सौर जलापूर्ति योजनाओं में घपला:समीक्षा के बाद दाेषियाें पर केस, मुखिया, पंचायत सचिव, अभियंता, बीडीओ और वेंडर जांच के घेरे में

पंचायत राज निदेशक आदित्य रंजन ने 14वें वित्त आयोग की राशि से बनी सौर ऊर्जा आधारित जलापूर्ति योजनाओं में अनियमितता की शिकायत मिलने के बाद राज्य के सभी 24 जिलाें के उप विकास आयुक्त सह जिला परिषद के मुख्य कार्यपालक पदाधिकारियों काे अपने-अपने जिले में समीक्षा करने काे कहा है।

यह निर्देश दिया है कि समीक्षा के बाद अनियमितताओं के लिए दोषी मुखिया, पंचायत सचिव, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अभियंता तथा लाभुक समिति के अध्यक्ष एवं वेंडर से अधिक भुगतान की गई राशि की वसूली करें और आवश्यकतानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई करें। इतना ही नहीं, जरूरी समझने पर प्राथमिकी भी दर्ज कराने काे कहा है।

निरीक्षण में कई अनियमितताएं पाई गईं। सामग्री के लिए राशि का भुगतान लाभुक समिति के स्थान पर नियम विरुद्ध तरीके से सीधे वेंडर काे किया गया। एक योजना की पूरी या आंशिक सामग्री का उपयोग दूसरी योजना में किया गया। वेंडर या लाभुक समिति को तय से ज्यादा राशि का भुगतान किया गया है। उदाहरण के लिए, 3,84,691 रुपये के मानक प्राक्कलन में अधिकांश जिलों में लगभग 2,80,000 रुपये भुगतान किये गए हैं।

जबकि कुछ जिलों में वेंडर को 3,20,000 रुपये तक का भुगतान कर दिया गया है, जो नियम विरुद्ध है। योजना में सामग्री की वारंटी नहीं दी गई है। योजना की वेटिंग पेयजल विभाग के अभियंता से नहीं करायी गई है। मस्टर रोल को संधारित और पारित नहीं किया गया है। मजदूरी भुगतान के साक्ष्य नहीं हैं।

योजना का कार्य एवं सामग्री की गुणवत्ता प्राक्कलन के अनुरूप नहीं है। मापी पुस्तिका की प्रविष्टि अस्पष्ट है एवं इसे प्रखंड विकास पदाधिकारी कार्यालय से जारी नहीं किया गया है। इन बिंदुओं पर अंकेक्षण कार्य डीएलएफए झारखंड को दिया जाएगा, जिसमें इस पत्र का उल्लेख रहेगा।

पंचायती राज निदेशक ने निरीक्षण में पाई खामियां

केस-1 प. सिहभूम के चक्रधरपुर प्रखंड के हथिया पंचायत में ग्राम रमडा में मध्य विद्यालय के सामने साेलर जलमीनार के निर्माण योजना में एमबी पंचायत स्तर पर निर्गत है। इसमें सहायक अभियंता के सत्यापन के बिना ही भुगतान कर दिया गया। पेयजल विभाग के अभियंता से वेटिंग नहीं कराई गई। लाभुक समिति का अध्यक्ष दूसरे गांव का है। पंचायत राज निदेशक ने जिला पंचायत राज पदाधिकारी काे पंचायत सचिव तथा मुखिया से स्पष्टीकरण मांगने को कहा है कि क्याें नहीं उन्हें निलंबित किया जाए।

केस-2 लाेहरदगा जिले के कुड़ू प्रखंड में बड़कीचांपी पंचायत में जिरियाे मेन राेड पर माेहन लाेहरा के आवास के पास जलमीनार के निर्माण में वेंडर काे तय राशि से ज्यादा भुगतान कर दिया गया। इसमें लगाई गई सामग्री की वारंटी नहीं दी गई है। वाटर टैंक ओवर फ्लाे कर रहा है।

योजना की वेटिंग पेयजल के अभियंता से नहीं कराई गई है। पंचायत राज निदेशक ने निर्देश दिया है कि ज्यादा भुगतान की वसूली की जाए। इसके साथ ही कुड़ू प्रखंड की सभी साेलर जलमीनारों की जांच एसडीओ लाेहरदगा से कराई जाए।

केस-3 गाेड्डा जिले के महगांवा प्रखंड की लहठी पंचायत के पंचगाछी गांव में मांझी स्थान पर बनी साेलर जलमीनार में किया गया काम निम्न स्तर का और प्राक्कलन से अलग है। निर्माण में वेंडर काे तय राशि से ज्यादा भुगतान कर दिया गया। इसमें लगाई गई सामग्री की वारंटी नहीं दी गई है।

साेकपिट भी टूटा हुआ पाया गया। पंचायत राज निदेशक ने निर्देश दिया है कि ज्यादा भुगतान की वसूली की जाए। साथ ही साेलर जलमीनार की जांच एसडीओ गाेड्डा से कराई जाए। तत्कालीन पंचायत सचिव, मुखिया, जूनियर इंजीनियर और सहायक अभियंता से स्पष्टीकरण पूछने और नियम विरुद्ध अधिक भुगतान के लिए कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

 

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