Kerala: नन दुष्कर्म मामले में सभी आरोपों से बरी हुए बिशप फ्रैंको मुलक्कल, मगर अदालत ने अपने फैसले में क्या कहा? पढ़ें

केरल नन दुष्कर्म मामले (Kerala nun case) में सुनाए गए फैसले में आरोपी बिशप फ्रैंको मुलक्कल (Bishop Franco Mulakkal) को दोषी नहीं माना गया. इस फैसले को लेकर समाज के विभिन्न वर्गों से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. नन का समर्थन करने वाले लोगों ने इसे अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य बताया, जबकि बिशप और कैथोलिक चर्च के लोगों ने इसे सत्य की जीत के रूप में देखा. शुक्रवार की देर शाम मामले में फैसला सुनाया गया.

अदालत के अनुसार, पीड़िता बिशप को पिता जैसा मानती थी और उसे उम्मीद नहीं थी कि वह उसका यौन शोषण करेगा. अदालत ने देखा कि बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि एक नन के रूप में उसे बिशप के साथ यात्रा करने के लिए मजबूर किया गया. ऐसे में ये बात साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं है कि दोनों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध नहीं थे. यहां गौर करने वाली बात ये है कि नन और बिशप के साथ मौजूद एक गवाहों में से एक ने कहा कि नन ने बिशप के आसपस बिल्कुल सामान्य व्यवहार किया.

अदालत ने इन बातों पर भी किया गौर

रिपोर्ट के मुताबिक, अभियोजन पक्ष की ओर से आरोपी बिशप के बुरे चरित्र को लेकर भी बात की गई. हालांकि, अदालत ने कहा कि आरोपी का खराब चरित्र मामले से संबंधित नहीं है. इसके अलावा, अभियोजन द्वारा आरोपी के कार्यभार संभालने के बाद 18 ननों द्वारा समूह को छोड़ने के संबंध में दिए गए तर्क की भी जांच की गई. कोर्ट के मुताबिक, इस बात का कोई सबूत नहीं है कि नन बिशप की वजह से समूह छोड़कर गई थीं. एक टेलीविजन इंटरव्यू ने भी एक तर्क के निष्कर्ष में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई कि आरोपी नन से छेड़छाड़ करने के इरादे से कई बार कॉन्वेंट में रहा.

हालांकि, ये साबित नहीं हो सका, क्योंकि गवाह सिस्टर अनुपमा ने कहा कि बिशप का कॉन्वेंट में रहना असामान्य नहीं कहा जा सकता है. ये फैसला चर्च में गुटों और झगड़ों की ओर भी इशारा करता है. बचाव पक्ष यह बताने में कामयाब रहा कि पादरियों का एक वर्ग आरोपी के खिलाफ काम कर रहा था. अदालत ने कई मामलों में यह देखा कि क्या मामला दर्ज करने में देरी और एफआईआर दर्ज करने में देरी को संतोषजनक ढंग से समझाया जा सकता है. हालांकि, अभियोजन पक्ष भी इसे समझने में विफल रहा. सुप्रीम कोर्ट के वकील कलीस्वरम राज के अनुसार, कानूनी अर्थों में निर्णय अच्छी तरह से दिया गया था.

फैसलों में इन बातों का भी रखा गया ख्याल

अदालत ने समापन भाग में मुख्य बिंदुओं पर चर्चा करते हुए बताया कि आखिर क्यों बिशप फ्रैंको मुलक्कल को बरी किया गया. अदालत ने पीड़िता द्वारा बातों को बढ़ा चढ़ाकर पेश करने को देखा और कहा कि उसने तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया. अदालत ने आगे पाया कि पीड़िता अन्य लोगों के प्रभाव से प्रभावित थी, जिनके मामले में निहित स्वार्थ जुड़े हुए थे. अदालत के अनुसार, पीड़िता और उसके सहयोगी ननों के बीच लड़ाई, प्रतिद्वंद्विता और सत्ता पाने की इच्छा दिखाई देती है. पता चलता है कि अगर बिहार के तहत एक अलग क्षेत्र की मांग को चर्चा द्वारा स्वीकार कर लिया जाता तो मामला सुलझ जाता. ये फैसला बिशप को दोषी नहीं घोषित करने के साथ समाप्त होता है. इसके बाद अदालत ने कहा कि जब सत्य को असत्य से अलग करना संभव नहीं है, तो सबूतों को खत्म करना ही विकल्प होता है.

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