस्थ्य स्वास्थ्य के लिए उनकी शैक्षणिक प्रगति के साथ-साथ ‘संकल्प संपूर्ण स्वास्थ्य’ कार्यक्रम लागू किया जाएगा. इस संबंध में स्कूल शिक्षा एवं खेल विभाग ने इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) के साथ एमओयू किया है। समझौते में सरकारी स्कूलों में बाल स्वास्थ्य पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का कार्यान्वयन शामिल है। राजकीय आवास रामटेक में स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर की उपस्थिति में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। शासन की ओर से स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव रंजीतसिंह देओल व आईएपी संस्थान के अध्यक्ष डॉ. उपेंद्र किंजवाडेकर ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव इम्तियाज काजी डॉ. समीर दलवई, डॉ. हेमंत गंगोलिया, डॉ. हेमंत जोशी आदि मौजूद थे।

स्कूली शिक्षा विभाग के तहत नीति क्रियान्वयन के केंद्र में छात्र हैं। पुस्तक ज्ञान के साथ-साथ उनका सर्वांगीण विकास सरकार की प्राथमिकता है। चूंकि इसके लिए खेल और स्वास्थ्य भी महत्वपूर्ण है, इसलिए छात्रों के स्वास्थ्य के लिए इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के साथ एक समझौता किया गया है। इसके माध्यम से उनका बौद्धिक और शारीरिक स्वास्थ्य बना रहेगा और उनके शैक्षिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा”, मंत्री श्री केसरकर ने इस अवसर पर विश्वास व्यक्त किया।

संकल्प – संपूर्ण स्वास्थ्य

इस समझौते के तहत 3 से 9 और 10 से 18 वर्ष के दो आयु वर्ग के बच्चों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए कार्यशाला, सीधी बातचीत आदि जैसी गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इन गतिविधियों के आयोजन की जिम्मेदारी पूरी तरह से आईएपी की होगी और इसके लिए राज्य सरकार पूरा सहयोग देगी। छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए इस सरकार की नीति के तहत यह गतिविधि लागू की जा रही है। इस समझौते के तहत गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से छात्रों की शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के लिए स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से विभिन्न योजनाएं लागू की जाती हैं। इसी तरह, आईएपी संगठन बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य के लिए विभिन्न गतिविधियों को लागू करता है। इसके एक हिस्से के रूप में, संगठन ने छात्रों के स्वास्थ्य के लिए स्कूलों में माता-पिता, शिक्षकों और बच्चों के लिए एक राष्ट्रव्यापी स्वास्थ्य प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘संकल्प संपूर्ण स्वास्थ्य’ शुरू करने की योजना बनाई है।

इसके तहत उचित और संतुलित पोषण, बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों पर कवरेज पढ़कर सही/गलत की पहचान, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य, टीवी का सीमित उपयोग, मोबाइल फोन, शारीरिक व्यायाम, पर्याप्त नींद, पर्यावरण जागरूकता, रहने के प्रभावी उपाय व्यसनों आदि से दूर रहें। प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। कार्यक्रम को इस तरह से डिजाइन किया जाएगा कि शिक्षक, एक बार प्रशिक्षित होने के बाद, अपने स्कूलों में इस गतिविधि को आसानी से जारी रख सकें। समझौते के समय यह भी जानकारी दी गई थी कि इस कार्यक्रम में आवश्यकता के अनुसार समय-समय पर संशोधन किया जाएगा।