संघ प्रमुख मोहन भागवत की तस्वीर से छेड़छाड़ मामले में केस दर्ज

 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता की शिकायत पर रविवार को क्राइम ब्रांच थाने में राजगढ़ जिले के निवासी सुरेश लोधी नामक व्यक्ति के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आरोपित पर संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत की तस्वीर के साथ छेड़छाड़ कर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट करने का आरोप है। सुरेश के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट भेजकर दो वर्गो के बीच वैमनस्य फैलाने का केस दर्ज किया गया है।

मोहन भागवत की तस्वीर के साथ छेड़छाड़ कर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी

सब इंस्पेक्टर घनश्याम दांगी ने बताया कि संघ कार्यकर्ता न्यू श्रीराम परिसर, अवधपुरी निवासी प्रवीण कुमार सिंह ने शिकायत दर्ज कराई है। उसमें बताया कि आरोपित ने भागवत की तस्वीर के साथ छेड़छाड़ कर आपत्तिजनक टिप्पणी के साथ उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है।

पोस्ट में भागवत के साथ पीएम नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और उप्र के सीएम योगी आदित्यनाथ के चित्र भी हैं। प्रवीण कुमार ने पुलिस को शिकायत में कहा कि इस तरह की विवादित पोस्ट से वर्ग विशेषष की भावनाएं आहत हुई हैं, साथ ही पार्टी स्तर पर दो वर्गों  के बीच दुराव बढ़ने की भी आशंका है।

 

संघ प्रमुख ने चीन पर किया प्रहार

विजयादशमी उत्सव के अवसर पर नागपुर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत ने स्वयंससेवकों के साथ-साथ पूरे देश को संबोधित किया। संघ प्रमुख ने कहा कि सीएए कानून संसद से पूरी प्रक्रिया से पास किया गया है, लेकिन कुछ लोग मुस्लिम समाज के बीच गलत भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। मोहन भागवत ने कहा कि कोरोना संकट से निपटने में सरकार ने समय रहते सराहनीय काम किया। इस समय विश्व के अन्य देशों की तुलना में भारत अच्छे से खड़ा दिखाई दे रहा है। संघ के स्वयंसेवक के साथ-साथ पूरा समाज एक साथ दिखाई दे रहा है।

भागवत ने कहा कि भारत की सीमाओं पर चीन ने जिस प्रकार से अपने आर्थिक व सामरिक बल में मदांध होकर अतिक्रमण का प्रयास किया और भारत की सरकार, सेना, प्रशासन व जनता ने करारा जवाब दिया, इससे उसे पूरी तरह धक्का लगा है। अब आगे हमें सजग रहना होगा। आंतरिक व वाह्य स्थिति को और मजबूत करनी होगी।

 

संघ प्रमुख ने कहा कि हिंदुत्व शब्द सबको जोड़ने वाला है। हम जब हिंदुस्‍तान हिंदू राष्ट्र कहते हैं तो उसके पीछे कोई राजनीति या सत्ता केंद्रित संकल्पना नहीं होती है। यह शब्द की भावना या परिधि में आने व रहने के लिए किसी को अपनी पूजा, प्रांत, भाषा आदि कोई भी विशेषता नहीं छोड़नी पड़ती है। केवल वर्चस्व की इच्छा छोड़नी पड़ती है।

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