गांवों में खुलेगा खुशहाली का नया रास्ता लैब टू लैंड और मुद्रा योजना से रुकेगा पलायन, ग्रामीण युवाओं की बदलेगी किस्मत
News India Live, Digital Desk: भारत की आत्मा गांवों में बसती है, और अब इसी 'आत्मा' को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। ग्रामीण उद्यमिता (Rural Entrepreneurship) को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की 'लैब टू लैंड' (Lab to Land) योजना और 'मुद्रा योजना' (Mudra Yojana) जैसे क्रांतिकारी कदम अब गांवों की तस्वीर बदलने लगे हैं। इसका सबसे बड़ा असर ग्रामीण युवाओं के शहरों की ओर होने वाले पलायन (Migration) पर देखने को मिल रहा है, जो अब अपने ही घर में रहकर खुद का स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं।
लैब टू लैंड: वैज्ञानिकों की तकनीक अब किसानों के खेत तक
ग्रामीण विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा तकनीक का अभाव रहा है। सरकार के 'लैब टू लैंड' कार्यक्रम ने इस दूरी को पाट दिया है। इस पहल के तहत कृषि विज्ञान केंद्रों और प्रयोगशालाओं में विकसित की गई उन्नत तकनीकों को सीधे किसानों और ग्रामीण युवाओं तक पहुंचाया जा रहा है। चाहे वह मिट्टी की जांच हो, ड्रोन से कीटनाशकों का छिड़काव हो या जैविक खेती के नए तरीके—युवा अब आधुनिक खेती को एक मुनाफे वाले बिजनेस मॉडल के रूप में देख रहे हैं। इससे न केवल पैदावार बढ़ रही है, बल्कि ग्रामीण स्तर पर ही प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाने के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।
मुद्रा और स्टार्टअप इंडिया: बिना गारंटी लोन से मिला उड़ान का मौका
ग्रामीण युवाओं के पास आइडिया तो थे, लेकिन पूंजी की कमी उनके आड़े आती थी। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने इस समस्या का समाधान कर दिया है। बिना किसी गारंटी के मिलने वाले 'शिशु', 'किशोर' और 'तरुण' ऋण ने छोटे गांवों में भी किराना स्टोर, टेलरिंग यूनिट, फूड प्रोसेसिंग और छोटे मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने का रास्ता साफ किया है। वहीं 'स्टार्टअप इंडिया' के तहत अब ग्रामीण स्टार्टअप्स को विशेष छूट और मार्गदर्शन दिया जा रहा है, जिससे गांव के लड़के-लड़कियां अब 'जॉब सीकर' के बजाय 'जॉब गिवर' बन रहे हैं।
रुक रहा है पलायन, समृद्ध हो रहे हैं गांव
विशेषज्ञों का मानना है कि जब गांव में ही रोजगार और सम्मान मिलेगा, तो युवा शहरों की भीड़भाड़ और कठिन जीवन की ओर नहीं भागेंगे। ग्रामीण उद्यमिता बढ़ने से स्थानीय स्तर पर एक नया इकोसिस्टम तैयार हो रहा है। इससे न केवल बेरोजगारी कम हो रही है, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे (Infrastructure) में भी सुधार हो रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले वर्षों में गांवों को आत्मनिर्भर बनाकर देश की जीडीपी में उनकी हिस्सेदारी को दोगुना किया जाए।