सैलरी और सेविंग अकाउंट में आपको जमा पर मिलता है ब्याज, वहीं टैक्स के दायरे से बाहर होता है करंट अकाउंट

 

हर बैंक 3 तरह के अकाउंट ऑफर करता है

  • सैलरी और सेविंग्स अकाउंट पर एक जैसा ही ब्याज दिया जाता है
  • करंट अकाउंट में मैक्सिमम बैलेंस की कोई लिमिट नहीं है। लेकिन सेविंग्स अकाउंट में यह लिमिट होती है

हमारे देश में आज ज्यादातर लोगों का बैंक में अकाउंट है। ये अकाउंट सैलरी, सेविंग्स या करंट होते हैं। भले ही इन तीनों अकाउंट का इस्तेमाल डिपॉजिट और ट्रांजेक्शन के लिए किया जाता हो लेकिन इनमें काफी अंतर होता है। सैलरी और सेविंग अकाउंट में आपको जमा पर ब्याज मिलता है जबकि करंट अकाउंट में जमा पैसे पर आपको कोई ब्याज नहीं दिया जाता है। आइए जानते हैं कि इनमें क्या अंतर होते हैं….

सेविंग और करंट अकाउंट में अंतर

  • सेविंग्स अकाउंट सैलरी पाने वाले एम्प्लॉई या फिर बचत को बैंक में जमा करने के लिए खुलवाया जाता है। वहीं करंट बैंक अकाउंट बिजनेस करने वालों के लिहाज से होता है। इसे स्टार्टअप, पार्टनरशिप फर्म, LLP, प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, पब्लिक लिमिटेड कंपनी आदि भी खुलवा सकती हैं।
  • सेविंग्स बैंक अकाउंट पर कस्टमर्स को ब्याज मिलता है लेकिन कंरट अकाउंट पर कोई ब्याज नहीं मिलता है।
  • सेविंग्स अकाउंट में जमा पर ब्याज मिलता है, इसलिए यह टैक्स के दायरे में आता है। लेकिन, करंट अकाउंट में जमा पर ब्याज नहीं मिलता इस कारण ये टैक्स के दायरे से बाहर होता है।
  • सेविंग्स अकाउंट से आप केवल उतना ही पैसा निकाल सकते हैं, जितना उसमें है। लेकिन करंट अकाउंट में यह सुविधा मिलती है यानी आप इसमें मौजूद बैलेंस से ज्यादा भी विद्ड्रोल कर सकते हैं। इसे ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी कहते हैं।
  • सेविंग्स अकाउंट से महीने में किए जाने वाले ट्रांजेक्शन के लिए आम तौर पर एक लिमिट होती है। आप एक तय नंबर से ज्यादा ट्रांजेक्शन नहीं कर सकते हैं। लेकिन करंट अकाउंट के लिए ऐसी कोई लिमिट नहीं है।
  • करंट अकाउंट में मैक्सिमम बैलेंस की कोई लिमिट नहीं है। लेकिन सेविंग्स अकाउंट में यह लिमिट होती है।

सेविंग अकाउंट और सैलरी अकाउंट में अंतर?

  • सैलरी अकाउंट एम्प्लॉयर द्वारा अपने कर्मचारी को उसकी सैलरी देने के लिए खोला जाता है। वहीं सेविंग्स अकाउंट को पैसे की बचत करने और बैंक में रखने के लिए खोला जाता है।
  • सैलरी अकाउंट आपका एम्प्लॉयर खोलता है, जबकि सेविंग्स अकाउंट कोई भी व्यक्ति खोल सकता है।
  • सैलरी अकाउंट में कोई न्यूनतम बैलेंस की जरूरत नहीं होती, जबकि बैंक के सेविंग्स अकाउंट में आपको कुछ न्यूनतम बैलेंस मैंटेन करना होता है।
  • अगर सैलरी अकाउंट में कुछ समय तक (सामान्य तौर पर तीन महीना) के लिए सैलरी नहीं आती तो, बैंक सैलरी अकाउंट को सेविंग्स अकाउंट में बदल देता है।
  • आप अपने सेविंग्स अकाउंट को सैलरी अकाउंट में बदल सकते हैं। अगर आपके सेविंग्स अकाउंट में ही अपनी सैलरी लेते हैं तो आप इसे सैलरी अकाउंट में बदल सकते हैं।
  • सैलरी और सेविंग्स अकाउंट पर एक जैसा ही ब्याज दिया जाता है।

 

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