विश्व खाद्य दिवस आज:कोरोनाकाल में चाय की जगह ली काढ़े ने नॉनवेज के साथ-साथ बाहर खाने से परहेज

कोरोना ने जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया है। इसमें से एक है खान-पान। आज वैश्विक महामारी कोविड-19 से निपटने के लिए हर कोई सुरक्षित भोजन पर जोर दे रहा है। लोग खान-पान का विशेष ध्यान रख रहे हैं। स्वस्थ आहार, अच्छा जीवन जीने के लिए और बीमारी के खतरे को कम करने के लिए काफी जरूरी है। अगर आप हेल्दी और पौष्टिक खाना खाते हैं, तो पोषक तत्व आपके शरीर में पहुंचेंगे और आप स्वस्थ, सक्रिय और मजबूत बने रहेंगे। स्वस्थ आहार के साथ शारीरिक गतिविधि भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए हर साल 16 अक्टूबर को विश्व खाद्य दिवस मनाया जाता है। इसके लिए हर साल नई थीम का चयन किया जाता है। इस साल कोरोना (कोविड-19) महामारी ने दुनिया भर के देशों को प्रभावित किया है। कोरोना को देखते हुए इस साल यह थीम ‘हमारे कार्य हमारे भविष्य हैं” के विषय के साथ जीरो हंगर’ है।

कोरोना काल में ऐसे बदला है लोगों का खान-पान
गंजपारा में रहने वाली रिचा देवांगन की दिन की शुरुआत चाय से होती थी, लेकिन अब इसका स्थान काढ़ा ने ले लिया है। कोरोना के कारण रिचा के किचन में तली-भुनी और फास्ट फूड की जगह पर पौष्टिक आहार तैयार किया जाता है। अब कोरोना ने रिचा के किचन में बनने वाले खाने का स्वाद ही बदल दिया है।

पंजाबी पारा की रहने वाली माधुरी साहू के घर में लोगों को नॉनवेज खाना बहुत पसंद है, लेकिन कोरोना के समय से उनके घर में नॉनवेज नहीं बना है। माधुरी के किचन में अब नॉनवेज की जगह हरी सब्जियों की खुशबू आती है। परिवार का हर सदस्य काढ़ा पीता है।

राशन सामान में काढ़ा की सामाग्री भी शामिल
आमजनों के हर महीने तैयार होने वाले राशन सामान के लिस्ट में अब काढ़ा की सामाग्री भी स्थान ले चुकी है। लिस्ट में बाकायदा इसे शामिल किया जा रहा है। किराना दुकान संचालक शंभू साहू ने बताया कि कोरोना काल से पहले दुकान में कोई भी काढ़ा बनाने की सामाग्री खरीदने नहीं आता था।

16 अक्टूबर को मनाया जाता है विश्व खाद्य दिवस
संयुक्त राष्ट्र ने 16 अक्टूबर, 1945 को रोम में “खाद्य एवं कृषि संगठन” (एफएओ) की स्थापना की। विश्व में व्याप्त भुखमरी के प्रति लोगों में जागरुकता लाने और भुखमरी को समाप्त करने के लिए 1980 से 16 अक्टूबर को ‘विश्व खाद्य दिवस’ का आयोजन शुरू किया गया।

हमारी सार्वजनिक वितरण प्रणाली पूरे देश में प्रशंसनीय
छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली पूरे देश में प्रशंसनीय है। कई राज्य हमारी वितरण प्रणाली को फॉलो कर अपने राज्य में लागू किया है। इनमें बिहार और झारखंड सबसे आगे हैं, जिन्होंने हमारे सार्वजनिक वितरण प्रणाली को अपने राज्यों में लागू किया है। कोरोना महामारी में भी जिले दो लाख 72 हजार 675 गरीब परिवारों को राशन दे रही है। गरीब राशन कार्डधारकों को दो माह का राशन चावल, नमक का वितरण उचित मूल्य की दुकानों से निशुल्क किया। साथ ही जिले के 38162 एपीएल कार्डधारियों को 10 रुपये की दर से चावल वितरण किया जा रहा है। इस प्रकार जिले के तीन लाख 10 हजार 837 कार्डधारक लाभ प्राप्त कर रहे हैं। शासन से सभी ग्राम पंचायत के लिए दो क्विंटल चावल आवंटन जारी किया गया है।

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