हिंदुस्तान शिपयार्ड 5 नौसैनिक सहायता जहाजों का करेगा निर्माण, तुर्की की कंपनी से लेगा मदद

भारतीय नौसेना (Indian Navy) साल के अंत तक पांच विशाल नौसैनिक सहायता जहाजों के निर्माण के लिए विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) को एक आदेश जारी कर सकती है. एचएसएल इस कार्य में तुर्की के जहाज निर्माण फर्म से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के रूप में सहयोग लेगी. एचएसएल को उम्मीद है कि इस प्रोजेक्ट में $ 1.5 बिलियन से $ 2 बिलियन के बीच की लागत आएगी. इस परियोजना में अनादोलू शिपयार्ड से प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण शामिल होगा जो कि तुर्की के TAIS कंसोर्टियम का हिस्सा है, जिसके साथ HSL ने पिछले साल तकनीकी सहयोग के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे.

HSL को उम्मीद है कि वो चार वर्षों के भीतर नौसेना को पहला FSV सौंप देगा. नौसेना को हर एक शिप 10 से 12 महीने के अंतराल पर सौंपी जाएगी. ये जहाज 230 मीटर लंबे होंगे और इसमें 45,000 टन सामान ढोया जा सकता है. एफएसवी युद्धपोतों के लिए ईंधन और अन्य आपूर्ति करता है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय नौसेना से आदेश मिलने के बाद तुर्की के कंसोर्टियम के साथ समझौता आगे बढ़ेगा. अगर सब ठीक जाता है तो अक्टूबर 2021 तक प्रक्रिया शुरू हो सकती है. कई भारतीय विक्रेताओं को भी इस परियोजना में शामिल किया जाएगा.

तुर्की के इंजीनियर आएंगे भारत

तुर्की पक्ष ने प्रारंभिक चरणों से प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया है. तुर्की के शिपयार्ड को लंबे समय के लिए पूरी तरह से बुक किया गया है. साथ ही प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण और भारत में निर्मित सभी जहाजों के पास खोने के लिए कुछ भी नहीं है. तुर्की के इंजीनियर परियोजना की सहायता के लिए भारत आएंगे.

जहाज निर्माण क्षमताओं को भी मिलेगा बढ़ावा

डिजाइन के अलावा, तुर्की कंसोर्टियम इंजीनियरिंग सेवाओं, नियोजन और विनिर्देशों की तैयारी भी कराएगा. इस प्रौद्योगिकी के हस्तांतरण से भारत की जहाज निर्माण क्षमताओं को भी बढ़ावा मिलेगा.

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