खान-पान की सामग्री में मिलावटखोरी स्वीकार नहीं : मुख्यमंत्री

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लखनऊ, 01 अक्टूबर (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पर्व-त्योहारों को देखते हुए खान-पान के वस्तुओं की शुद्धता के लिए प्रदेशव्यापी अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के कार्यों की शनिवार को समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने अधोमानक, नकली, मिलावटी अथवा प्रतिबंधित दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण पर प्रभावी नियंत्रण बनाये रखने के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार सभी 25 करोड़ प्रदेशवासियों के लिए सुरक्षित व स्वास्थ्यप्रद खाद्य एवं औषधि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संकल्पित है। प्रदेश में अधोमानक, नकली, मिलावटी अथवा प्रतिबंधित दवाओं का निर्माण, बिक्री और वितरण किसी भी दशा में नहीं होना चाहिए। ऐसी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखें।

उन्होंने कहा कि मिलावटखोरी आम जन के जीवन से खिलवाड़ है। किसी भी सूरत में मिलावटखोरी को सहन नहीं किया जाएगा। पर्व-त्योहारों को देखते हुए खाद्य पदार्थों की जांच की कार्रवाई तेज की जाए। मिलावटी खाद्य पदार्थों के बिक्री की हर शिकायत पर तत्काल कार्रवाई हो। मिशन रूप में प्रदेशव्यापी निरीक्षण किया जाना चाहिए। मिलावटखोरों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए।

यह सुखद है कि विगत दिनों सात मंडल मुख्यालयों पर सचल खाद्य जांच प्रयोगशालाओं का संचालन प्रारंभ हो गया है। मेरठ, गोरखपुर और आगरा में दवाओं के नमूनों का विश्लेषण करने की सुविधा भी शुरू हो गई है। इसी प्रकार, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, बस्ती, मुरादाबाद, झांसी, सहारनपुर, अलीगढ़, मिर्जापुर, बरेली, आजमगढ़, अयोध्या और देवीपाटन मंडल में मंडलीय प्रयोगशालाओं का निर्माण जल्द से जल्द पूरा कराया जाए। जिला स्तर पर एक नोडल अधिकारी तैनात करते हुए इन कार्यों की दैनिक मॉनीटरिंग की जाए। यह व्यापक जनहित से जुड़ीं महत्वपूर्ण परियोजनाएं हैं। इसमें अनावश्यक देरी होने पर जवाबदेही तय की जाएगी।

वर्तमान में प्रदेश में खाद्य प्रयोगशालाओं की विश्लेषण क्षमता 30 हजार खाद्य नमूने प्रति वर्ष की है। प्रयोगशालाओं की संख्या और क्षमता बढ़ाते हुए इसे एक लाख से अधिक नमूने की क्षमता तक बढ़ाया जाए। इसी प्रकार, औषधि प्रयोगशालाओं की विश्लेषण क्षमता 50 हजार औषधि नमूने प्रति वर्ष पहुंचानी है। यह अभी 10 हजार औषधि नमूने प्रति वर्ष है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के प्रयासों के क्रम में ड्रग लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को और सरल किया जाना आवश्यक है। आवेदन के बाद लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया एक तय समय-सीमा के भीतर पूरी होनी चाहिए। आवेदक को परेशान न होना पड़े। इस दिशा में आवश्यक कार्यवाही की जाए। औषधि नियंत्रक के पद पर योग्य अधिकारी का चयन करते हुए पूर्णकालिक तैनाती की जाए।

राज्य प्रयोगशालाओं की क्षमता वृद्धि के लिए सीएसआईआर, आईआईटीआर, एनबीआरआई, सीमैप और डीआरडीओ एवं केन्द्रीय प्रयोगशालाओं, संस्थानों का सहयोग लिया जाना उचित होगा। प्रदेश के सभी मंडलों में खाद्य प्रयोगशालाओं का एनएबीएल प्रमाणीकरण कराएं।

प्रयोगशालाओं में जांच उपकरणों की कमी न रहे। मानकों के अनुरूप इनके रखरखाव, वैधता अवधि, क्रियाशीलता आदि का परीक्षण किया जाए। औषधि एवं प्रयोगशाला संवर्ग की समीक्षा करते हुए आवश्यकतानुसार नए पद भी सृजित किए जाने चाहिए। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि प्रयोगशालाओं में योग्य और दक्ष कार्मिकों की तैनाती होनी चाहिए। साइंटिफिक अफसर, माइक्रोबायोलॉजिस्ट, विश्लेषक, सहित सभी महत्वपूर्ण पदों पर योग्य युवाओं के चयन की कार्यवाही जल्द से जल्द पूरी कर ली जाए।

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