मौत के 2 साल बाद हाईकोर्ट से मिला हक:भ्रष्टाचार में बर्खास्त फूड इंस्पेक्टर ने लड़ी 22 साल की लड़ाई; बरी हुए पर सेवा लाभ नहीं मिला; अब 12 साल बाद उनकी बेवा मिलेगा भुगतान

 

कोर्ट ने कहा, अब यह निर्णय न्याय उदाहरण साबित होगा। दूसरे मामलों में इस निर्णय को प्रस्तुत किया जा सकता है। - Dainik Bhaskar

कोर्ट ने कहा, अब यह निर्णय न्याय उदाहरण साबित होगा। दूसरे मामलों में इस निर्णय को प्रस्तुत किया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 12 साल चली सुनवाई के बाद रिटायर्ड फूड इंस्पेक्टर को न्याय मिला है। इसके लिए उन्हें 22 साल लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। हाईकोर्ट ने कहा कि शासकीय सेवक के आपराधिक आरोपों से पूर्ण रूप से मुक्त हो जाने पर संपूर्ण वेतन और भत्ते प्राप्त करने का हकदार है। फूड इंस्पेक्टर को भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त किया गया था, लेकिन बरी हुए तो सेवा लाभ नहीं दिया गया। हालांकि फैसला आने के 2 साल पहले ही उनकी मौत हो चुकी है। अब कोर्ट ने सारे लाभ उसकी बेवा को देने के आदेश दिए हैं।

रायपुर में सहायक फूड इंस्पेक्टर के पद पर नियुक्त शंकर लाल सोनी को भ्रष्टाचार के आरोप में 1998 में बर्खास्त कर दिया गया था। इसके खिलाफ उन्होंने याचिका दायर की तो कोर्ट ने उन्हें 2006 में आरोपों से बरी कर दिया। इसी बीच 2003 में उन्हें सेवानिवृत्त कर दिया गया। हालांकि, विभाग ने ‘नो वर्क-नो पेमेंट’ के सिद्धांत पर उनके ग्रेच्युटी, भत्ते व अन्य लाभ रोक दिए। इसके खिलाफ फिर शंकर सोनी ने साल 2009 में हाईकोर्ट में रिट पिटीशन दाखिल की थी और सेवा लाभ की मांग की।

9 फीसदी ब्याज के साथ राज्य सरकार करे भुगतान
सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि याचिका कर्ता के प्रतिनिधि को 1994 से साल 2003 तक के लिए पात्रता की तारीख से भुगतान किया जाए। निर्देश दिया कि पूरा वेतन और भत्ते 9 फीसदी ब्याज के साथ आदेश की कॉपी मिलने की तारीख से 45 दिनों के अंदर प्रदान किया जाए। साथ ही याचिका कर्ता के प्रतिनिधि को भी 10 हजार रुपए का भुगतान किया जाए।

काम नहीं, तो वेतन नहीं का सिद्धांत यहां लागू नहीं
कोर्ट ने कहा, काम नहीं तो वेतन नहीं का सिद्धांत यहां लागू नहीं होगा। मूलभूत नियम और शासकीय सेवक आपराधिक आरोपों से बरी होने के बाद संपूर्ण वेतन और भत्ते प्राप्त करने का हकदार है। अब यह निर्णय न्याय दृष्टांत साबित होगा। दूसरे मामलों में इस निर्णय को प्रस्तुत किया जा सकता है। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के.अग्रवाल की एकल पीठ में हुई।

 

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