टाटा समूह की 7 कंपनियों का टाटा स्टील में होगा विलय, मेटल कारोबार को एक साथ लाने का फैसला

Tataoup

टाटा समूह ने अपने धातु कारोबार को एक साथ लाने के लिए एक मेगा विलय योजना की घोषणा की है। टाटा समूह ने घोषणा की है कि वह इस क्षेत्र से जुड़ी 7 कंपनियों का टाटा स्टील में विलय करेगा । कंपनी की ओर से स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के मुताबिक बोर्ड ने शुक्रवार को मर्जर पर फैसला किया है. बोर्ड के फैसले के मुताबिक टाटा स्टील लॉन्ग प्रोडक्ट्स , टाटा मेटलिक्स, टिन प्लेट कंपनी, टीआरएफ, इंडियन स्टील एंड वायर प्रोडक्ट्स, टाटा स्टील माइनिंग , एसएंडटी माइनिंग का टाटा स्टील में विलय किया जाएगा। इन कंपनियों में 6 कंपनियां टाटा स्टील की सहायक कंपनियां हैं और एक कंपनी सहयोगी कंपनी है।

विलय योजना क्या है?

कंपनी की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक टाटा स्टील और टीआरएफ का स्वैप रेशियो 17 से 10 होगा। यानी हर 10 टीआरएफ शेयरों के बदले टाटा स्टील के 17 शेयर मिलेंगे। टाटा स्टील और टीएसपीएल का स्वैप अनुपात 67:10 होगा यानी टीएसपीएल के प्रत्येक 10 शेयरों पर टाटा स्टील के 67 शेयर मिलेंगे। टाटा स्टील और टिनप्लेट का स्वैप अनुपात 33 से 10 होगा, यानी टिनप्लेट के प्रत्येक 10 शेयरों के लिए टाटा स्टील के 33 शेयर उपलब्ध होंगे। टाटा स्टील और टाटा मेटालिक्स का स्वैप रेशियो 10 से 79 होगा यानी टाटा मेटालिक्स के हर 10 शेयर के बदले टाटा स्टील के 79 शेयर मिलेंगे। लॉन्ग प्रोडक्ट्स में टाटा स्टील की 74.91 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं, टिनप्लेट कंपनी में इसकी 74.96 फीसदी, टाटा मेटल्स में 60.03 फीसदी, इंडियन स्टील एंड वायर प्रोडक्ट्स में 95.01 फीसदी हिस्सेदारी है।

विलय की घोषणा क्यों की गई?

टाटा स्टील के मुताबिक इस मर्जर का मकसद बिजनेस और मैनेजमेंट स्ट्रक्चर को और आसान बनाना है। सभी कंपनियों की क्षमताओं और अवसरों को एक साथ लाना उनका अधिकतम लाभ उठाना है। कंपनी के मुताबिक, विलय से प्रबंधन क्षमता बढ़ेगी और कारोबार में और सुधार होगा। वहीं, कंपनी ने कहा कि विलय के पूरा होने से लागत कम करने में मदद मिलेगी, जिससे शेयरधारकों सहित सभी पक्षों के लिए बेहतर परिणाम आएंगे।

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