विनम्र व्यव्हार से मिली प्रतिष्ठा की छोटी सी कहानी

उस दिन मूसलाधार बारिश के साथ ठंड अपने चरम पर थी।तभी एक अधेड़ दंपत्ति ने फिलाडेल्फिया के एक छोटे से होटल के रिसेप्शनिस्ट क्लर्क से एक रूम देने

 

का अनुरोध किया। क्लर्क उस मामूली से होटल में एक संभ्रांत दंपत्ति को देखकर आश्चर्यचकित हो गया।उसके लड़के ने कहा अभी सारे रूम बुक हैं उस क्लर्क की बात सुनकर दंपत्ति बोले इस बारिश के खराब मौसम में हम कहां जाएंगे? क्लर्क ने कुछ देर सोचा फिर बोला यदि आप अन्यथा ना सोचें तो मेरा एक अपना छोटा सा कमरा है आप उसमें रात गुजार सकते हैं मैं अकेला हूं यहीं कहीं रात गुजार लूंगा दंपत्ति ने उसे धन्यवाद दिया हुआ उसके कमरे में रात बिताई सुबह जाते वक्त तो उन्होंने सोते हुए क्लर्क को जगाना उचित ना समझ कर उसे बिना बताए कि वह चले गए। उसके कई वर्षो बाद उस क्लर्क को एक पत्र मिला जिसके साथ न्यूयार्क की फ्लाइट का टिकट था । जब क्लार्क न्यूयॉर्कर पहुंचा तो उसने पाया कि स्वागत में वर्षों पहले उसके कमरे में रात बिताने वाले  वही महाशय खड़े हैं वह थे अमेरिका के प्रसिद्ध न्यायाधीश वैलफॉर्ड आस्टो।दूसरे दिन भी उसे लेकर वेल्फोरो स्टोरियां एक होटल  पहुंचे और क्लर्क कैसे कहा कि आज से तुम इस होटल के मैनेजर हो।क्लर्क बोला मैं एक छोटे से होटल में काम करने वाला क्या इतने बड़े होटल का प्रबंधन संभाल पाऊगा।आज तो ने कहा कि तुम साधारण नहीं हो तुम्हारे अंदर मानवता का एक ऐसा गुण है जो सिर्फ असाधारण लोगों में ही हो सकता है।तुम्हारी  विनम्रता, इंसानियत और तकलीफ सहने का भाव तुम्हें इस पद के योग्य बनाता है।इसलिए कहा गया है कि जो प्रतिष्ठा हमें अपने पद से हासिल नहीं होती वह हमें हमारे व्यवहार से हासिल हो जाती है।

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