28 फरवरी को हुआ था हादसा:एसिड युक्त छाई से झुलसी महिला की इलाज के दौरान मौत, गाय ढूंढ़ने के दौरान हुआ था हादसा

 

घटना के दिन सीता देवी को पहले एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। - Dainik Bhaskar

घटना के दिन सीता देवी को पहले एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

एसिड युक्त छाई से झुलसी महिला सीता देवी ने रांची स्थित रिम्स में शुक्रवार की रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बालीडीह के मंझलाडीह गांव के आसपास कार्यरत विभिन्न औद्योगिक कंपनियों के फेंके गए एसिड युक्त ऐश में बस्ती बालीडीह की रहने वाली सीता देवी 28 फरवरी को झुलस गई थी। साथ ही खुशबू देवी का एक पैर झुलस गया था।

सीता देवी के पति साहेबराम मांझी के अनुसार, 28 शाम को उनकी पत्नी टोले की दो महिलाओं के साथ गाय को ढूंढ़ने मंझलाडीह की पहाड़ी की ओर गई थी। वहां से गाय लेकर लौटने के दौरान वह पहाड़ी के नीचे फेंके गए केमिकल युक्त ऐश में गिर गई थी। निकालने के क्रम में सीता का हाथ समेत शरीर का आधा हिस्सा स्लैग में फंस गया। वहीं, अमृता देवी ने बगल के पिपराडीह गांव में रहने वाले लोगों को बुलाया। उसके बाद किसी तरह उसे निकाला जा सका।

घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश
महिला के झुलस जाने के बाद कंपनियों की ओर से आसपास के गांवों के जंगलों में कचरा फेंके जाने को लेकर ग्रामीण काफी आक्रोश में हैं। बियाडा में लगी कंपनियों से निकलने वाले कचरे के प्रबंधन को लेकर न तो बियाडा और न ही प्रदूषण विभाग कभी गंभीर रहा है। लिहाजा, जिन भी कंपनियों से कचरा निकलता है, वे मंझलाडीह के पहाड़ियों के आसपास डंप कर दे रही हैं। पहाड़ी के अंदर घनी झाड़ियों में भी कई कंपनी के कचरों से पत्थर की खदान तक भर चुकी है।

ऐश में जैसे ही सूखी लकड़ी डाली जाती है, उससे धुंआ निकलने लगता है।

ऐश में जैसे ही सूखी लकड़ी डाली जाती है, उससे धुंआ निकलने लगता है।

बांस और सूखी लकड़ी डालते ही उठता है धुंआ
मंझलाडीह गांव से पहाड़ी की ओर जाने वाले रास्ते के पास एसिड युक्त ऐश में लकड़ी या सूखा बांस डालते हुए धुंआ उठ जाता है। इस कारण अब लोग उस ओर से गुजरने में डरने लगे हैं। उस तरह की ऐश पहाड़ी के आसपास कई स्थानों पर फेंकी हुई है। ऐश के पास पहुंचने पर गर्मी का एहसास तक नहीं होता है। लेकिन जैसे ही उसमें सूखी लकड़ी डाली जाती है, उससे धुंआ निकलने लगता है।

 

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