Home / वायरल न्यूज़ / हाथ-पैर न होते हुए भी इन कामों को कर लोगों के लिए बनी एक बड़ी मिसाल, जन्म देते ही मां-बाप ने छोड़ा था साथ

हाथ-पैर न होते हुए भी इन कामों को कर लोगों के लिए बनी एक बड़ी मिसाल, जन्म देते ही मां-बाप ने छोड़ा था साथ

हर व्यक्ति को बनाने वाले ईश्वर ने किसी का रंग गोरा, तो किसी का रंग काला, तो किसी को छोटा, तो किसी को लंबा बनाया है, इस दुनिया में ऐसे बहुत कम लोग होते हैं जिन्हें ईश्वर ने पूरी तरह से ठीक बनाया हो ज्यादातर लोगों के पास कुछ न कुछ कमी जरूर होती है, वहीं अगर बात करें अपाहिज की तो भले ही उनके पास कोई एक अंग न हो लेकिन उनसे पूर्ण कोई हो भी नहीं सकता है, दो हाथ और दो पैर होने के बाद भी कुछ लोगों की जिंदगी अपाहिज से कम नहीं होती, वहीं जो लोग अपाहिजों का अपमान करते हैं या उन्हें ओर लोगों से अलग समझते हैं तो ऐसे लोगों के लिए ये एक न एक दिन मिसाल बनकर सामने आते हैं. आज हम आपको इसका एक जीता-जगती सच्चाई बताने जा रहे, जिसमें एक लड़की के हाथ-पैर न होने की वजह से उनके मां-बाप ने छोड़ दिया, जिसके बाद जो हुआ वो सच में किसी बड़ी कमयाबी से कम नहीं है, तो आइए बताते हैं…

आपको बता दें कि अमेरिका की रहने वाली 37 साल की एमी ब्रूक्स को जन्म देते ही उनके मां-बाप ने उन्हें अस्पताल में छोड़ दिया था. वो भी इसलिए क्यों एमी का जन्म बिना हाथ और बिना पैर के हुआ था. मां-बाप द्वारा छोड़ी गई एमी को पिट्सबर्ग के ब्रूक्स परिवार ने गोद लिया था.

अपनी कमजोरी को ही बनाई ताकत

जैसे-जैसे जीवन की सीढ़ियों पर एमी के कदम बढ़े वैसे-वैसे उन्होंने अपनी इस कमजोरी को अपनी ताकत बनाने की ठान ली. जिसके चलते एमी ने खाना बनाना, सिलाई, फोटोग्राफी और डिजाइनिंग तक करनी शुरू कर दी.

बन चुकी हैं मोटिवेशनल स्पीक

बता दें कि जिस एमी को उसके मां-बाप ने जन्म देते ही ठुकरा दिया था आज वो एक मोटिवेशनल स्पीकर बनकर लोगों को प्रेरित कर रही हैं. इनका ‘हाऊ डज शी डू इट’ नाम एक यूट्यूब चैनल भी चलाती हैं. इतना ही नहीं वो हैंडबैग बनाकर ऑनलाइन भी बेचती हैं. एमी ने बताया कि जब उसका जन्म हुआ था तब उसके घर वालों ने अस्पताल के स्टाफ से कहा था कि उसे एक कमरे में बंद कर दें, ना खाने के लिए कुछ दें और न रही पीने के लिए दे.

सिलाई सीखने को माना एक बड़ी उपलब्धि

एमी ने कहा कि वो अपने मुंह, ठोढ़ी और कंधे की मदद से तस्वीरें खींचती है. वो खुद की वीडियो बनाती हैं, कुछ लोगों उन्हें नेगेटिव कमेंट भी करते हैं लेकिन वो उन ध्यान नहीं देती हैं. उन्होंने सिलाई सीखने की अपनी इस कला को सबसे बड़ी उपलब्धि माना है.

एमी ने आगे बताया कि उनके परिवार वालों को हमेशा से ऐसा लगता था कि वो खुद पर निर्भर रहेंगी और आत्मविश्वास के साथ अपना जीवन बीता सकती है. उनके परिवार वालों ने उन्हें कभी ये अहसास होने ही नहीं दिया कि वो किसी से कम है, हमेशा उन्हें प्रोत्साहित किया.

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