गोरखपुर को सीएम योगी देंगे बायो सीएनजी प्लांट की सौगात

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गोरखपुर, 01 अक्टूबर (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को गोरखपुर को बायो सीएनजी प्लांट की सौगात देंगे। रविवार की सुबह 10.30 बजे 5 कालीदास मार्ग पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किए जाने वाले इस हस्ताक्षर के वक़्त कार्यक्रम से गोरखपुर के प्रशासनिक अधिकारी भी वर्चुअल जुड़ेंगे। बता दें कि पीपीपी मोड पर निर्मित किए जा रहे बायो सीएनजी प्लांट के लिए एमओयू हस्तांतरण होना है।

ठोस अपशिष्ट में शामिल जैविक कूड़े से बायो सीएनजी बनाने के लिए पीपीपी मोड में गोरखपुर के अलावा लखनऊ, गाजियाबाद और प्रयागराज में भी बायो सीएनजी प्लांट लगने का रास्ता साफ होगा।

सुथनी में निर्मित किए जा रहे प्लांट को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बायो सीएनजी प्लांट के रूप में निर्मित किया जाएगा। रविवार को एमओयू हस्तांतरण कार्यक्रम से गोरखपुर नगर निगम के अधिकारी भी वर्चुअल जुड़ेंगे।

इतनी होगी इनकी क्षमता

योजना अंतर्गत लखनऊ व गाजियाबाद में बायो सीएनजी प्लांट की क्षमता 300-300 टीपीडी, गोरखपुर और प्रयागराज के प्लांट की क्षमता 200 टीपीडी होगी। इससे रोजाना 27 हजार किलोग्राम बायो सीएनजी का उत्पादन होगा। इन प्लांटों से सालाना 02 लाख टन कार्बन डाई आक्साइड एवं ग्रीन हाउस गैस को कम किया जाएगा।

इतना होगा निवेश

पीपीपी मोड पर डेवलपर द्वारा इन परियोजनाओं पर पूरी अवधि के लिए ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस खर्च सहित 100 प्रतिशत पूंजी निवेश किया जाएगा। इन परियोजना को लगाने में नगर निकायों पर कोई वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। इनके क्रियान्वयन से 300 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश होगा। निकायों को 204 लाख रुपये की सालाना आमदनी रॉयल्टी मिलेगी। सीएनजी प्लांट से उप उत्पाद के रूप में रोजाना 160 मीट्रिक टन जैविक खाद का भी उत्पादन होगा।

नगर निगम के मुख्य अभियंता बोले

गोरखपुर नगर निगम के मुख्य अभियंता संजय चौहान ने बताया कि पहले इस मिक्स कचरे का सूथनी में प्लांट में लगाया जा रहा था, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद उसे बायो सीएनजी प्लांट के रूप में विकसित करने का फैसला लिया गया है।

कार्बन डाई आक्साइड एवं ग्रीन हाउस गैस का प्रभाव कम करने में मदद

पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत संस्था हेरिटेज फाउंडेशन के ट्रस्टी अनिल कुमार तिवारी ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे वातावरण से कार्बन डाई आक्साइड एवं ग्रीन हाउस गैस का प्रभाव कम करने में मदद मिलेगी। काफी संख्या में लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। स्थानीय निकायों की आमदनी भी बढ़ेगी, जैविक खेती करने वाले किसानों को खाद भी सुलभ होगी।

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