जैव विविधता: 2020 के जैव विविधता लक्ष्यों को पूरा करने में 60 फीसदी एशियाई देश पीछे

भारत सहित अधिकांश एशियाई देश 2020 तक हासिल किए जाने वाले जैव विविधता लक्ष्यों से पिछड़ रहे हैं। एशिया के 40 देशों में से केवल 40 प्रतिशत ने 2020 तक अपने कुल भूमि क्षेत्र का 17 प्रतिशत संरक्षित वनों के लक्ष्य को प्राप्त किया है। अध्ययन मॉन्ट्रियल, कनाडा में आयोजित होने वाले जैविक विविधता पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (COP-15) के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। सम्मेलन में, दुनिया भर की सरकारों के प्रतिनिधि आइची जैव विविधता लक्ष्यों की समीक्षा करेंगे।

वास्तव में, वैश्विक जैव विविधता संकट से निपटने के लिए, 200 देशों ने 2010 के संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन (CBD) में 2020 तक अपनी भूमि का कम से कम 17% जंगलों के रूप में संरक्षित करने का संकल्प लिया, जिसे 2030 तक 30% तक बढ़ाया जा सकता है। सीबीडी में कुल 20 लक्ष्य निर्धारित किए गए थे। लेकिन सभी महाद्वीपों में एशिया का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। यहां 15.2% के वैश्विक औसत के मुकाबले 2020 तक केवल 13.2% भूमि को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है।

2010 से 2020 तक, भारत अपनी केवल 6 प्रतिशत भूमि को संरक्षित वन क्षेत्र घोषित करने में कामयाब रहा है। देश में वर्तमान में कुल 990 संरक्षित वन क्षेत्र हैं, जिनमें 106 राष्ट्रीय उद्यान, 565 वन्यजीव अभयारण्य, 100 संरक्षण रिजर्व और 219 सामुदायिक रिजर्व शामिल हैं। अध्ययन किए गए 40 एशियाई देशों में से 24 आइची लक्ष्य 11 से बहुत पीछे हैं, जबकि 16 ने उन लक्ष्यों को पार कर लिया है।

2010 में क़तर के पास केवल 2.4% संरक्षित वन भूमि थी, जो 2020 में बढ़कर 29.3% हो गई है। बहरीन ने 10 साल में सबसे ज्यादा निराश किया है। यहां संरक्षित वन भूमि 2010 में 15% से अधिक थी, जो 2020 में घटकर 6.6% रह गई है। कुवैत ने 1.7% वन आवरण, म्यांमार 0.5% और थाईलैंड 0.1% खो दिया है, जबकि यमन और सीरिया शून्य संरक्षित वन भूमि के साथ सूची में सबसे नीचे हैं। एशियाई देशों में, भूटान 50% संरक्षित वन भूमि के साथ सूची में सबसे ऊपर है। कंबोडिया 39.7% के साथ दूसरे स्थान पर है। जापान, कतर, श्रीलंका और इज़राइल भी जल्द ही 30% लक्ष्य हासिल कर लेंगे, जबकि कंबोडिया और भूटान पहले ही लक्ष्य पार कर चुके हैं।

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