अनुपयोगी जमीनों के प्रबंधन के लिए राज्य स्तरीय नीति बनेगी -मुख्य सचिव निरंजन आर्य

Jaipur: मुख्य सचिव निरंजन आर्य (Niranjan Arya) ने कहा है कि राज्य सरकार (State Government) के विभिन्न विभागों के अधीन खाली पड़ी और अनुपयोगी जमीनों अथवा भूखण्डों तथा नजूल सम्पतियों का चिन्हीकरण कर सूची तैयार की जाएगी. इसके बाद एक राज्य स्तरीय नीति के तहत इन जमीनों का उपयोग अथवा इनके बेचान से प्राप्त राशि का उपयोग आधारभूत ढांचे के विकास के लिए किया जा सकेगा. उन्होंने सभी विभागों को ऐसी जमीनों को चिन्हित कर उसकी सूचियां तैयार करने के निर्देश दिए.

 

आर्य ने गुरूवार को यहां शासन सचिवालय में अनुपयोगी सरकारी जमीनों के बेहतर व्यवसायिक प्रबंधन के लिए राज्य स्तरीय नीति निर्माण के लिए हुई बैठक में यह बात कही. मुख्य सचिव (Chief Secretary) ने कहा कि शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में मौजूद ऐसी भू-सम्पदाओं की भी इन्वेंटरी रजिस्टर की जाए, जो किसी-न-किसी सरकारी विभाग अथवा राजकीय उपक्रम के अधीन हैं और वर्तमान में लम्बे समय से उपयोग में नहीं आ रही हैं.

 

इस अवसर पर प्रमुख शासन सचिव शहरी विकास एवं आवासन कुंजीलाल मीणा ने प्रस्तावित भूमि प्रबंधन नीति (Land management policy) पर एक प्रस्तुतीकरण दिया. उन्होंने इस विषय में पंजाब (Punjab) और कर्नाटक राज्यों में सरकारी भू-सम्पतियों के प्रबंधन मॉडल पर विस्तृत जानकारी दी. मीणा ने कहा कि प्रदेश (Rajasthan News) में अनुपयोगी जमीनों के प्रबंधन के लिए एक राज्य स्तरीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति, जिला स्तरीय समितियां, शहरी विकास कोष आदि बनाने पर विचार किया जा सकता है.

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