शतक की आंधी में उड़ी विरोधी टीम, रिकॉर्डतोड़ मैच में 10वें नंबर के खिलाड़ी का आतंक, टूर्नामेंट के इतिहास का सबसे बड़ा स्कोर बना

क्रिकेट (Cricket) में रन और रिकॉर्ड (Record) की न जानें कितनी दास्तान सुनने को मिली है. पर, यकीन मानिए हम जो बताने जा रहे हैं वो उन सबसे जुदा है. क्योंकि, क्रिकेट की ये रिकॉर्डतोड़ स्टोरी न तो 21वीं सदी की है और न ही उससे पहले 20वीं सदी की. बल्कि इसके तार 19वीं सदी से जुड़े हैं. ये मुकाबला 1896 में खेला गया था, जिसमें क्या नहीं था. शतकों की आंधी थी. रनों की बाढ़ थी. टीम की ठाठ जमा देने वाली हुई साझेदारी के किस्से थे. और, एक खिलाड़ी का आतंक भी था, जिसने 10वें नंबर पर उतर महफिल लूट ली थी. उसने न सिर्फ बल्ले से सामने खड़ी विरोधी टीम पर अत्याचार किया बल्कि गेंद से भी उन पर कहर बरपाया.

1896 में खेला गया ये मैच इंग्लैंड में होने वाले काउंटी चैंपियनशिप (County Championships) की पिच पर खेला गया था. मुकाबला 3 दिवसीय था और आमने सामने थी यॉर्कशर और वार्विकशर (Warwickshire v Yorkshire) की टीमें. मैच में यॉर्कशर क्लब ने पहले बैटिंग की और पहली पारी में 887 रन बनाए. स्कोरबोर्ड पर टंगा ये रन अपने आप में जितना बड़ा था, उतनी ही दिलचस्प थी इसकी पीछे की कहानी.

शतक, दोहरा शतक और एक बड़ी साझेदारी

यॉर्कशर के बनाए 887 रन काउंटी चैंपियनशिप के इतिहास में एक पारी में बना सबसे बड़ा स्कोर है. अब इतना बड़ा स्कोर बना कैसे वो भी जान लीजिए. इसके लिए एक बल्लेबाज ने दोहरा शतक, जबकि 3 बल्लेबाजों ने शतक जड़ा. दोहरा शतक यानी 210 रन की पारी 5वें नंबर के बल्लेबाज आर. पील ने खेली. वहीं शतक जमाने वालों में सलामी बल्लेबाज एफएस जैक्सन रहे, जिन्होंने 117 रन बनाए. चौथे नंबर के बल्लेबाज वेनराइट रहे, जिन्होंने 126 रन बनाए. और, 7वें नंबर के बल्लेबाज लॉर्ड हॉके रहे, जिन्होंने 166 रन जड़े. शतकों की इस आंधी के बीच 8वें विकेट के लिए 292 रन की रिकॉर्ड साझेदारी भी देखने को मिली, जिसने यॉर्कशर के स्कोर को 7 विकेट पर 448 रन से 8 विकेट पर 740 रन तक पहुंचाने और टीम के बड़े स्कोर की नींव रखी.

10वें नंबर के बल्लेबाज का बोलबाला और सबसे बड़ा स्कोर

कहने का मतलब ये था कि उस रोज यॉर्कशायर के लिए जो भी खेलने उतर रहा था, वो वार्विकशर की सीधी भाषा में कहें तो बैंड बजा दे रहा था. हद तो तब हो गई जब 10वें नंबर पर खेलने उतरे बल्लेबाज ने भी बहती गंगा में हाथ धो लिया और वार्विकशर के गेंदबाजों की खूब धुनाई की. पेशे से मुख्य तौर पर गेंदबाज रहे जीएच हर्स्ट नाम के खिलाड़ी ने 10वें नंबर पर उतरकर यॉर्कशायर के लिए पहली पारी में 85 रन ठोक डाले. सबसे नीचे के बल्लेबाज के बल्ले से निकले इन रनों ने वार्विकशर के जले पर नमक छिड़का और यॉर्कशर के स्कोर को 887 रन तक पहुंचा दिया.

बल्ले से 85 रन के बाद गेंद से 8 विकेट… ये ‘नंबर 10’ का दम है

वार्विकशर को यॉर्कशर के जिस 10वें नंबर के खिलाड़ी ने बल्ले से रुलाया, उसने उन पर गेंद से भी कहर बरपाया. जीएच हर्स्ट की आग उगलती गेंदों के आगे वार्विकशर के टॉप ऑर्डर ने पहली पारी में टोटल सरेंडर कर दिया. 31 रन पर ही उसके 5 विकेट गिर गए. इसके बाद नीचले क्रम के बल्लेबाजों ने पारी संवारने की भरपूर कोशिश की लेकिन पहले ही खेल इतना बिगड़ चुका था कि उसे कहां तक संवारा जा सकता था. वार्विकशर की पहली पारी 203 रन पर सिमट गई, जिसमें हर्स्ट ने 59 रन देकर 11 में से 8 बल्लेबाजों को अकेले आउट किया. पहली पारी में यॉर्कशर को 684 रन की लीड मिली. उसने वार्विकशर को फॉलोऑन खिलाया. दूसरी पारी में वार्विकशर ने 1 विकेट पर 48 रन बनाए और मैच ड्रॉ हो गया.

8 मई 1896 को बना था सबसे बड़ा स्कोर

यॉर्कशर और वार्विकशर के बीच 3 दिवसीय ये मुकाबला 1896 में 7 मई को शुरू होकर 9 मई तक चला था. लेकिन इसमें बने 887 रन के सबसे बड़े स्कोर की स्क्रिप्ट 8 मई को ही लिखी गई थी.

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