वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ेगी:कोवैक्सिन का भारत से बाहर उत्पादन पर विचार कर रही सरकार, WHO से ली जा सकती है मदद

  • वैक्सीन की किल्लत दूर करने के लिए उठाया जा सकता है कदम
  • विदेशी वैक्सीन निर्माता कंपनियों से भी किया जा सकता है समझौता

देश में कोविड-19 वैक्सीन की किल्लत चल रही है। इसको दूर करने के लिए सरकार वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने के विकल्पों पर विचार कर रही है। इसमें पहले से ही चुनी गई मैन्युफैक्चरिंग साइट्स के अलावा भारत से बाहर कोवैक्सिन का उत्पादन कराने का विकल्प भी शामिल है। कोवैक्सिन पूरी तरह से स्वदेसी वैक्सीन है। सूत्रों ने यह जानकारी दी है।

सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार इस मुद्दे को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सामने भी उठाने का इरादा कर रही है। ताकि कोवैक्सिन का उत्पादन बढ़ाने में मदद ली जा सके। इसके अलावा सरकार मॉडर्न, जॉनसन एंड जॉनसन और अन्य वैक्सीन उत्पादकों से भी संपर्क करेगी। इनसे थर्ड पार्टी के जरिए भारत में वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने के लिए कहा जाएगा।

अंतर-मंत्रालयीय बैठक में हुआ विचार-विमर्श

सूत्रों के मुताबिक, वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने के विकल्पों पर 18 मई को अंतर-मंत्रालयीय बैठक में विचार-विमर्श हुआ था। इसमें वॉलेंट्री लाइसेंस, कंपलसरी लाइसेंस, पेटेंट एक्ट 1970 के तहत सरकारी इस्तेमाल जैसे विकल्पों के तहत वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ाने पर विचार हुआ। इसके अलावा विदेश मंत्रालय ने भी इस मामले को कोविशील्ड की निर्माता ऐस्ट्राजेनेका के सामने उठाया है। ताकि कंपनी को भारत में ज्यादा वॉलेंट्री लाइसेंस देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

कोविशील्ड को कच्चा माल उपलब्ध कराने का रोडमैप बनाया जाएगा

विदेश मंत्रालय और डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (DBT) कोविशील्ड की कच्चे माल की किल्लत दूर करने के लिए रोडमैप तैयार करेंगे। साथ ही कच्चा माल उपलब्ध कराने वाले सोर्स की पहचान की जाएगी। फाइजर वैक्सीन के लिए DPIIT विदेश मंत्रालय के साथ मिलक इस मामले को उठाएगा। नीति आयोग और लॉ सचिव फाइजर के साथ होने वाले संभावित समझौते को लेकर स्टेटस रिपोर्ट तैयार करेंगे।

कई राज्य कर रहे हैं वैक्सीन की कमी की शिकायत

इस समय कई राज्य वैक्सीन की कमी की शिकायत कर रहे हैं। इस समस्या को सुलझाने के लिए सरकार ने कोवैक्सिन का उत्पादन बढ़ाने के लिए कई उपाय किए हैं। पिछले महीने नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने कहा था कि कोवैक्सिन के उत्पादन के लिए बायोसेफ्टी लैबोरेट्री-3 की आवश्यकता होती है जो हर जगह उपलब्ध नहीं है। DBT और DCGI से ऐसे उत्पादकों की पहचान करने के लिए कहा गया है जिनके पास बायोसेफ्टी लैबोरेट्री-3 की सुविधा उपलब्ध है। इनके जरिए कोवैक्सिन का उत्पादन करके उपलब्धता को बढ़ाया जा सकता है।

विदेश में उत्पादकों को पहचान करेगा विदेश मंत्रालय

एक सूत्र का कहना है कि विदेश मंत्रालय को ऐसी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की पहचान करने के लिए कहा गया है जहां कोवैक्सिन का उत्पादन किया जा सकता है। इस काम में DBT विदेश मंत्रालय की मदद करेगा। इसके अलावा कोवैक्सिन का उत्पादन बढ़ाने में मदद के लिए डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर (DoHFW) WHO के सामने इस मुद्दे को उठाएगा।

यहां भी होगा कोवैक्सिन का उत्पादन

पिछले महीने DBT ने कोवैक्सिन का उत्पादन बढ़ाने की योजना की घोषणा की थी। इसके तहत सार्वजनिक क्षेत्र की तीन कंपनियों में भी कोवैक्सिन का उत्पादन किया जाएगा। इसमें हैफकिन बायोफार्मास्यूटिकल्स कॉरपोरेशन लिमिटेड मुंबई, इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड हैदराबाद और भारत इम्यूनोलॉजिकल्स एंड बायोलॉजिकल्स लिमिटेड बुलंदशहर शामिल हैं।

दिसंबर तक 216 करोड़ डोज उपलब्ध होने का अनुमान

नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल ने बताया था कि अगस्त से दिसंबर के दौरान देश में वैक्सीन की 216 करोड़ डोज के उत्पादन का अनुमान है। इसमें 75 करोड़ डोज कोवीशील्ड और 55 करोड़ डोज कोवैक्सिन की शामिल होंगी। इसके अलावा बायोलॉजिकल ई की 30 करोड़ डोज, जायडस कैडिला की 5 करोड़ डोज, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की नोवावैक्स की 20 करोड़ डोज, भारत बायोटैक की नैजल वैक्सीन की 10 करोड़ डोज, जिनोवा की 6 करोड़ डोज और स्पुतनिक-V की 15.6 करोड़ डोज उपलब्ध होने की उम्मीद है।

 

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