हरियाणा के पूर्व CM को राहत:ओम प्रकाश चौटाला की पैरोल 9 मार्च तक बढ़ी; JBT भर्ती घोटाले में हैं सजायाफ्ता

 

JBT भर्ती घोटाले के सजायाफ्ता हरियाणा के पूर्व CM ओम प्रकाश चौटाला। - Dainik Bhaskar

JBT भर्ती घोटाले के सजायाफ्ता हरियाणा के पूर्व CM ओम प्रकाश चौटाला।

हरियाणा के बहुचर्चित JBT टीचर भर्ती घोटाले में सजा काट रहे पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला को मंगलवार को बड़ी राहत मिली है। पैरोल पर चल रहे ओम प्रकाश की पैरोल को लेकर आज दिल्ली के हाईकोर्ट में सुनवाई थी। हाईकोर्ट ने चौटाला की पैरोल 9 मार्च तक के लिए बढ़ा दी है। चौटाला ने रिहाई की मांग को लेकर भी दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है।

इससे पहले न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की एकल पीठ ने मामले को सुनवाई के लिए दो सदस्यी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था। साथ ही चौटाला की 21 फरवरी को खत्म हो रही पैरोल को 23 फरवरी तक के लिए बढ़ा दिया था। इस बारे में एडवोकेट अमित साहनी के माध्यम से याचिका दयार करके ओम प्रकाश चौटाला ने कहा है कि उनकी रिहाई के संबंध में हाईकोर्ट ने नवंबर 2019 एवं फरवरी 2020 में दिल्ली सरकार को उचित फैसला लेना का निर्देश दिया था। अब तक इस पर कोई फैसला नहीं हो सका है। चौटाला ने अपनी उम्र और दिव्यांगता के आधार पर जेल से रिहाई की मांग की गई है।

CBI की विशेष अदालत ने सजा सुनाई थी

साल 2000 के 3206 शिक्षक भर्ती मामले में CBI की विशेष अदालत ने 2013 में ओमप्रकाश चौटाला, उनके बेटे अजय चौटाला समेत 53 लोगों को सजा सुनाई थी। इसमें तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा के निदेशक IAS अधिकारी संजीव कुमार भी शामिल थे। तब से ही पिता-पुत्र तिहाड़ जेल में हैं। चौटाला ने केंद्र सरकार के 18 जुलाई 2018 की अधिसूचना का हवाला दे रिहाई के लिए याचिका लगाई थी। दरअसल, अधिसूचना के तहत 60 साल से ज्यादा उम्र पार कर चुके पुरुष, 70 फीसदी वाले दिव्यांग व बच्चे अगर अपनी आधी सजा काट चुके हैं तो राज्य सरकार उसकी रिहाई पर विचार कर सकती है। याचिका में चौटाला ने कहा था कि उनकी उम्र 86 साल की हो गई है और भ्रष्टाचार के मामले में वह सात साल की सजा काट चुके हैं।

चौटाला ने यह भी दावा किया था कि वह अप्रैल 2013 में 60 फीसदी दिव्यांग हो चुके थे और जून 2013 में पेशमेकर लगाए जाने के बाद से वह 70 फीसदी से ज्यादा दिव्यांग हो चुके हैं। इस तरह से वह केंद्र सरकार के जल्दी रिहाई की सभी शर्तों को पूरा कर रहे हैं। हालांकि, दिल्ली सरकार ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि यह भ्रष्टाचार का मामला है और भारत सरकार की अधिसूचना इस पर लागू नहीं होती, जबकि चौटाला ने दलील दी थी कि उन्हें रिहा किया जाना चाहिए, क्योंकि भ्रष्टाचार के मामले में उनकी सात साल की सजा पूरी हो चुकी है।

 

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