भाजपा ने याद दिलाया किसान कर्ज माफी का वादा, पूनिया ने सीएम को लिखा पत्र

Jaipur: भारतीय जनता पार्टी ने सरकार को प्रदेश में किसानों की कर्ज माफी का वादा याद दिलाया. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पत्र लिखकर कहा कि विधानसभा चुनावों के वक्त जनघोषणा पत्र और कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दस दिन में कर्ज माफी का वादा किया था, लेकिन आज तक किसानों की कर्जमाफी नहीं हो सकी. मुख्यमंत्री से किसान हित में निर्णय लेकर किसानों को राहत देने की मांग की.

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने मुख्यमंत्री का ध्यान आकर्षित करते हुए लिखा कि राजस्थान का किसान चुनौतियों का सामना कर रहा है. खेती में उतार चढ़ाव के कारण आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कर्ज लेता है. आय के अन्य स्रोत नहीं होने के कारण कर्ज उसका मर्ज बनता चला जा रहा है. राजस्थान में किसान विभिन्न बैंकों सहित अन्य वित्तीय संस्थाओं का कर्जदार है. कर्ज न चुका पाने के कारण हताश एवं निराश है. तीन साल से आमहत्या जैसे कदम उठाने के लिए मजबूर है.

राहुल गांधी का वादा निभाए सरकार 
पूनिया ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने किसानों से वर्ष 20218 में चुनावों के दौरान कर्ज माफी का वादा किया था, लेकिन कर्ज माफ नहीं होने से किसान हताश है. एक रिपोर्ट के अनुसार एक लाख 35 हजार किसानों की जमीन कुर्की के दायर में आ रही है, इन किसानों पर दो हजार 928 करोड़ रुपये बाकी है. बैंकों ने इन खतों को एनपीए में डालकर वसूली के लिए रिमूवल ऑफ डिफिक्लटीज एकट के तहत केस दर्ज कराए हैं. करीब 80 हजार एनपीए खाते एक साल पुराने हैं.

वन टाइम सेटलमेंट में रुचि नहीं दिखाई
पूनिया ने अपने पत्र में लिखा कि एसबीआई ने एनपीए वनटाइम सेटलमेंट के तहत दस प्रतिशत राशि लेकर खाते बंद किए थे, लेकिन सरकार ने रुचि नहीं दिखाई. अब बैंको को वन टाइम सेटलमेंट के लिए कहा जब बैंकों ने 9 हजार किसानों की जमीन नीलामी की कार्रवाई शुरू कर दी. अलवर में शहीद यादराम के पिता समेत छह किसानों की जमीन नीलाम कर दी गई. किसान कभी अतिवृष्टि कभी सूखा जैसे हालात से लड़ रहे हैं.

केंद्र पर डालने के बजाय राज्य सरकार पूरा करे वादा

पूनिया ने लिखा कि सरकार के 2018 चुनाव में किए वादे को पूरा करे. केंद्र पर डालने के बजाय और लिखने के बजाय किसानों के बकाया लोन के समान की जिम्मेदारी राज्य सरकार अपने ऊपर लें. मुख्यमंत्री किसानों के लोन सेटलमेंट कर जमीनों को नीलामी से मुक्त करें.

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