विधानसभा में हिस्सेदारी के लिए सड़क पर महिलाएं; जदयू ऑफिस के बाहर प्रदर्शन, आज तक नहीं हुआ कोई विधायक

 

जदयू ऑफिस के बाहर डोम समाज की सैकड़ों महिलाओं ने विधानसभा चुनाव में अपने प्रतिनिधि को देने की मांग की।

  • मोक्ष के लिए आग देने वाली डोम जाति को आंदोलन के बावजूद नहीं मिल रहा टिकट
  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आश्वासन मिलने के बाद भी खाली हैं हाथ

बिहार विधानसभा में आज तक कोई डोम जाति का विधायक नहीं पहुंचा। अब इस जाति में भी राजनीतिक जागरुकता दिख रही है। ये चाहते हैं कि पार्टियां इन्हें भी टिकट दे और ये भी विधायक बनें, मंत्री बनें। अपनी यह लड़ाई लड़ने के लिए ये सड़क पर भी उतरे हुए हैं। सोमवार को जिस समय वर्चुअल रैली को लेकर जदयू ऑफिस के बाहर पुलिस की चाक-चौबंद व्यवस्था थी, डोम समाज की सैकड़ों महिलाओं ने ‘नीतीश कुमार जिंदाबाद’ के नारे लगाते हुए प्रदर्शन किया और विधानसभा चुनाव में अपने प्रतिनिधि के लिए टिकट की मांग की। पुलिस ने काफी समझाते-बुझाते हुए भीड़ को जदयू ऑफिस से दूर किया।

फिर से ठगे जाने का डर

जदयू महादलित प्रकोष्ठ के महासचिव और डोम संघ के अध्यक्ष सुनील कुमार राम खुद को ‘सन ऑफ डोम’ कहते हैं। वे प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने बताया कि आज तक हमारा समाज विधानसभा जाने से वंचित है। हर जाति को टिकट दिया जा रहा है पर हमें नहीं। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ दिन पहले जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से भी मुलाकात की थी। टिकट का आश्वसन मिला लेकिन अब हमारी हताशा बढ़ती जा रही है। कहीं हम फिर से ठगे न जाएं।

अनुसूचित जाति में भी काफी पीछे हैं डोम

डोम अनुसूचित जाति में आते हैं लेकिन पासवान, चमार जैसी जातियों का शैक्षणिक स्तर काफी ऊंचा होने की वजह इन्हें आरक्षण का बहुत लाभ आज तक नहीं मिल पाया। इनकी आर्थिक सामाजिक स्थिति अब तक बिगड़ी हुई है। युवाओं को काम के अवसर नहीं मिल पाने की वजह से अपने पुश्तैनी काम को छोड़ मेहतर जाति वाले कामों में भी लग गए हैं। मेहतर जाति का काम साफ-सफाई करना है। डोम जाति का काम बांस से टोकरी, सूप, दऊरा, खोंमचा आदि बनाना है। बिहार के महापर्व छठ के लिए यही डोम जाति के लोग सूप डलिया बनाते हैं।

मुक्ति का द्वार प्रशस्त करते हैं डोम

डोम जाति का दूसरा बड़ा काम यह है कि ये श्मशान घाट पर पार्थिव शरीर के लिए आग देते हैं। हिन्दू समाज में मान्यता है कि डोम ही जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्ति का द्वार प्रशस्त करते हैं। इसलिए इन्हें ‘डोम राजा’ भी कहा जाता है। दानवीर राजा हरिश्चंद्र की कहानी में डोम राजा का जिक्र आता है। वाराणसी के डोम राजा के हाथों उन्होंने खुद को बेच दिया था। डोम जाति खुद को राजा हरिश्चंद्र से जोड़कर भी गौरव बोध से भर उठती है।

दलित राजनीति उफान पर लेकिन…

अतिपिछड़ी जातियों से लेकर दलित जातियों में कमोबेश सबको विधानसभा जाने का मौका मिला पर डोम जाति के लिए यह रास्ता आज तक क्यों नहीं खुला, ये सवाल अब इस जाति के युवा पूछ रहे हैं। वे कहते हैं हमें भी सामाजिक न्याय चाहिए। गुस्सा इतना कि जदयू ऑफिस के बाहर यह भी कह दिया कि हमारी जाति को टिकट नहीं मिला तो हम सब नोटा में वोट डाल देंगे। बिहार चुनाव में दलित राजनीति उफान पर है। जदयू ने कार्यकारी अध्यक्ष भी एक दलित नेता को बनाया दिया है और दूसरी तरफ पटना के वीरचंद पटेल पथ पर डोम जाति के लोग नारा लगा रहे हैं – टिकट दो, टिकट दो, विधान सभा के लिए हमको भी टिकट दो।

 

Check Also

जन्‍मदिन पर चिराग ने पटन देवी मंदिर में टेका मत्‍था, बोले-‘आज पापा की बहुत याद आ रही’

लोक जनशक्ति पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष चिराग पासवान का आज जन्‍मदिन है। इस मौके पर …