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कफ्र्यू के नाम पर जमकर हो रही कालाबाजारी

भोपाल :  कोरोना वायरस के खौफ में लोग घरों में कैद हैं, लेकिन जरूरत का सामान बेचने वालों ने कालाबाजारी शुरू कर दी है। शहर का कोई ऐसा कोना नहीं है जहां अधिक दाम पर समान नहीं बेचे जा रहे हैं। दरअसल, लॉक डाउन की स्थिति में हर व्यक्ति की यही कोशिश है कि वह अधिक से अधिक खाद्य सामग्री अपने घर में लाकर रख दे। लोगों की इस भावना को देखते हुए कुछ दुकानदार कालाबाजारी में जुट गए हैं।
गौरतलब है कि शासन-प्रशासन ने ऐलान किया है कि लोगों को किसी भी चीज की कमी नहीं होने दी जाएगी।

इसी के तहत गुरूवार को शहर के सभी बड़े मार्केट खोले गए थे। लेकिन कुछ क्षेत्रों में समान की कमी दिखाकर अधिक दाम लेकर सामान देने की खबरें सामने आई हैं।
-80 का पानी 100 में बेचा
शासन-प्रशासन ने चेतावनी दी है कि इस आपात स्थिति में कोई भी दुकानदार कालाबाजारी न करें। लेकिन इस चेतावनी को दरकिनार कर कुछ दुकानदार मनमाना रेट ले रहे हैं। गुरूवार को शाहपुरा थाना अंतर्गत रोहित नगर ए ब्लॉक स्थित दीपेश स्टोर में सामान की कालाबाजारी की गई। दीपेश स्टोर संचालक ने दुकान का सामने का शटर बन्द कर साइड से पूरे दिन माल बेचा। सबसे ज्यादा किल्लत पानी की थी।

लक्ष्मी परिसर गेट के सामने स्थित इस स्टोर के मालिक पुरुषोत्तम विजयवर्गीय ने पड़ोस की बिसलेरी एजेंसी से 20 लीटर पानी के जार 75 रुपए में खरीदकर 100 रुपए प्रति जार बेचा, जबकि इस जार की एमआरपी 80 रुपए है।

-दामों पर ही दिया गया
इसी तरह रोहित नगर ए ब्लॉक स्थित बेरछा मावा के सामने 35-40 रुपए का हर नारियल 80 रुपए में और 30 रुपए प्रतिकिलो वाला मध्यम संतरा 80-85 रुपए किलो बेचा जा रहा था। नवरात्र शुरू होने से केले की शॉर्टेज हो गई। तिलक नगर के रहवासी राजेश पटेल ने बताया कि बड़े स्टोर्स ने भी खूब मौके का फायदा उठाकर चांदी काटी। रियायती दर पर बुक माल को ज्यादा दामों पर ही दिया गया।

-न्यूनतम 2 साल तक की सजा
उधर भोपाल पुलिस ने एक आदेश जारी किया है जिसमें कहा है कि भोपाल शहर के सभी नागरिकों , व्यापारियों को सूचित किया जाता है कि कोरोना वायरस आपदा के दौरान आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी अथवा संग्रहण कानूनी अपराध है।
-कालाबाजारी कानूनी जुर्म है
कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न हुई इस विषम आपदा की स्थिति में नागरिकों के उपयोग के लिए प्रदाय की जाने वाली अथवा उपयोग में आने वाली वस्तुओं की कालाबाजारी तथा संग्रहण कानूनी जुर्म है आपदा नियंत्रण अधिनियम 2005 की धारा 53 , आवश्यक वस्तु अधिनियम तथा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में संज्ञेय अपराध है।

-चोरी-छिपे बिक रही शराब, 80 रुपए का पाव 200 में
कफ्र्यू में जहां आम जनता जरूरतों की चीजों के लिए परेशान हो रही हैं वहीं शराब के शौकीन भी जुगाड़ में लगे हुए हैं और इसका फायदा कालाबाजारी करने वाले उठा रहे हैं। हालात यह है कि 80 रुपए में मिलने वाला देसी शराब का क्वार्टर 200 रुपए में मिल रहा है, फिर भी लोग नहीं मान रहे हैं। अंग्रेजी शराब की बोतलों के दाम तो डेढ़ हजार रुपए तक पहुंच गए हैं। आबकारी विभाग ने शराब दुकानें भी बंद कर दी है, लेकिन पीने के शौकीनों को शराब की तलब लग रही है और वे इसके लिए मनमाने दाम देने के लिए तैयार हैं। शहर की कुछ बस्तियों में जहां अवैध शराब का व्यवसाय होता है, वहां शराब महंगे दामों में बेची जा रही है।

सूत्रों के अनुसार निचली बस्तियों में देसी शराब का जो क्वार्टर 80 रुपए में आता है उसके 200 रुपए तक लिए जा रहे हैं। इसको लेकर विवाद भी हो रहे हैं, लेकिन शराब के शौकीनों की तलब ऐसी है कि लोग मनमाने दाम देने में भी पीछे नहीं हट रहे हैं। अंग्रेजी शराब की जो बोतलें 800 रुपए तक में मिलती थीं, वह अब 1500 रुपए के आसपास बिक रही है। बताया जा रहा है कि जो दुकानें बंद हो गई हैं, उनसे पहले ही अवैध शराब बेचने वालों ने खरीदी कर ली थी तो अब उसे मनमाने दाम में बेचा जा रहा है। यही नहीं शराब के साथ-साथ गुटखा, तम्बाकू के लिए भी लोग भटकते दिखाई दिए।

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