नई शिक्षा नीति को शिक्षाविदों ने सराहा, होंगे बेहतर बदलाव

रांची, 23 जून (हि.स.)। केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने दो वर्ष पहले देश की नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी थी। साथ ही भारतीय शिक्षा नीति में बड़े परिवर्तन के संकेत दिए थे। केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति का जहां विपक्षी दल विरोध कर रहे हैं, वहीं शिक्षाविदों ने इसे सराहा है। प्रस्तुत है ‘हिन्दुस्थान समाचार’ की कुछ शिक्षाविदों से बातचीत के प्रमुख अंश।

नई शिक्षा नीति सरकार की अच्छी पहल: जयकांत

राम लखन सिंह यादव कॉलेज के प्राचार्य डॉ जयकांत प्रसाद ने केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति के बारे में कहा कि नई शिक्षा नीति सरकार की बेहतर और एक अच्छी पहल है। इसमें सबसे अच्छी पहल क्षेत्रीय भाषा में क्लास लेने का है। एक से पांच तक बच्चों को पढ़ाने से बच्चों का अच्छा विकास होगा। ग्रेजुएशन में एक साल बच्चे पढ़ेंगे तो उनको भी सर्टिफिकेट मिलेगा। पहले यह व्यवस्था नहीं थी। वह किसी भी कॉलेज में एक दो साल बाद भी एडमिशन लेकर पढ़ सकते हैं। ग्रेजुएशन के साथ बच्चे बीएड का एजुकेशन भी कर सकते है।

उन्होंने कहा कि हाई स्कूल के लिए शिक्षक की बहाली में क्या नीति है इसे स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे बॉयोलाजी के शिक्षक की बहाली है जूलॉजी और केमेस्ट्री होना चाहिए। गणित के शिक्षक की हाई स्कूल में बहाली है, इसमें फिजिक्स और केमिस्ट्री होना चाहिए लेकिन इस नयी शिक्षा नीति में विषय को फ्री किया है। बहाली में इसमें क्या होगा यह स्पष्ट होना चाहिए।

शिक्षा के साथ रोजगार भी: डॉ सुशील

स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन के तकनीकी विशेषज्ञ सुशील अंकन ने कहा कि सरकार को नई शिक्षा नीति की जरूरत क्यों पड़ी। लोगों को लगने लगा था कि जिस मैकाले की शिक्षा पद्धति को लागू किया गया था। इसके बाद 70 वर्षों से कोई फेरबदल नहीं हुआ। बहुत सारी बातों को थोपा गया था। कैसे इसे जन उपयोगी बनाये जाये। इसपर कई साल से मंथन चल रहा था। इस शिक्षा नीति में सबसे अच्छी बात है, प्राथमिकी शिक्षा में उनकी मातृभाषा में शिक्षा देने को कहा गया है।

उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में शिक्षा के साथ साथ कौशल विकास और स्किल के साथ जोड़ा गया है। प्राथमिक शिक्षा को मातृभाषा से जोड़ा गया। इससे बच्चे सिर्फ शिक्षित नहीं होंगे बल्कि बच्चे आय के साधन और रोजगार को भी प्राप्त कर सकेंगे। यह शिक्षा नीति आत्मनिर्भर बनायेगा। शिक्षा नीति में नये शोध को भी प्राथमिकता दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह शिक्षा नीति बहुत ही अच्छी और बेहतर है।

यह क्रांतिकारी शिक्षा नीति है: आनंद कुमार

रांची विश्वविद्यालय के जूलॉजी के सहायक प्रोफेसर और निदेशक रेडियो खांची आनंद कुमार ने कहा कि यह शिक्षा नीति क्रांतिकारी शिक्षा नीति है। आने वाले दस साल में बच्चे गर्व से कह सकेंगे वह कह सकेंगे कि हम भारतीय परंपरा से पढ़कर आगे बढ़े है। आप कहीं की भी बात करे कि आप रूस जायेंगे तो वहीं के भाषा में ही पढ़ाई होती है। नई शिक्षा की आधार है कि भाषाई आधार पर जो चुनौती छात्रों को देखना पड़ता था। उसके कारण बहुत छोटा समूह भी अंग्रेजी माध्यम से पढ़कर आगे काम कर रहा था।

उन्होंने कहा कि दूर सुदूर ग्रामीणों इलाकों में छात्र योग्य होने के बावजूद भी भाषा के आधार पर पीछे रह जा रहा है। शिक्षा की स्तर को देखते हुए क्षेत्रीय और जनजाति विषयों में पढ़ाई होगी। छात्र अपने स्वेच्छा से अपना कैरियर चुन सकते है। साथ ही किसी कारण से छात्र को पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। इसमें भी छूट दी गयी है। छात्र कभी भी पढ़ाई में वापसी कर सकते है। डिजिटल मूवमेंट पर काफी जोर दिया गया है। प्रधानमंत्री ने डिजिटल यूनिवर्सिटी की आवश्यकता पर भी जोर दिया है। उसपर काम भी चल रहा है। यह शिक्षा नीति भारत की नीति है। मालिक बनने की क्षमता इस शिक्षा नीति के जरिए विकसित होगी।

जीवन मूल्यों एवं संस्कारों का समावेश: डॉ. ब्रजेश

रांची डोरंडा महाविद्यालय सहायक प्राध्यापक डॉ ब्रजेश कुमार ने कहा कि देश के आजादी के बाद पहली बार ऐसी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लाया गया जिसमें भारतीयता, भारत की जीवन मूल्यों एवं संस्कारों को एक साथ समावेश किया गया है। यह शिक्षा नीति छात्र हित, भारतीयकरण के साथ रोजगार परक है। शिक्षा नीति में क्षेत्रीय भाषा पर विशेष बल दिया गया है। इससे छात्र आसानी से पाठ्यक्रम समझ सकते है एवं अपनेपन का भाव विकसित होगा।

उन्होंने कहा कि प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं जिससे छात्रों के सर्वांगीण विकास में सहायक सिद्ध होगा। अतीत भारत के सर्वश्रेष्ठ शिक्षा को भारत के अध्यात्म, दर्शन के साथ समावेश करते हुए तकनीकी, व्यावसायिक एवं वैश्विक परिदृश्य को ध्यान में रखकर नई शिक्षा नीति लाई गई है जो प्रत्येक स्तर के विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। भारत के अनुरूप एवं भारतीयता से ओत-प्रोत शिक्षा नीति को शीघ्र लागू करनी चाहिए। इससे हमारे छात्र भारतीय बनकर निकलें एवं भारत के ऐतिहासिक जीवन मूल्यों के साथ हमेशा जुड़े रहें।

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