सुरक्षित सरकारी योजना के तहत जमा कराएं अपना पैसा और पाएं सबसे ज्यादा ब्याज

 

नई दिल्ली: बीते कुछ वर्षों से भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार हिचकोले खा रही है। यही कारण है कि आम लोग निवेश करने से बच रहे हैं। खासतौर परशेयर बाजार की बात करें तो लोगों के बीच यहां निवेश करने में सर्वाधिक झिझक महसूस की जा सकती है।

ऐसे में जो लोग निवेश को लेकर बड़ा जोखिम लेने से बचना चाहते हैं, उनके लिए फिक्स्ड इनकम इनवेस्टमेंट के विकल्प भी मौजूद हैं, जो उन्हें बेहतर रिटर्न दे सकते हैं।

इन विकल्पों में कुछ विकल्प सिर्फ वरिष्ठ नागरिकों के लिए हैं तो कुछ हर आयुवर्ग के लोगों के लिए। जानकारों की मानें तो निवेश के इन तरीकों के जरिए आप अपनी पूंजी को सुरक्षित रखते हुए बेहतर रिटर्न पा सकते हैं।

इनमें से कुछ योजनाएं ऐसी हैं जिन पर सरकार गारंटी भी देती है। इन विकल्पों में से आप नियमित आय, पेंशन, टैक्स बचत या लॉन्ग टर्म गोल्स जैसी अपनी जरूरतों के मुताबिक उचित विकल्प चुन सकते हैं। चूंकि इनमें से कुछ योजनाओं में मिलने वाले ब्याज पर टैक्स भी चुकाना पड़ सकता है। इसलिए रिटर्न को टैक्स और महंगाई दर के हिसाब से जोड़-घटा करके ही निवेश का अंतिम फैसला करें।

सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (Senior Citizen Savings Scheme- SCSS) ऐसे ही प्रमुख निवेश प्लान में से एक है।

Senior Citizen Savings Scheme (SCSS)

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) भारत सरकार की तरफ से चलाई जाने वाली निवेश योजना है। जैसा कि इस योजना के नाम से स्पष्ट है ये 60 वर्ष से अधिक आयु के भारतीयों के लिए बनाई गई है। इस योजना के तहत आपकी जमा राशि पांच साल के बाद ही मेच्योर हो सकती है। हालांकि इस अवधि को सिर्फ एक बार अगले तीन साल के लिए और बढ़ाया जा सकता है।

इस योजना का उद्देश्य सेवानिवृति के बाद वरिष्ठ नागरिकों को एक तय आय सुनिश्चित करना है। SCSS सार्वजनिक /निजी क्षेत्र के बैंकों और भारत के डाकघरों के माध्यम से उपलब्ध है। सरकार द्वारा समर्थित होने के नाते इस पर मिलने वाले रिटर्न गारन्टीड हैं।

इस योजना के तहत 1,000 रुपए से लेकर 15,00,000 रुपए तक निवेश कर सकते हैं। लेकिन आपको ये बात ध्यान रखनी होगी कि पांच वर्ष से पहले ही इस राशि को निकालने पर आपको कुछ जुर्माना भी भरना पड़ सकता है। बता दें कि 2 वर्ष पूरे होने से पहले निवेश निकालने पर आपको जमा राशि का 1.5% और दो वर्ष के बाद निकालने पर जमा राशि का 1% हिस्सा जुर्माने के तौर पर भरना होगा।

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