सेना प्रमुख एमएम नरवणे की इन बातों से ‘आग बबूला’ हुए पाकिस्तान और चीन, एक ने बयान को किया खारिज, दूसरे ने कहा परहेज करें

भारतीय सेना के प्रमुख जनरल एमएम नरवणे (Indian Army Chief General MM Naravane) ने बुधवार को अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीन और पाकिस्तान (Pakistan) सहित लगभग हर मुद्दे पर बात की. इस दौरान उन्होंने देश में सुरक्षा से जुड़े हालातों की भी पूरी जानकारी दी. उनके इन बयानों पर अब चीन और पाकिस्तान की प्रतिक्रिया आई है. इन दोनों ही देशों ने सेना प्रमुख की टिप्पणी पर नाराजगी व्यक्त की. पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा (Line of Control) के पार ‘लॉन्च पैड’ (आतंकियों के शिविर) और ‘प्रशिक्षण’ केंद्र होने संबंधी भारतीय थल सेना प्रमुख की टिप्पणी को ‘बेबुनियाद आरोप’ करार देते हुए खारिज कर दिया है.

 

सेना दिवस से पहले एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए नरवणे ने कहा था कि एलओसी के दूसरी (पाकिस्तान की) तरफ आतंकियों के ‘लॉन्च पैड’ और प्रशिक्षण केंद्रों में मौजूद लगभग 350 से 400 आतंकवादियों की बार-बार घुसपैठ की कोशिशें, उनके नापाक इरादों का खुलासा करती हैं (Pakistan Terrorists). पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि इन ‘बेबुनियाद आरोपों’ में कोई नई बात नहीं है और ये आरोप ‘पाकिस्तान विरोधी दुर्भावनापूर्ण दुष्प्रचार’ का हिस्सा हैं. पाकिस्तानी विदेश कार्यालय ने कहा कि जम्मू-कश्मीर समेत सभी विवादों के समाधान के लिए पाकिस्तान, भारत के साथ सार्थक वार्ता के लिए प्रतिबद्ध है.

चीन ने कहा परहेज करें

वहीं चीन ने कहा कि उसे उम्मीद है कि भारत में ‘संबद्ध लोग’ ‘गैर-रचनात्मक टिप्पणियां’ करने से परहेज करेंगे. बीजिंग की यह टिप्पणी थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की उस टिप्पणी के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पूर्वी लद्दाख में खतरा ‘किसी भी तरह से कम नहीं हुआ है’ और भारतीय सेना (Indian Army) ‘दृढ़ता’ और ‘साहसिक’ तरीके से चीनी सेना से निपटना जारी रखेगी. नरवणे पिछले 20 महीने से जारी सीमा गतिरोध का जिक्र कर रहे थे, जिसकी वजह से दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव पैदा हुआ है.

 

युद्ध को बताया था आखिरी उपाय

जनरल नरवणे ने सेना दिवस (15 जनवरी) से पहले बुधवार को संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह भी कहा था कि युद्ध या संघर्ष हमेशा ‘अंतिम उपाय’ होता है, लेकिन अगर इसे भारत पर थोपा जाता है, तो देश विजयी होगा (India Ladakh News). उनकी टिप्पणी उस दिन आई जब भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में सैन्य गतिरोध को हल करने के लिए कोर कमांडर स्तर की 14 वें दौर की वार्ता की. हालांकि भारत और चीन की सेनाओं के बीच 14वें दौर की वार्ता में कोई सफलता नहीं मिली, लेकिन दोनों पक्ष जल्द से जल्द शेष मुद्दों के पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान के लिए निकट संपर्क में रहने और बातचीत बनाए रखने पर सहमत हुए.

सुरक्षा एवं स्थिरता की होगी कोशिश

इस संबंध में एक संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों पक्ष पिछले परिणामों को मजबूत करने और पश्चिमी क्षेत्र में जमीन पर सुरक्षा एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रभावी प्रयास करने पर भी सहमत हुए हैं (India China Standoff). जनरल नरवणे की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘अब चीन और भारत सीमा तनाव को कम करने के लिए राजनयिक एवं सैन्य चैनल के माध्यम से संपर्क एवं बातचीत कर रहे हैं.’ पश्चिमी मीडिया के एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, ‘हमें उम्मीद है कि भारतीय पक्ष के संबद्ध लोग गैर-रचनात्मक टिप्पणी करने से परहेज करेंगे.’

14वें दौर की बैठक भी पूरी हुई

चीन के विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर वांग की यह टिप्पणी चीन-भारत के बीच बुधवार को सीमा बिंदु पर चीन की ओर चुशूल-मोल्दो में 14वें दौर की कमांडर स्तरीय बैठक के बाद आई है. नई दिल्ली में सुरक्षा प्रतिष्ठान के सूत्रों ने बुधवार को कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चुशूल-मोल्दो सीमा बिंदु पर चीन के साथ हुई 14वें दौर की सैन्य वार्ता के दौरान भारत ने देपसांग बुलगे और डेमचोक में मुद्दों के समाधान सहित पूर्वी लद्दाख में तनाव के सभी शेष बिंदुओं से सैनिकों को जल्द से जल्द हटाने की बात पर जोर दिया.

बेनतीजा रही थी पिछली बैठक

इससे पहले, 13वें दौर की वार्ता 10 अक्टूबर को हुई थी, जिसमें कोई नतीजा नहीं निकला था. भारत और चीन की सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख में सीमा गतिरोध पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक झड़प के बाद पांच मई, 2020 को शुरू हुआ था. इसके बाद, दोनों पक्षों ने धीरे-धीरे हजारों सैनिकों के साथ-साथ वहां भारी अस्त्र-शस्त्रों की भी तैनाती कर दी. सैन्य और कूटनीतिक वार्ताओं के परिणामस्वरूप, दोनों पक्षों ने पिछले साल पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी छोर क्षेत्र सहित गोगरा इलाके से भी सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया पूरी की थी. वर्तमान में संवेदनशील क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर दोनों पक्षों में से प्रत्येक ने लगभग 50,000 से 60,000 सैनिक तैनात कर रखे हैं.

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