AMMK और AIDMK को साथ लाने से बनेगी तमिलनाडु में बात, बीजेपी की चुनावी रणनीति समझिए

शशिकला ने राजनीति से संन्यास लेकर तमिलनाडु के सियासी समीकरण में बड़ा उलटफेर किया. हालांकि अब बीजेपी और AIDMK के कुछ नेता चाह रहे हैं कि शशिकला के भतीजे टी.टी.वी. दिनाकरन की पार्टी ‘अम्मा मक्कल मुन्नेत्र कषघम’ (AMMK) को AIDMK में शामिल कर लिया जाए. हालांकि मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी और कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इसका कड़ा विरोध किया और इस प्रस्ताव को रद्द कर दिया गया. लेकिन अब जब बीजेपी के बड़े नेताओं और AIDMK के कुछ बड़े नेताओं ने इस पर अंदर बात की तो शायद अब सहमति बन जाए और AMMK, AIDMK के साथ मिलकर चुनाव लड़े.

दरअसल इसका अंदाजा आप शशिकला के बयान से लगा सकते हैं. जब शशिकला ने राजनीति से संन्यास लिया तो उन्होंने कहा कि AIDMK के सभी कार्यकर्ता एक साथ एक जुट हो जाएं और अम्मा के राजनीतिक धरोहर को आगे बढ़ाएं. साथ ही उन्होंने कहा था कि AIDMK के सभी कार्यकर्ताओं को एक साथ आकर DMK को हराना चाहिए. यहां शशिकला के ‘सब कार्यकर्ताओं’ में कहीं न कहीं उनके भतीजे दिनाकरन भी थे. आपको बता दें, जब जयललिता का निधन हुआ था तो AIDMK में दो धड़े हो गए थे. इसके बाद शशिकला पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और उनको जेल जाना पड़ा. इसके बाद ही AIDMK ने उनको और उनके भतीजे को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था. इसके बाद दिनाकरन ने अपनी अलग पार्टी बनाई और 2019 के लोकसभा चुनावों में अच्छा जनाधार पाया. इसी के चलते बीजेपी और AIDMK के बड़े नेताओं को लगता है कि अगर AMMK को साथ ले लिया गया तो विधानसभा में होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है.

दिनाकरन की पार्टी AIDMK में शामिल होगी?

AIDMK के नेताओं और मुख्यमंत्री AMMK को AIDMK में शामिल करने को लेकर राजी नहीं हैं. बल्कि वो यह जरूर चाहते हैं कि वह तमिलनाडु विधानसभा में बतौर सहयोगी दल लड़े और उसे कुछ सीटें दे दी जाएं. दरअसल इसके पीछे के. पलानीस्वामी का डर है क्योंकि पलानीस्वामी को पता है कि दिनाकरन AIDMK के अध्यक्ष रह चुके हैं और शशिकला दशकों से पार्टी में रही हैं इसलिए उनकी अंदर तक पकड़ है. अगर दिनाकरन को पार्टी में फिर से वापस ला दिया गया तो उनके लिए और पन्नीरसेल्वम के लिए मुसीबत खड़ी हो जाएगी. इसलिए वह कभी नहीं चाहेंगे कि दिनाकरन AIDMK में फिर से वापस आएं.

AMMK के आने से गठबंधन मजबूत होगा

दिनाकरन की पार्टी AMMK को ऐसे ही गठबंधन में शामिल नहीं करना चाह रही है उसके पीछे कारण है. दरअसल 2019 लोकसभा चुनावों में AMMK ने पूरे तमिलनाडु में 5.2 प्रतिशत वोट हासिल किया था. इसके साथ ही धीरे-धीरे जनता के बीच उसकी पकड़ मजबूत होती जा रही है. इसलिए बीजेपी को लगता है कि अगर AMMK गठबंधन का हिस्सा हो जाती हे तो इससे NDA गठबंधन को सीधा फायदा होगा. दिनाकरन और शशिकला को तमिलनाडु में मानने वाले बहुत से लोग हैं. AIDMK को भी पता है कि अगर AMMK अलग हो कर चुनाव लड़ती है तो इससे सीधा नुकसान AIDMK को होगा और फायदे DMK को होगा जो वह कभी नहीं चाहेगी.

टी.टी.वी. दिनाकरन के पास कोई विकल्प नहीं

दिनाकरन के पास इस वक्त AIDMK और बीजेपी गठबंधन के साथ मिलने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है. शशिकला ने राजनीति से संन्यास ले लिया है. शशिकला के जाते ही दिनाकरन की पार्टी से एक ऐसा चेहरा चला गया, जिसको लेकर आशंका थी कि वह तमिलनाडु में जयललिता की जगह लेंगी. लेकिन जब आज शशिकला ने राजनीति से संन्यास ले लिया है तो दिनाकरन के पास और कोई रास्ता नहीं बचा है. दिनाकरन को पता है कि बिना गठबंधन में आए वह कभी भी तमिलनाडु की सत्ता में नहीं आ सकते हैं. DMK के विरोध में खड़ी हुई पार्टी AIDMK से निकली AMMK कभी भी DMK के साथ नहीं जाएगी. इसलिए उन्हें आज नहीं तो कल AIDMK के साथ गठबंधन करना ही होगा. इसलिए अगर आने वाले कुछ दिनों में ये ऐलान हो कि AMMK, AIDMK और बीजेपी के साथ तमिलनाडु में चुनाव लड़ रही है तो इसमें किसी को हैरानी नहीं होगी.

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