सवर्णों को लुभाएगी नीतीश की पार्टी:सवर्ण प्रकोष्ठ से भाजपा के वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश, लोगों को बताएंगे- नीतीश सवर्ण विरोधी नहीं हैं

जदयू के सवर्ण मिलन समारोह में एक महिला को सदस्यता दिलाते आरसीपी सिंह। - Dainik Bhaskar

जदयू के सवर्ण मिलन समारोह में एक महिला को सदस्यता दिलाते आरसीपी सिंह।

बिहार में पहली बार किसी राजनीतिक पार्टी ने सवर्ण प्रकोष्ठ बनाया है। यह है नीतीश कुमार की पार्टी जदयू। मंच मोर्चा और प्रकोष्ठों का गठन यूं तो किसी राजनीतिक पार्टी के लिए कोई नई बात नहीं है लेकिन ऐसे दौर में, जब भाजपा ने विधानसभा चुनाव में मिली जीत के बाद अपने ज्यादातर फैसलों में पिछड़ा-अति पिछड़ा राजनीति को अपनी परंपरागत सवर्ण राजनीति से ज्यादा महत्व दिया है, जदयू की इस नई कोशिश को भाजपा के वोट बैंक में सेंधमारी की सीधी कोशिश माना जा रहा है।

26 साल पुराने कार्यकर्ता को बनाया प्रकोष्ठ का अध्यक्ष

जदयू ने इस प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष नीतीश कुमार टुनटुन को बनाया है। टुनटुन 26 साल से पार्टी से जुड़े होने का दावा करते हुए कहते हैं कि नीतीश कुमार की सरकार ने सभी वर्गों और जातियों के लिए काम किया है लेकिन कुछ लोग यह भ्रम फैला रहे हैं कि नीतीश कुमार सवर्ण विरोधी हैं। यही वजह है कि अब हमारी पार्टी ने यह प्रकोष्ठ बनाया है और इसके जरिये हम गांव-गांव घूमकर, खासतौर से युवाओं के बीच फैलाए गए इस भ्रम को दूर करेंगे। यह पूछने पर कि क्या जदयू को इसी भ्रम का नुकसान विधानसभा चुनाव में उठाना पड़ा, टुनटुन कहते हैं- बिल्कुल। यही कारण है कि हमारी पार्टी को इतना नुकसान हुआ है।

भाजपा ने सवर्णों को बनाया बंधुआ मजदूर

सवर्ण प्रकोष्ठ की तरफ से जदयू पार्टी कार्यालय में मिलन समारोह का आयोजन किया गया था। मिलन समारोह के मंच पर राष्ट्रीय अध्यक्ष आरसीपी सिंह, प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और सांसद ललन सिंह मौजूद थे। जदयू के दावे के मुताबिक, इन नेताओं की मौजूदगी में करीब 200 सवर्ण नेता जदयू में शामिल हुए। इनमें से कई को मंच से बोलने का मौका मिला। इन्हीं में से एक हैं मंटू मयंक। ब्रहर्षि विकास मंच फाउंडेशन से जुडे मंटू ने मंच से कहा कि भाजपा ने सवर्णों को बंधुआ मजदूर बनाया है। जदयू एकमात्र ऐसी पार्टी है जिसकी सरकार ने राज्य में सवर्ण आयोग गठित किया।

सवर्णों में जदयू को दिख रहीं विस्तार की संभावनाएं

अब तक पिछड़ा-अति पिछड़ा राजनीति को आधार बनाकर काम करते रहे जदयू को सवर्ण जाति के वोटरों में नई संभावनाएं दिख रही हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भाजपा, जो अब तक सवर्ण राजनीति में सबसे आगे दिखती थी, उसने भी विधानसभा चुनाव की जीत के बाद पिछड़ा-अति पिछड़ा राजनीति पर ज्यादा जोर दिया है। उपमुख्यमंत्री से लेकर कई मंत्री और ज्यादातर पदों पर भाजपा ने पिछड़ा-अति पिछड़ा समाज को मौका दिया। लिहाजा सवर्ण जातियों का एक धड़ा भाजपा के इस रवैये से अंदर ही अंदर नाराज है। भाजपा से सवर्णों की इसी नाराजगी को जदयू अपने लिए विस्तार के नए मौके के तौर पर देख रहा है।

 

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