मासापारा में 7 साल बाद बजी स्कूल की घंटी:2014 में नक्सलियों ने तोड़ दिया था, अब खुद ही बनाया; पहले दिन 27 बच्चे पहुंचे, कलेक्टर की क्लास में सब बोले-हम बनेंगे अफसर

 

7 साल बाद नक्सलगढ़ मसापारा की स्कूल खुली। पहले दिन 27 बच्चे पहुंचे। - Dainik Bhaskar

7 साल बाद नक्सलगढ़ मसापारा की स्कूल खुली। पहले दिन 27 बच्चे पहुंचे।

दंतेवाड़ा के मासापारा में सोमवार को 7 साल बाद स्कूल खोल दिए गए। यहां पहले दिन 27 बच्चे पढ़ने के लिए पहुंचे। खास बात ये है कि इस स्कूल को नक्सलियों ने 2014 में तोड़ दिया था। जिसे उन्हीं नक्सलियों ने सरेंडर करने के बाद बनाया है। पहले दिन कलेक्टर दीपक सोनी भी स्कूल पहुंचे और उन्होंने बच्चों की क्लास ली। लेकिन कलेक्टर उस समय बेहद खुश हुए जब उन्होंने बच्चों से ये सवाल पूछा कि कौन-कौन अफसर बनेगा तो सभी बच्चों ने एक साथ हाथ उठाकर कहा कि हम बनेंगे अफसर।

जिला प्रशासन ने बच्चों को बांटी पाठ्य सामग्री।

जिला प्रशासन ने बच्चों को बांटी पाठ्य सामग्री।

पहले दिन पहुंचे 27 बच्चे, प्रशासन ने किया स्वागत
2 अगस्त को नक्सलगढ़ मासापारा में स्कूल की घंटी बजी। सरेंडर नक्सली खुद बच्चों की उंगली पकड़ कर स्कूल लेकर आए। बच्चों के स्वागत के लिए कलेक्टर दीपक सोनी व जिला शिक्षा अधिकारी राजेश कर्मा व SDOP देवांश सिंह राठौर भी पहुंचे। उन्होंने बच्चों को माला पहनाकर स्वागत किया। साथ ही पढ़ाई के लिए पाठ्य सामग्री भी बांटी गई। बच्चों के स्कूल में प्रवेश से पहले भवन में सेनिटाइजर का छिड़काव किया गया था। कलेक्टर दीपक सोनी ने बताया कि भांसी मासापारा के प्राथमिक शाला में लगभग 60 से 70 बच्चे अब शिक्षा ग्रहण कर पाएंगे। अब बच्चों को उनके गांव में ही शिक्षा मिल पाएगी।

कलेक्टर दीपक सोनी ने लगभग 1 घंटे तक बच्चों की क्लास ली। जब बच्चों से पूछा कि बड़ा होकर अफसर कौन बनेगा, तो सभी बच्चों ने हाथ खड़े किए।

कलेक्टर दीपक सोनी ने लगभग 1 घंटे तक बच्चों की क्लास ली। जब बच्चों से पूछा कि बड़ा होकर अफसर कौन बनेगा, तो सभी बच्चों ने हाथ खड़े किए।

पहली क्लास कलेक्टर ने ली
स्कूल के अंदर जब बच्चों ने प्रवेश किया तो उनकी पहली क्लास दंतेवाड़ा कलेक्टर ने ली। बच्चों को ABCD से लेकर अ से अनार पढ़ाया। बच्चों को गिनती लिखना भी सिखाया। कलेक्टर ने लगभग 1 घंटे तक बच्चों की क्लास ली। इस दौरान उन्होंने जब बच्चों से पूछा कि बड़ा होकर कौन अफसर बनेगा, सभी बच्चों ने हाथ खड़े किए। यह देख पास में ही खड़े ग्रामीण व सरेंडर नक्सली भी काफी खुश हुए। सरेंडर नक्सलियों ने कहा कि यदि हम सरेंडर नहीं करते तो शायद आज यह स्कूल नहीं बनता। स्कूल नहीं होता तो बच्चों का भविष्य नहीं बनता।

जुलाई 2020 में 18 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। फिर उन्होंने खुद इसी स्कूल भवन को बनाया है।

जुलाई 2020 में 18 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। फिर उन्होंने खुद इसी स्कूल भवन को बनाया है।

18 नक्सलियों ने किया था सरेंडर, उन्होंने ही बनाई स्कूल
दंतेवाड़ा पुलिस के द्वारा जिले में लोन वर्राटू अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान से प्रभावित होकर भांसी थाना क्षेत्र के 18 माओवादियों ने जुलाई 2020 में कलेक्टर और SP के सामने हथियार डाले थे। संगठन में रहते हुए इन्हीं माओवादियों ने शिक्षा के मंदिर को तोड़ा था। इसका बड़ा नुकसान इलाके के बच्चों को उठाना पड़ा था। उन्हें पढ़ाई के लिए दूसरे गांव जाना पड़ रहा था। माओवादियों ने सरेंडर करते ही मासापारा में स्कूल बनाने की मांग की थी। प्रशासन ने फौरन स्वीकृति दी और कुछ माह में ही इन्हीं नक्सलियों ने स्कूल भवन को खड़ा कर दिया।

स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं है, इसलिए कलेक्टर पगडंडी के सहारे स्कूल पहुंचे।

स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं है, इसलिए कलेक्टर पगडंडी के सहारे स्कूल पहुंचे।

स्कूल तक बनेगी पक्की सड़क, आंगनबाड़ी की भी हुई स्वीकृति
मासापारा प्राथमिक शाला तक पहुंचने पक्की सड़क नहीं है। केवल पतली पगडंडी ही एक मात्र सहारा है। अब जल्द ही यहां पक्की सड़क बनेगी। कलेक्टर ने यहां सड़क निर्माण की स्वीकृति दे दी है। साथ ही जल्द ही इस इलाके में आंगनबाड़ी का निर्माण काम भी शुरू होगा।

दंतेवाड़ा के मासापारा में 7 साल बाद खुलेगा स्कूल:माओवादियों ने इसी स्कूल को 2014 में कर दिया था ध्वस्त, अब सरेंडर करने के बाद खुद ही बनाया; बच्चों से बोले- यहीं पढ़ना और बड़ा अफसर बनना

 

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