हकलाने और तुतलाने में होता है अंतर, जानें इस समस्या के बारे में

 

कुछ लोगों में तुतलाने और हकलाने की समस्या होती है. यह कोई रोग नहीं है बल्कि एक प्रकार की समस्या है ये समस्या किसी भी आदमी को हो सकती है. इससे पीडि़त आदमी का आत्मविश्वास कम होने लगता है. यह कठिनाई बच्चों में अधिक होती है । कुछ मुद्दे में यह समस्या अधिक आयु को लोगों में भी होती है.

 

तुतलाने और हकलाने में अंतर होता है. तुतलाने में शब्दों या अक्षर का ठीक उच्चारण करने में कठिनाई होती है. इसमें आदमी के मुंह से कुछ शब्द स्पष्ट नहीं उच्चारण के साथ नहीं निकलते । तुतलाकर बोलने वाले लोग कुछ शब्द जैसे ‘र’ को ‘ड़’ या ‘ल’, ‘क’ को ‘त’ बोलते है । वहीं हकलाने वाला आदमी रुक-रुक कर अटक कर या एक ही शब्द को बार-बार बोलता है. इसका मरीज मानसिक रूप से दबाव महसूस करता हुआ शीघ्र – शीघ्र बोलता है. बोलते समय आंखें भींचता है और उसके होंठ बोलते समय कांपते और जबड़े हिलते हैं.

 

कारण –
तुतलाने की समस्या का कारण जीभ का निचला भाग अधिक चिपका होना और जीभ मोटी होना होता है, इसके अन्य कारम तालू का कटा होना, न्यूरोलॉजिकल प्रॉब्लम जैसे सेरेब्रल पाल्सी भी वजह है. यह समस्या आनुवांशिक भी हो सकती है.
हकलाना का समस्या में ज्यादातर मामलों में जिनपर किसी बात का दबाव या किसी विषय को लेकर तनाव की स्थिति से डर पैदा हो गया हो या मनोस्थिति बिगड़ गई हो उनमें यह समस्या देखी जाती है.

 

उपचार –
कुछ माह तक नियमित शब्दों के ठीक उच्चारण से तुतलाने की परेशानी में सुधार होने लगता है. शीघ्र – शीघ्र बोलने के बजाय आराम से और धीरे-धीरे शब्दों को बोलने की आदत डालें. पुस्तक या अखबार बोलकर पढ़ें. अपने ही शब्दों पर ध्यान दें. शीशे के सामने खड़े होकर बोलें, इससे आत्मविश्वास बढ़ता है. अभिभावक बच्चे पर किसी प्रकार का मानसिक दबाव न डालें. साथ ही उसे बार-बार टोके नहीं जैसे ऐसे बोलो, यह बोलो, इस तरह उच्चारण करो आदि.

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