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93 टेंटों के बीच हुई गुप्ता बंधुओं के बेटों की शाही शादी औली के दस हजार वर्ग फुट में

नैनीताल। उत्तराखंड में स्कीइंग के लिए प्रसिद्ध औली के दस हजार वर्ग फुट क्षेत्र में दक्षिण अफ्रीकी अप्रवासी गुप्ता बंधुओं के बेटों का विवाह समारोह का पूरा लेखा जोखा 51 पेज की रिपोर्ट में चमोली के जिलाधिकारी और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से उच्च न्यायालय में पेश किया गया है।

इस शाही विवाह समारोह में अति विशिष्ट अतिथियों के ठहरने समेत पूरे समारोह में 93 टेंट स्थापित किए गए थे। एक खूबसूरत ग्लास हाउस बनाया गया था। मेहमानों के भोजन तैयार करने के लिये ही अकेले नौ टेंट लगाए गए थे। प्रशासन की ओर से भी इस शाही शादी पर बारीकी से नजर रखी गई है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि गुप्ता बंधुओं के बेटों की शाही शादी से 326 क्विंटल कूड़ा (ठोस अपशिष्ठ) उत्पन्न हुआ है और 154 क्विटल अजैविक एवं 172 क्विटल जैविक कूड़ा को साफ करने की पूरी प्रक्रिया में जोशीमठ नगर पालिका को 10.90 लाख रुपए खर्च करने पड़े हैं। जबकि आयोजकों की ओर से 8.14 लाख रूपये जमा किये गये हैं और 2.76 लाख रुपये अभी जमा होने बकाया हैं।

अलबत्ता जिस स्थान पर शादी का समारोह आयोजित किया गया उसे पूरी तरह से साफ कर दिया गया है। कूड़े को निस्तारण के लिये भेज दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 हजार वर्ग फुट में फैले इस समारोह में अतिथियों के लिए 30 टेंट, कामगारों के लिये 54 टेंट एवं शादी में पकवान तैयार करने के लिये बने तथा रसोईघरों के लिये नौ टेंट स्थापित किए गए थे। मेहमानों को लाने ले जाने से लेकर पूरे शादी समारोह में 55 वाहनों का प्रयोग किया गया।

हालांकि इनके प्रयोग से किसी भी तरह का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है। मेहमानों को इस खूबसूरत स्थान तक पहुंचाने के लिये 18 जून से 23 जून तक हेलीकॉप्टर का प्रयोग किया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से कहा गया कि 18 जून से 23 जून के मध्य एकत्र कूड़े को नगर पालिका द्बारा पृथक पृथक किया गया है।

अजैविक कूड़े को जोशीमठ के प्रसंस्करण केन्द्र ले जाया गया। साथ ही ठोस अपशिष्ठ को हरिद्बार के भगवानपुर भेजा जाएगा। हालांकि रिपोर्ट में साफ साफ संकेत मिले हैं कि इस पूरी समारोह पर प्रशासन पूरी बारीकी से नजर रखे हुए था। जोशीमठ के उपजिलाधिकारी की अगुवाई में विभिन्न विभागों की एक टीम पूरे समारोह के दौरान वैवाहिक स्थल पर तैनात रही।

13 सदस्यों वाली इस कमेटी में राजस्व, वन व पुलिस विभाग के अधिकारी शामिल थे। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से वायु प्रदूषण मापने के लिए दो स्थानों पर वायु परिवेशी निगरानी मशीन लगाई गयी थी। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से की गई निगरानी पर 2.09 लाख रुपए की धनराशि खर्च की गई है जो कि अभी प्राप्त नहीं हुई है।

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