सेवा में कमी की सजा:KYC न होने और सिग्नेचर में फर्क बता कैश नहीं किए चेक, AXIS बैंक को 26 हजार हर्जाना

 

फोरम ने हर्जाना चुकाने के लिए बैंक को एक महीने का वक्त दिया है। - प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar

फोरम ने हर्जाना चुकाने के लिए बैंक को एक महीने का वक्त दिया है। – प्रतीकात्मक फोटो

  • 3 शिकायतों की सुनवाई के दौरान जालंधर के जिला कंज्यूमर फोरम ने दिए आदेश

KYC डॉक्यूमेंट न देने व सिग्नेचर में फर्क के बहाने चेक कैश न करना AXIS बैंक को महंगा पड़ा। जिला कंज्यूमर फोरम ने सुनवाई की तो पता चला कि डॉक्यूमेंट्स तो चेक बाउंस होने से पहले ही जमा हो चुके थे और बैंक व चेक के सिग्नेचर भी हैंडराइटिंग एक्सपर्ट ने कन्फर्म कर दिए। इसके बाद फोरम ने बैंक को 3 मामलों में 26 हजार हर्जाना चुकाने के आदेश जारी कर दिए। इसके लिए एक महीने का वक्त दिया गया है।

बैंक में पूरा था बैलेंस, KYC न होने के बहाने लौटाए थे चेक

न्यू जवाहर नगर के बृजभूषण मरवाहा ने फोरम को शिकायत दी कि उनका लाडोवाली रोड पर तहसील कांप्लेक्स स्थित AXIS बैंक में खाता चल रहा है। उन्होंने LSC सिक्योरिटी लिमिटेड नाम की फर्म को करीब 1.40 लाख का चेक दिया था। जब उक्त फर्म ने बैंक में चेक लगाया तो यह कहते हुए वापस कर दिया कि उनका बैंक अकाउंट को फ्रीज या ब्लॉक है।

उन्होंने एक और चेक काटा लेकिन वो भी बाउंस हो गया, जबकि उनके बैंक में पर्याप्त बैलेंस पड़ा हुआ था। फोरम के नोटिस पर बैंक ने जवाब दिया कि अकाउंट होल्डर ने तय वक्त पर बैंक में KYC नहीं कराया। इसके जवाब में मरवाहा ने कहा कि उन्होंने KYC डॉक्यूमेंट्स पहले दिए थे जबकि चेक बाद में काटकर दिए थे। जिसके आधार पर फोरम ने बैंक को 8 हजार हर्जाना चुकाने के आदेश दिए।

न्यू जवाहर नगर की वीना मैनी ने बताया कि उनका बृज भूषण मरवाहा के साथ AXIS बैंक में जॉइंट अकाउंट है। उन्होंने टाटा म्यूचल फंड के लिए 6 लाख का चेक दिया था। इसमें भी बैंक ने उनका खाता फ्रीज या ब्लॉक होने का तर्क देते हुए तय समय पर KYC डॉक्यूमेंट्स जमा न कराने की बात कही। इस मामले में भी फोरम ने बैंक को 8 हजार हर्जाने के आदेश दिए।

बैंक में स्टोर सिग्नेचर व चेक वाले में बताए फर्क की हैंडराइटिंग एक्सपर्ट ने खाेली पोल

न्यू जवाहर नगर की पुष्पा मरवाहा ने फोरम को शिकायत दी कि उनका बृज भूषण मरवाहा के साथ AXIS बैंक में ज्वाइंट अकाउंट है। उन्होंने एक फर्म को करीब 6.83 लाख का चेक काटकर दिया था जिसे बैंक ने बाउंस कर दिया। जिसमें कहा गया कि बैंक व चैक पर किए साइन में फर्क है। इसके बाद फोरम में बैंक में स्टोर साइन व चैक में किए साइन को हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से मिलवाया गया तो वो एक ही व्यक्ति के निकले। इसके बाद फोरम ने बैंक को 10 हजार हर्जाना चुकाने के आदेश दे दिए।

 

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