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वर्ल्ड कप में भारत को जीत दिलाने वाला यह क्रिकेटर, आज गाय भैंसे चराने को है मजबूर

आज हम आपको एक ऐसे क्रिकेटर के बारे में बताने जा रहे है, जिसकी भारतीय टीम को वर्ल्ड कप जिताने में अहम भूमिका रही है. जी हां आज हम एक ऐसे खिलाडी के बारे में बात करने जा रहे है, जो किसी समय पर एक बेहतरीन बल्लेबाज हुआ करता था, लेकिन आज कल उसकी जिंदगी काफी तकलीफो से गुजर रही है. यक़ीनन इसके बारे में जान कर आप भी दंग रह जायेंगे. गौरतलब है कि एक वक्त ऐसा भी था, जब ये खिलाडी आसमान की बुलंदियां छूता था, लेकिन अब जमीन पर आ चुका है. जी हां वो कहते है न कि किस्मत कब करवट बदल ले, ये कोई नहीं कह सकता. यानि कौन कब और कैसे अर्श से फर्श पर आ जाएँ, ये किसी को नहीं पता होता.

बरहलाल इस खिलाडी की हालत भी फ़िलहाल कुछ ऐसी ही है. वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दे कि हम यहाँ भारतीय क्रिकेट टीम के बेहतरीन खिलाडी भालाजी डामोर की बात कर रहे है. हालांकि अब उनकी हालत ऐसी है कि क्रिकेट खेलना तो बहुत दूर की बात है, वो एक खुशहाल जिंदगी भी नहीं जी पा रहे है. बता दे कि आज कल ये खिलाडी गांव में भैंस चराने तक को मजबूर हो चुका है. गौरतलब है कि एक समय वो भी था जब भाला जी आलराउंडर खिलाडी हुआ करते थे. जी हां बता दे कि साल 1998 में उन्होंने ऐसी जबरदस्त पारी खेली थी कि इंडियन टीम सीधा सेमी फाइनल तक पहुँच गई थी.

इसके इलावा भालाजी ने ब्लाइंड वर्ल्ड कप में भी काफी बेहतरीन प्रदर्शन दिखाया था. बरहलाल इस प्रदर्शन के बाद वो काफी मशहूर भी हो गए थे. मगर आज इस बेहतरीन खिलाडी को सब भूल चुके है. वो कहते है न कि शोहरत जितनी जल्दी मिलती है, उससे कही ज्यादा जल्दी गायब हो जाती है. हालांकि उस दौर में वो एकलौते ऐसे खिलाडी थे, जिन्हे सर्वाधिक यानि ज्यादा विकेट लेने के लिए जाना जाता था. आपकी जानकारी के लिए बता दे कि गुजरात के आलराउंडर खिलाडी भालाजी अब तक अपने एक सौ पच्चीस मैचों में इकतीस सौ पच्चीस रन बना चुके है. इसके साथ ही वो एक सौ पचास विकेट ले चुके है. यानि अगर हम सीधे शब्दों में कहे, तो उस दौर में भाला जी का रिकॉर्ड काफी तारीफ के काबिल थे.

मगर अफ़सोस कि इंडियन टीम के लिए इतना सब कुछ करने के बावजूद भी उन्हें सरकार की तरफ से कोई नौकरी नहीं मिली और न ही सरकार की तरफ से उन्हें कोई सहायता दी गई. यही वजह है कि आज वो गांव में भैंसे तक चराने के लिए मजबूर हो चुके है. अब यूँ तो भैंसे चराने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन ऐसा बेहतरीन खिलाडी ऐसा काम करने के लिए मजबूर हो जाए, तो सवाल उठना और तकलीफ होना तो लाजिमी है. बरहलाल आज भले ही क्रिकेट का रंग रूप बदल चुका हो, लेकिन फिर भी जो जीत भाला जी ने इंडियन टीम को दिलवाई थी, उसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता. मगर इसके बावजूद भी भाला जी आज गरीबी भरा जीवन जीने को मजबूर है.

इसलिए हम तो यही उम्मीद करते है कि सरकार की तरफ से इस खिलाडी को थोड़ी सी ही सही, लेकिन कुछ तो मदद मिल जाए.

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