अलीगढ़ में कब्रिस्तान पर चला बुलडोजर 12 करोड़ की सरकारी जमीन मुक्त, सपा काल के खेल का हुआ खुलासा

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News India Live, Digital Desk : उत्तर प्रदेश में अवैध अतिक्रमण और सरकारी भूमि पर कब्जों के खिलाफ योगी सरकार का 'बुलडोजर अभियान' अब और आक्रामक हो गया है। संभल के बाद अब अलीगढ़ में जिला प्रशासन और अलीगढ़ विकास प्राधिकरण (ADA) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 12 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराया है। बुधवार को किशनपुर इलाके में अवैध रूप से बनाए गए एक कब्रिस्तान के निर्माण को जमींदोज कर दिया गया।

12 करोड़ की जमीन और सपा शासन का कनेक्शन

यह मामला किशनपुर स्थित गोविला गैस एजेंसी के पास स्थित गाटा संख्या-22 की बेशकीमती जमीन का है।

अवैध कब्जा: प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, यह जमीन एडीए की आवासीय परियोजना के लिए आरक्षित थी।

सपा काल का मोड़: आरोप है कि साल 2013 में समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान इस कीमती भूमि को कब्रिस्तान बताकर इस पर अवैध कब्जा कर लिया गया था।

विधायक निधि (MLA Fund) के गलत इस्तेमाल पर सवाल

इस मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि इस अवैध कब्जे और निर्माण के लिए तत्कालीन विधायकों की निधि (MLC/MLA Fund) का इस्तेमाल किया गया था। सरकारी फंड से बाउंड्रीवॉल और अन्य बुनियादी ढांचे तैयार किए गए थे। अब प्रशासन इस बात की जांच कर रहा है कि आखिर सरकारी जमीन पर विधायक निधि खर्च करने की अनुमति कैसे दी गई।

मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के आदेश पर एक्शन

यह अवैध कब्जा सालों से फाइलों में दबा हुआ था। हाल ही में स्थानीय नागरिकों ने इसकी शिकायत सीधे लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय में की।

जांच: मुख्यमंत्री के निर्देश पर कमिश्नर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी बनाई गई।

परिणाम: जांच में पुष्टि हुई कि यह जमीन पूरी तरह एडीए की है और इस पर किया गया निर्माण गैर-कानूनी है।

भारी पुलिस बल के बीच ध्वस्तीकरण

बुधवार सुबह जब एडीए सचिव दीपाली भार्गव के नेतृत्व में बुलडोजर मौके पर पहुँचे, तो वहां तनाव की स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। बिना किसी विरोध के बाउंड्रीवॉल और पक्के निर्माणों को ढहा दिया गया।

आगे की कार्रवाई: दोषियों पर गिरेगी गाज?

प्रशासन अब इस जमीन का नए सिरे से सीमांकन (Demarcation) कर रहा है ताकि यहां स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। एडीए सचिव ने संकेत दिए हैं कि इस फर्जीवाड़े में शामिल तत्कालीन अधिकारियों और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई और FIR की तैयारी की जा रही है।