शराबबंदी की पैरवी:सीएम बोले- शराब पीना नुकसानदेह, सभी अफसरों ने लिया है संकल्प, ऐसा करते पकड़े गए तो होंगे बर्खास्त

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद, रेणु देवी व मंत्री मंगल पांडेय के सामने स्वास्थ्य विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के बीच हुए एमओयू की अदला-बदली करते अफसर। - Dainik Bhaskar

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, डिप्टी सीएम तारकिशोर प्रसाद, रेणु देवी व मंत्री मंगल पांडेय के सामने स्वास्थ्य विभाग और ग्रामीण विकास विभाग के बीच हुए एमओयू की अदला-बदली करते अफसर।

  • राज्य के अधिकतर लोग शराबबंदी के पक्ष में, हां कुछ आदमी बाएं-दाएं करने वाले होते ही हैं

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि शराब पीने वाले अधिकारी को डिसमिस किया जाएगा। अधिकतर लोग शराबबंदी के पक्ष में हैं। हां, कुछ आदमी बाएं-दाएं करने वाले होते ही हैं। वह रविवार को मीडिया से मुखातिब थे। उनसे राज्य के दो जिलों में जहरीली शराब से हुई मौत के बारे में सवाल पूछा गया था। उन्होंने कहा- शराब बुरी चीज है।

अन्य राज्यों में भी ऐसे मामले हो रहे हैं। हमलोगों ने शराब के अवैध धंधे पर रोक लगायी है। इसके बाद भी कुछ लोग गड़बड़ी करने में लगे रहते हैं। लोगों को समझना चाहिए कि शराब पीना ही नुकसानदेह है। गड़बड़ी करने के कारण ऐसी घटनाएं होती हैं। मद्य निषेध विभाग और पुलिस अलर्ट है। कोई अधिकारी अगर शराब पीता है तो कार्रवाई तो होगी ही, उसको डिसमिस भी किया जाएगा। सब लोगों ने वचन दिया है, संकल्प भी लिया है।

नीति आयोग की बैठक में हुई सकारात्मक चर्चा
मुख्यमंत्री ने कहा-नीति आयोग की बैठक में सकारात्मक चर्चा हुई। बिहार में जो भी काम किये जा रहे हैं, हमने उसकी जानकारी दी। हमलोगों ने पहले ही हर घर तक बिजली पहुंचा दी। इसी तरह हर घर नल का जल की योजना पर केन्द्र काम कर रहा है, इस पर हमलोग पहले से काम कर रहे हैं। बिजली का रेट अगर पूरे देश में एक हो तो यह सबसे अच्छी बात होगी। हमलोगों को ज्यादा पैसा लगता है।

सोशल मीडिया पर एंटी सोशल काम
सीएम ने कहा-कुछ लोग सोशल मीडिया का दुरुपयोग करते हैं। सोशल मीडिया नाम है, लेकिन एंटी सोशल काम करते हैं। सोशल मीडिया का प्रयोग सकारात्मक रूप से करना चाहिए। हमने सब लोगों को कहा है कि आप भी सकारात्मक बातें नई पीढ़ी को बताएंं। सोशल मीडिया का सदुपयोग होना चाहिए।

यहां ऐसे इंतजाम करेंगे कि किसी भी मरीज को इलाज के लिए मजबूरी में बाहर नहीं जाना पड़ेगा

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि हम ऐसा इंतजाम करेंगे कि किसी को मजबूरी में इलाज के लिए बिहार से बाहर जाना नहीं पड़े। अगर कोई अपनी इच्छा से इलाज के लिए बाहर जाना चाहते हैं, तो अलग बात है। वे रविवार को स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार व सुधार से जुड़े उपायों को शुरू कर रहे थे।

उन्हाेंने कहा कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों को और विकसित किया जाएगा। वंडर एप, दरभंगा से शुरू हुआ। यह बाकी जगहों पर भी शुरू होगा। स्वास्थ्य विभाग अपने काम की जानकारी लोगों को सोशल मीडिया व मीडिया के जरिए दे। इसके लिए पंचायत व प्रखंड स्तर तक अभियान चले। मुख्यमंत्री ने कहा-हमने वर्ल्ड बैंक से कर्ज लेकर 44 ब्लॉक में जीविका की शुरुआत कराई। अब 10 लाख जीविका समूहों से 1 करोड़ 20 लाख परिवार की महिलाएं जुड़ी हैं। इनके काम से मैं अचंभित हूं।

बिहार में भी होगी हार्ट में छेद के इलाज की व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने कहा-राज्य सरकार ने हार्ट में छेद वाले बच्चों के मुफ्त इलाज की व्यवस्था की है। यह इलाज अहमदाबाद में होना है। बिहार में भी इसका इंतजाम होगा। मुख्यमंत्री ने ई.संजीवनी के लाभार्थी स्वास्थ्यकर्मियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बात की। इसमें पटना की माया कुमारी, रीना सिन्हा, नालंदा की पूनम व सीवान की नीतू कुमारी शामिल रहीं। सीएम ने ई-संजीवनी के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार, अपर कार्यपालक निदेशक केशवेंद्र कुमार, डॉ. करुणा कुमारी, हेमंत कुमार, सतीश रंजन सिन्हा, शैलेश कुमार श्रीवास्तव व हेमंत साह को सम्मानित किया।

वंडर पोर्टल के जरिए प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं की बचाई जा सकती है जान

उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने बताया कि वंडर पोर्टल पर गर्भधारण अवधि और प्रसव के दौरान गर्भवती महिलाओं की जीवन रक्षा के लिए सॉफ्टवेयर के माध्यम से आंकड़ों का विश्लेषण कर किसी भी तरह के खतरे से जान बचाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में आधारभूत संरचना और बेहतर चिकित्सकीय व्यवस्था, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल इत्यादि अन्य मूलभूत सुविधाओं का विकास किया गया है।

अब जरूरत इस बात की है कि चिकित्सा के क्षेत्र में नव प्रयोगों के साथ क्रियान्वित योजनाओं की कुशल एवं सूक्ष्म मॉनिटरिंग की जाए। कार्यक्रम को उपमुख्यमंत्री रेणु देवी, मंत्री मंगल पांडेय व प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत ने भी संबोधित किया। मौके पर प्रधान सचिव चंचल कुमार, अरविंद चौधरी, सचिव अनुपम कुमार भी मौजूद थे।

रेफरल ट्रांसपोर्ट ट्रैकिंग सिस्टम
राज्य में चल रही एंबुलेंस सेवा की ट्रैकिंग के लिए विशेष एप (रेफरल ट्रांसपोर्ट ट्रैकिंग सिस्टम) विकसित किया गया, जिसके जरिए एंबुलेंस की सेवा और सुगम हाेगी।

वंडर पोर्टल : किसी गर्भवती महिला में हीमोग्लोबिन, आयरन या अन्य तत्वों की कमी हो, तो पोर्टल में डाटा अपलोड करते डॉक्टरों को मोबाइल में मौजूद एप का अलार्म बजने लगेगा। इससे सही इलाज हो सकेगी।

ई-अश्विन पोर्टल : सरकार ने आशा की प्रोत्साहन राशि के भुगतान के लिए ई-अश्विन पोर्टल लांच किया है। इसके माध्यम से राज्यस्तर से ही आशा के बैंक खाते में प्रोत्साहन राशि भेजी जा सकेगी।

ई-संजीवनी : रोगियों को घर पर डॉक्टरी सलाह उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से इसे विकसित किया गया है। यह एप किसी भी एंड्रॉइड मोबाइल में डाउनलोड किया जा सकता है।

 

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