बिहार: स्लम बस्ती में रहने वाले ने इस शख्‍स ने बाइक राइडिंग में बनाया इंडिया बुक रिकॉर्ड, 12 घंटे में तय की 720km की दूरी

इंसान अगर चाहे तो मेहनत और लगन से हर सपना सच कर सकता है. पटना के दक्षिणी मंदिरी स्लम बस्ती में रहने वाले राजीव कुमार ने भी अपनी मेहनत से कुछ ऐसा कर दिखाया है. जो सबके लिए मिसाल बन गया है.दरअसल स्लम में रहने वाले राजीव ने बाइक राइडिंग में इंडिया बुक रिकॉर्ड बनाया है. 32 साल के राजीव ने इंडिया गेट से जयपुर और जयपुर से आगरा तक की 720 किलोमीटर की दूरी 12 घंटे में तय करके इंडिया रिकॉर्ड बनाया है. 1 अप्रैल को उन्हे इसका सर्टिफिकेट और मेडल मिला मिल चुका है.

पेशे से राजीव सीनियर रिसर्च ऑफिसर हैं, और उन्होंने देश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए गोल्डन त्रिकोण बनाते हुए महज 12 घंटे में 720 किलोमीटर की दूरी तय की है.

बाइक राइडिंग की प्रेरणा मिली बड़े भाई से

राजीव ने बताया कि उन्हे बाइक राइडिंग करने की प्रेरणा अपने बड़े भाई संजीव कुमार से मिली. उन्होंने कहा कि पर्यटन को लेकर देश में लोग ज्यादा अवेयर नहीं है. लोगों को यह भी नहीं पता है कि आगरा, दिल्ली और जयपुर तीनों ही इंटरनेशनल पर्यटन स्थल हैं. तीनों पर्यटन स्थलों को एक दूसरे के साथ कनेक्ट करने पर टूरिज्म को और भी ज्यादा बढ़ावा मिलेगा. राजीव ने कहा कि वो हमेशा से देखता आया है कि लोग राइड करते समय हेलमेट नहीं पहनते जिस कारण आए दिन देश में ना जाने कितने एक्सीडेंट होते हैं. लोगों को सड़क दुर्घटना से बचने के लिए हेलमेट पहनने की अहमियत और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बाइक राइडिंग की थी.

राजीव ने बताया यह राइड उनके लिए एक बेहतरीन एक्सपीरियंस रही है. उनकी राइडिंग जीपीएस आधारित थी. हर जगह जाकर उन्हे वीडियो और लोकेशन शेयर करते रहना था. इसी के आधार पर ही उन्हें इंडिया बुक रिकॉर्ड में मिला है.

सीनियर रिसर्च ऑफिसर हैं राजीव

राजीव एक मध्य वर्गीय परिवार से है. उनके दो भाई और 3 बहने हैं. मां कौशल्या देवी हाउस वाइफ हैं, और पिता चंद्रिका मल्लिक सामाजिक कार्यकर्ता हैं. राजीव ने अपनी स्कूलिंग संत जेवियर स्कूल से की है. जिसके बाद उन्होंने ग्रेजुएशन डिग्री बीएन कॉलेज से ली और दिल्ली यूनिवर्सिटी से बायोटेक में मास्टर्स करने के बाद दिल्ली में ही सीनियर रिसर्च ऑफिसर की नौकरी कर रहे हैं.

परिवार के लोग बेटे की इस सफलता से हैं बेहद खुश

राजीव ने बताया कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति कभी भी अच्छी नहीं रही, लेकिन उनके माता-पिता ने उन्हे कभी कोई काम करने से नहीं रोका. आज उनकी इस कामयाबी से सबसे ज्यादा उनके माता-पिता ही खुश है.

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