कोविड नहीं इन बीमारियों से भी बचाने में मददगार साबित हुई कोरोना वैक्‍सीन

नई दिल्‍ली. देश में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. हालांकि अधिकांश मरीज माइल्‍ड लक्षणों (Mild Symptoms) वाले होने के चलते इसे काफी अधिक संक्रामक लेकिन डेल्‍टा (Delta) आदि वेरिएंट के मुकाबले कम खतरनाक मानाजा रहा है.

इस बार कोरोना संक्रमितों में सबसे ज्‍यादा सर्दी, खांसी, जुकाम, नाक बहना, सिरदर्द (Headache), बदनदर्द जैसे लक्षण सामने आ रहे हैं. हालांकि ये लक्षण पहले भी लोगों को सामान्‍य या मौसमी सर्दी के दौरान सामने आते रहे हैं लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सार्स-कोवि-2 के संक्रमण और इससे बचने के लिए किए गए वैक्‍सीनेशन (Vaccination) के चलते लोगों को सामान्‍य रूप से होने वाले सर्दी-जुकाम में कमी आई है. जब से कोरोना टीकाकरण किया गया है तब से साल में कई बार मौसमी सर्दी से जूझने वाले मरीजों को राहत मिली है.

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी के इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज स्थित मॉलीक्‍यूलर बायोलॉजी यूनिट के हेड ऑफ द डिपार्टमेंट और जाने माने वायरोलोजिस्ट प्रोफेसर सुनीत कुमार सिंह न्‍यूज 18 हिंदी से बातचीज में बताते हैं कि जब हम कॉमन कफ, कोल्‍ड या फ्लू जैसे लक्षणों की बात करते हैं तो इसके लिए सिर्फ इन्‍फ्लूएंजा फ्लू वायरस ही जिम्‍मेदार नहीं है. बल्कि इसके लिए अल्‍फा कोरोना वायरस के ये दो प्रकार एनएल-63 (NL-63), 229-ई (229-e) और बीटा कोरोना वायरस (Beta Corona Virus) की भी ये दो प्रजातियां ओसी-43 (OC-43) और एचकेयू-1 (HKU-1) वे कोरोना वायरसेज हैं जो जनसंख्‍या को एक जमाने से संक्रमित करते रहे हैं. इनकी वजह से भी लोगों में सर्दी, खांसी, जुकाम के वही लक्षण सामने आते हैं जो इन्‍फ्लूएंजा फ्लू की वजह से आते हैं.

अगर इसे सरल शब्‍दों में कहें तो ऐसा नहीं है कि कोरोना वायरस विश्‍व में पहली बार आया है और इससे लोग प्रभावित हो रहे हैं बल्कि यह तो दशकों से मौजूद है. अभी तक तमाम बीमारियां जैसे सर्दी (Cold), खांसी (Cough), जुकाम हम लोग अल्‍फा और बीटा कोरोना वायरस की इन चारों प्रजातियों से भी लेते रहे हैं. इनसे अलग बीटा कोरोना वायरस के अन्‍य प्रकारों की वजह से 2003 में चीन में सार्स आया था, वहीं इसी बीटा वायरस की वजह से एक और बीमारी मर्स आई थी और तीसरा आज की तारीख में सार्स कोवि-2 आया है, जिसे हम सभी झेल रहे हैं.

डॉ. सुनीत कहते हैं जो सबसे ज्‍यादा जरूरी बात है वह ये है कि जिन लोगों ने कोविड वैक्‍सीनेशन कराया है या जिनमें से किसी को भी प्राकृतिक रूप से कोरोना का इन्‍फेक्‍शन हुआ है तो वैक्‍सीनेशन या इन्‍फेक्‍शन के दौरान जो हमारे शरीर में एंटीबॉडीज (Antibodies) बनी हैं, उनमें कुछ क्रॉस रिएक्टिव एंटीबॉडीज रही हैं. ऐसे में वे कोरोना वायरस जो सर्दी-जुकाम के लक्षणों के लिए जिम्‍मेदार होते थे, उनको नियंत्रित करने में इन क्रॉस रिएक्टिव एंटीबॉडीज ने काफी मदद की है. यही वजह है कि लोगों को उस तादाद में अब सर्दी, खांसी और जुकाम या फ्लू के लक्षण सामने नहीं आए हैं, जैसे कि मौसम बदलने या सर्दी लगने पर सामान्‍य रूप से पहले आते थे.

हालांकि यहां ध्‍यान देने वाली बात यह है कि कोरोना वैक्‍सीनेशन से सिर्फ अल्‍फा या बीटा कोरोना वायरस के चार प्रकारों से होने वाले संक्रमण को ही घटाने में राहत मिली है. कोरोना वैक्‍सीन ने कोरोना वायरस की इन प्रजातियों से होने वाले संक्रमण के फैलाव को नियंत्रित किया है. इसका इन्‍फ्लूएंजा फ्लू की वजह से होने वाले सर्दी-जुकाम से आशय नहीं है. फ्लू की वजह से होने वाला मौसमी सामान्‍य सर्दी-जुकाम हो सकता है.

डॉ. सुनीत कहते हैं कि अल्‍फा कोरोना वायरस से अलग इस समय कोरोना वायरस का नया वेरिएंट ओमिक्रोन काफी तेजी से फैल रहा है. खास बात है कि इसमें भी लोगों को वही लक्षण सामने आ रहे हैं जो इन्‍फ्लूएंजा फ्लू या अल्‍फा या बीटा कोरोना वायरस की वजह से होने वाले कॉमन कोल्‍ड में नजर आते रहे हैं. ऐसे में इन लक्षणों के होने पर यह समझ लेना कि ये अल्‍फा या बीटा की वजह से हैं या फ्लू की वजह से हो सकता है, ठीक नहीं है. संभव है कि यह ओमिक्रोन संक्रमण का लक्षण हो. ऐसे में अगर किसी को सिरदर्द,छींक आना, नाक बहना, खांसी या गले में खराश की समस्‍या है, बुखार आ रहा है या सांस लेने में तकलीफ है या सांस फूल रही है तो यह आज कल चल रहे सार्स कोवि-2 या ओमिक्रोन संक्रमण के भी लक्षण हो सकते हैं. ऐसे में ये लक्षण सामने आने और परेशानी महसूस होने पर आरटीपीसीआर जांच कराना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही इन लक्षणों के बाद खुद को अन्‍य लोगों से आइसोलेट भी कर लेना चाहिए. वहीं अगर बुखार या सांस की दिक्‍कत आती है तो घबराने के बजाय तुरंत डॉक्‍टर से संपर्क करना जरूरी है.

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