हरियाणा उच्चतर शिक्षा विभाग में मची हलचल:कॉलेज विद्यार्थियों के कंप्यूटर फंड का दुरुपयोग; लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम फ्री में उपलब्ध, पर कॉलेज चुका रहे करोड़ों

 

कोरोना लॉकडाउन के कारण विद्यार्थियों को ऑनलाइन एजुकेशन दी जा रही है। - Dainik Bhaskar

कोरोना लॉकडाउन के कारण विद्यार्थियों को ऑनलाइन एजुकेशन दी जा रही है।

कॉलेज स्टूडेंट्स की ऑनलाइन पढ़ाई से संबंधित जो सुविधाएं फ्री में मुहैया कराई जा सकती हैं, उसके लिए हरियाणा उच्चतर शिक्षा विभाग करोड़ों रुपए खर्च रहा है। ऐसा पिछले दो साल से किया जा रहा है। एक प्राइवेट कंपनी से लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) के लिए करार कर उसके खाते में हर कॉलेज से सालाना 2.90 लाख रु. जमा कराए जा रहे हैं। यह पैसा सरकारी खजाने से नहीं जा रहा। यह उन विद्यार्थियों के कंप्यूटर फंड का पैसा है, जिसमें उनके लिए कॉलेजों में कंप्यूटर से संबंधित सुविधाएं बढ़ानी होती हैं। निदेशालय के फैसले पर सवाल उठाया जा रहा है कि जब दूसरे प्लेटफॉर्म पर सबकुछ फ्री है तो प्राइवेट कंपनी पर करोड़ों रुपए क्यों लुटाए जा रहे है। जबकि ज्यादातर प्रोफेसर एलएमएस का इस्तेमाल कर भी नहीं रहे। मामला मंत्री कंवरपाल गुर्जर तक पहुंचा तो निदेशालय में हलचल मची है। सूत्रों के अनुसार, अधिकारी इस मामले पर नए सिरे से विचार कर रहे हैं।

मंत्री के सामने रखा मामला, अधिकारियों से वसूला जाए पैसा

एसोसिएशन हरियाणा गवर्मेंट कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन ने एलएमएस में पैसे का दुरुपयोग बताया है। प्रदेशाध्यक्ष प्रोफेसर नरेंद्र सिवाच शक्ति ने बताया कि मंत्री के सामने मामला रखा है। कंप्यूटर फंड का विभाग गलत इस्तेमाल कर रहा है। एमएलएस में लाइव क्लास भी नहीं हो सकती। जब फ्री लर्निंग सिस्टम है तो इसकी क्या जरूरत है। सिवाच ने कहा कि जिस प्रकार सरकार ने उपद्रवियों से संपत्ति के नुकसान की वसूली का कानून बनाया है। ऐसे में पैसे का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों से वसूली का नियम बनाया जाए। विभाग अब पूछेगा एलएमएस कैसा है और कितनी जरूरत है विभाग ने जब एलएमएस की शुरुआत की, तब किसी की सलाह नहीं ली। अब मामला गर्माने लगा तो प्रिंसिपल व प्रोफेसर से राय ले रहा है। निदेशक विजय दहिया ने बताया कि मैंने कुछ समय पहले ही जॉइन किया है। अब कॉलेजों से इसका फीडबैक लिया जा रहा है।

कंप्यूटर फंड में 900 से 1200 रु. जमा कराते हैं बच्चे

बीए फर्स्ट ईयर के बच्चों से सालाना 900 रु., बीसीए व बीएमए के बच्चों से 3 साल तक हर वर्ष 1200-1200 रु. कंप्यूटर फंड के लिए जाते हैं। हर कॉलेज में करोड़ों रु. का फंड है। यह फंड कंप्यूटर अपग्रेड व मेंटेनेंस के लिए होता है।

112 कॉलेज जुड़ चुके, अब 150 से जुड़ने को कहा

हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट ने 7 जुलाई 2019 को एक प्राइवेट कंपनी से एलएमएस के लिए करार किया। जिसके अनुसार तय हुआ कि जिस कॉलेज में इसे शुरू किया जाएगा, वह 2.46 लाख रुपए जमा कराएगा। जीएसटी व अन्य टैक्स मिलाकर 2.90 लाख रुपए देने होंगे।

जानिए… एलएमएस व गूगल क्लास रूम में फर्क

गूगल क्लास रूम: यह फ्री है। कोई भी इस्तेमाल कर सकता है। कोर्स व स्टूडेंट्स एड हो सकते हैं। असाइनमेंट, अनाउसमेंट, टास्क, वीडियो पीपीटी, ऑडियो, असाइनमेंट अपलोड हो सकते हैं। प्रश्न पूछे जा सकते हैं। ग्रेडिंग हो सकती है। अटेंडेंस हो सकती है। मेंटेनेंस आसान है। शुरुआती साल में 17 कॉलेज जोड़े गए। 2020 में 95 और कॉलेजों में लागू किया। इन कॉलेजों से 2 करोड़ 90 लाख 89 हजार 360 रु. वसूले गए। अब 2.90 लाख रु. के हिसाब 150 कॉलेजों को 4 करोड़ 35 लाख रु. कॉलेजों को जमा कराने के लिए कहा है।

एलएमएस: कॉलेज प्रोफेसर कंटेंट अपलोड कर सकते हैं। असाइनमेंट दे सकते हैं। ऑडियो-वीडिया अपलोड कर सकते हैं। उनके अपने यूजर आईडी बनाए जा सकते हैं। क्विज हो सकते हैं। ग्रेडिंग संभव है। अटेंडेंस नहीं हो सकती। कोर्स व स्टूडेंट्स को एड करना मुश्किल है। मेंटेनेंस मुश्किल है।

मामला संज्ञान में आया है। कुछ प्रोफेसर ने इस बारे में बताया है। इस मामले को पूरा दिखवाया जाएगा।
– कंवरपाल गुर्जर, शिक्षा मंत्री

 

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