सुखपाल सिंह खैरा का बड़ा बयान:केंद्र सरकार पर भड़के , कहा- लाल किले में हिंसा किसने की और कौन शिकार हुए, जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ज्यूडिशियल कमीशन करे गठित

खैरा ने कहा है कि मौजूदा समय में 200 से अधिक लोग जेलों में बंद है। ये सब केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की हिंसा का नतीजा है। - Dainik Bhaskar

खैरा ने कहा है कि मौजूदा समय में 200 से अधिक लोग जेलों में बंद है। ये सब केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की हिंसा का नतीजा है।

पंजाब एकता पार्टी के संस्थापक सुखपाल सिंह खैरा ने कहा है कि 26 जनवरी हिंसा मामले में धारा 174 के तहत कोई भी कार्रवाई नहीं की गई है। इसलिए हमारी मांग है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की देखरेख में एक ज्यूडिशियल कमीशन बने जो 26 जनवरी की हिंसा से जुड़े सभी मामलों की निष्पक्षता से जांच करे कि हिंसा किसने की और कौन इसका शिकार हुए। ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो व दोषियाें के खिलाफ समय रहते कार्रवाई हो।

किसान आंदोलन और इस मामले में हो रही युवाओं की गिरफ्तारी पर बात करने के लिए सोमवार को अपने चंडीगढ़ स्थित आवास पर मीडिया से बात की। वे बोले, जिस तरह से किसानों और युवाओं को निशाना बनाकर केंद्र सरकार मामले दर्ज कर रही है, नोटिस भेजे जा रहे हैं और इनकी गिरफ्तारियां भी हो रही है। ये एक गंभीर मसला है और इसे लेकर ही अब सरकार की इस नीति पर शिकंजा कैसे कसा जाए इसे लेकर ह्यूमन राइट एक्टिविस्ट और सीनियर वकील आरएस बैंस के साथ उनकी विशेष बैठक हुई है और इस दौरान एक विशेष कमेटी गठित की गई है।

वे बोले, इस मामले में पंजाब को ज्यादा फोकस किया जा रहा है और अपनी मीटिंग में हमने ये फैसला लिया है कि हमारी कमेटी संयुक्त किसान मोर्चा के साथ बैठक कर बात करेगी व सरकार की इस नीति का विरोध करेंगे। 26 जनवरी को जो युवा नवरीत सिंह शहीद हुआ था, उस मामले को भी उठाएंगे और पंजाब में पंजाब में भी उसको सम्मान दिया जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा समय में 200 से अधिक लोग जेलों में बंद है। ये सब केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की हिंसा का नतीजा है। आज भी 19 के करीब बजुर्ग व नौजवान लापता हैं।पंजाब में हजारों की तादार में नोटिस गए हुए हैं।इन मुद्दों को हम उठाएंगे और संयुक्त किसान मोर्चा के साथ बात कर रणनीति शुरू करेंगे क्योंकि आज भी लोग किसान आंदोलन की सपोर्ट में रैलियां व रोष मार्च कर रहे हैं। वे बोले, केंद्र सरकार की बेतुक नीतियों के खिलाफ अब जनतक विरोध की अहम जरूरत है।

 

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