कोविड के केस में उछाल का असर शॉर्ट टर्म:कोविड की दूसरी लहर से इकोनॉमिक रिकवरी रहेगी असमान, लेकिन शेयर बाजार में करेक्शन देगा खरीदारी का मौका

 

  • कोविड समाज में असमानता बढ़ाएगा, इकोनॉमी में रिकवरी V नहीं, K शेप में होगी: फॉर्मर RBI गवर्नर सुब्बाराव
  • दिग्गज ब्रोकरेज हाउस नोमुरा ने 2021 के लिए GDP ग्रोथ एस्टीमेट को 12.4% से घटाकर 11.5% कर दिया
  • इस वित्त वर्ष GDP अधिकतम 12.5% बढ़ने का अनुमान, भारत दुनिया में सबसे तेज ग्रोथ वाली मेजर इकोनॉमी होगी

कोविड के बढ़ते संक्रमण से इकोनॉमिक रिकवरी के बेपटरी होने का डर बढ़ा है, हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हार्ड लॉकडाउन की संभावना से इनकार किया है। लेकिन कोविड के चलते अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान का डर शेयर बाजार पर साफ देखा गया जो हफ्ते के पहले कारोबारी दिन धराशायी हो गया। NSE निफ्टी और BSE सेंसेक्स दोनों में लगभग साढ़े तीन पर्सेंट की गिरावट आई।

कोविड की दूसरी लहर के चलते रिकवरी अब V नहीं, K शेप में होगी

ऐसे में RBI के फॉर्मर गवर्नर डी सुब्बाराव की बात अहम हो जाती है जो उन्होंने इकोनॉमी पर कोविड के असर के बारे में कही है, जिसमें रिकवरी अब V नहीं, K शेप में होगी। उनके मुताबिक, कोविड के चलते समाज में असमानता बढ़ रही है जिसकी वजह से कंजम्पशन घटेगा और लॉन्ग टर्म में इकोनॉमिक ग्रोथ की संभावना घटेगी।

नोमुरा ने GDP ग्रोथ एस्टीमेट को 12.4% से घटाकर 11.5% कर दिया

मार्च 2022 को खत्म वित्त वर्ष में देश की GDP के अधिकतम 12.5% दर से बढ़ने का अनुमान है। इससे यह दुनिया में सबसे तेज ग्रोथ वाली मेजर इकोनॉमी बनेगी। हालांकि यह अनुमान इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए सरकार और RBI की तरफ से उठाए कदमों से इकोनॉमिक रिकवरी होने के बाद आया है। ऐसे में उसके जारी रहने की उम्मीदों को कोविड के मामलों में उछाल तोड़ रहा है। सोमवार को नोमुरा ने 2021 के लिए GDP ग्रोथ एस्टीमेट को 12.4% से घटाकर 11.5% कर दिया।

RBI और सरकार के हाथ बंधे होने से रिकवरी में वक्त लगेगा, K शेप में होगी

सुब्बाराव के मुताबिक इस बार सरकार और RBI के पास इकोनॉमी को सपोर्ट देने के लिए बहुत कम गुंजाइश होगी। सरकारी खर्च में हुई बढ़ोतरी के चलते आर्थिक राहत की गुंजाइश घट सकती है जबकि महंगाई RBI को अहम ब्याज दर घटाने से रोकेगी। इससे रिकवरी में वक्त लगेगा और वह V नहीं K शेप में होगी, यानी यह कहीं ज्यादा तो कहीं कम होगी और असमानता बढ़ाने वाली होगी।

आने वाले महीनों में कंपनियों के प्रॉफिट के अनुमान में कमी आ सकती है

एनालिस्टों का कहना है कि कोविड की दूसरी लहर से रिकवरी पलटेगी तो नहीं, लेकिन इकोनॉमी को फुल रिकवरी में ज्यादा वक्त लगेगा। आने वाले महीनों में कंपनियों के प्रॉफिट के अनुमान में कमी आ सकती है। कोविड संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र के अलावा कर्नाटक, गुजरात, राजस्थान, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश और पंजाब में आए हैं। बढ़ते मामलों से निपटने के लिए कुछ राज्यों में नाइट कर्फ्यू लगाया गया तो कुछ जगहों पर लोगों के आने जाने पर पाबंदी लगाई गई है।

भारत में रिकवरी असमान रही है, इमर्जिंग मार्केट में दूसरों से पीछे रही है

दिग्गज ब्रोकरेज फर्म इडलवाइज का कहना है कि इंडिया में कोविड को लेकर पाबंदियां बढ़ी हैं। यहां रिकवरी असमान रही है और इस मोर्चे पर यह इमर्जिंग मार्केट में दूसरों से पीछे रही है। अमेरिका में भी आवागमन पर पाबंदी लगी है, लेकिन यूरोप के मुकाबले वहां पाबंदियां कम है और ज्यादा लोगों का टीकाकरण हुआ है। दूसरी लहर से दोनों जगह आर्थिक गतिविधियों में भी कमी आई, लेकिन पहली बार जितनी नहीं।

आने वाली तिमाहियों में ग्लोबल ग्रोथ तेज होना राहत वाली बात

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि इकोनॉमिक ग्रोथ में आई तेजी कुछ समय के लिए थम सकती है और मैन्युफैक्चरिंग से ज्यादा झटका सर्विसेज को लग सकता है। लेकिन राहत वाली बात यह है कि आने वाली तिमाहियों में ग्लोबल ग्रोथ तेज हो सकती है क्योंकि बाजार में पूंजी की कमी नहीं है और ब्याज दरें भी कम हैं। वैसे सरकार भी खर्च बढ़ा रही है।

रिकवरी की उम्मीदों पर टिकी है शेयरों में तेजी, करेक्शन होगा निवेश का मौका

प्रभुदास लीलाधर ने सोमवार को जारी अपनी स्ट्रैटेजी रिपोर्ट में लिखा है कि कोविड के मामलों में तेज उछाल के चलते लॉकडाउन होने से जून क्वॉटर में रिकवरी कुछ समय के लिए रुक सकती है। इस वित्त वर्ष कंपनियों का प्रति शेयर मुनाफा घट सकता है लेकिन वित्त वर्ष 2023 के बारे में अभी कुछ कहना मुश्किल होगा। शेयर बाजार में तेजी आर्थिक रिकवरी की उम्मीदों और ग्लोबल मार्केट से आ रहे रिकॉर्ड निवेश की वजह से है, लेकिन करेक्शन निवेश का अच्छा मौका होगा।

महाराष्ट्र करता है GDP ग्रोथ में 11% और प्रॉफिट ग्रोथ में 30% का योगदान

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट VK विजयकुमार कहते हैं कोविड संकट गहराया है लेकिन इकोनॉमी और मार्केट पर क्या असर होगा, इसको लेकर फिलहाल कुछ साफ नहीं है। महाराष्ट्र में हालात बेहद बुरे हैं, इसलिए कोविड के चलते GDP ग्रोथ में लगभग 11% और इंडिया इंक के प्रॉफिट ग्रोथ में 30% के अनुमानित योगदान में खासी कमी आ सकती है।

 

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