‘लगान’ के 20 साल:फिल्ममेकर आशुतोष गोवारिकर बोले-आमिर खान ने ये कहकर मना कर दिया था कि मुझे ये फिल्म नहीं करनी, तुम्हें जिसके पास जाना है जा सकते हो

 

फिल्ममेकर आशुतोष गोवारिकर की फिल्म ‘लगान’ को आज (15 जून) 20 साल पुरे हो गए हैं। इस मौके पर आशुतोष ने बताया की ‘लगान’ ने उनकी जिंदगी बदल दी थी। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में आशुतोष ने इस फिल्म से जुड़ी कुछ खास बातें शेयर की हैं। इस दौरान फिल्ममेकर ने बताया की आखिरकार क्यों उन्हें शाहरुख खान के पास इस फिल्म को लेकर जाना पड़ा था और कैसे आमिर खान ने उन्हें तकरीबन एक साल के बाद फिल्म के लिए हामी भरी। आइए जानते हैं ‘लगान’ से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें आशुतोष की जुबानी-

इस फिल्म ने मेरी जिंदगी बदल दी
इस फिल्म से बहुत इमोशनली जुड़ा हूं, क्योंकि अगर ‘लगान’ नहीं बनती तो मेरा डायरेक्शन का करियर फिर से शुरू ही नहीं होता। मेरी पहली दो फिल्में चली नहीं थी। डायरेक्शन के बजाए मैंने एक्टिंग पर फोकस करना शुरू कर दिया था। मैं CID शो में एक्टिंग कर रहा था, लेकिन खुस नहीं था। ऐसी स्थिति में लगान जैसी फिल्म करने का मौका मिलना जिसे आमिर खान प्रोड्यूस भी करेंगे, वो अपने आप में अद्भुत था। फिल्म चली और मुझे फिर से डायरेक्शन के करियर में मौका मिला। इस फिल्म ने मेरी जिंदगी बदल दी।

कहानी के हिसाब से एक्टर्स को कास्ट करना सबसे बड़ा चैलेंज था
जब पहली बार ‘लगान’ की स्क्रिप्ट पढ़ी तभी एहसास हो गया था की इससे कुछ अद्भुत बन सकता है। इसमें अलग-अलग जॉनर साथ में दिखाना था-पीरियड फिल्म भी थी, स्पोर्ट्स ड्रामा भी दिखाना था, क्रॉस कल्चर रोमांस था, मेरे हिसाब से ये बहुत ही अजीब कॉम्बिनेशन की फिल्म है। जब मैंने इसका स्क्रीन प्ले लिखना शुरू किया तब एहसास हुआ की ये एक शानदार फिल्म बन सकती है, यदि सही मायने में बनाया गया तो। जैसे-जैसे वक्त बीतता गया, फिल्म की कहानी पर तो कॉन्फिडेंट आ गया, लेकिन उसके हिसाब से एक्टर्स को कास्ट करना सबसे बड़ा चैलेंज था।

1 साल के बाद आमिर खान ने फिल्म के लिए हामी भरी थी
फिल्म पूरी तरह से क्रिकेट पर बेस्ड थी। आमिर खान को बतौर लीड लेने में काफी हिचकिचाहट थी। क्योंकि ‘लगान’ से पहले आमिर एक क्रिकेट बेस्ड फिल्म कर चुके थे (अव्वल नंबर) जो चली नहीं थी। साथ ही मेरी और आमिर की एक फिल्म थी ‘बाजी’ वह भी फ्लॉप थी। मैं शुरुआत से ही निश्चित था की आमिर मेरी इस फिल्म को मना कर देंगे और वही हुआ भी। लेकिन मैं आमिर को ही चाहता था। क्योंकि वो हमेशा से अलग-अलग तरह की फिल्में करने की कोशिश करते थे। मैंने हिम्मत नहीं हारी, स्क्रिप्ट में और भी बदलाव किए ताकि आमिर हामी भर दें। यकीन मानिए तकरीबन 1 साल बाद आखिरकार मेरी मेहनत रंग लाइ और उन्होंने इस फिल्म को साइन किया।

शाहरुख खान को भी ऑफर की थी फिल्म
जब आमिर ने मना किया तब मैं दूसरे एक्टर्स की तलाश में जुट गया। मुझे याद है उस वक्त आमिर ने मुझसे कहा था-मुझे ये फिल्म नहीं करनी, तुम्हें जिसके पास जाना है, जा सकते हो। तब मैंने शाहरुख खान को अप्रोच किया था। हालांकि, उस वक्त शाहरुख बहुत व्यस्त थे, उन्हें ‘लगान’ की स्क्रिप्ट तो पसंद आई थी, लेकिन हामी नहीं भरी। मैं फिर आमिर के पास गया और बस फिर क्या वे बन गए इस फिल्म के हीरो।

क्रिकेट सीक्वेंस शूट करना सबसे ज्यादा मुश्किल था
फिल्म बनाने का सबसे मुश्किल मोमेंट था क्रिकेट मैच सीक्वेंस शूट करना। वो जो एक घंटे का क्रिकेट सीक्वेंस, वो मेरे लिए सबसे यादगार पल था। अलग-अलग क्रिकेट के पहलु थे साथ ही हर किरदार का अपना इमोशनल ग्राफ था। हर किरदार के इमोशन को दिखाना था। साथ ही कड़ी धूप में शूट करना बहुत मुश्किल होता था। बंजर जमीन थी और तापमान हमेशा 40 डिग्री के ऊपर ही होता था। ऐसे माहौल में पुरे यूनिट का उत्साह बनाए रखना और सही तरीके से शूट करना बहुत चैलेंजिंग था। लेकिन जब स्क्रीन पर देखा तो सबसे ज्यादा उसी सीक्वेंस को एन्जॉय किया।

फिल्म का सीक्वल कभी नहीं बन सकता
‘लगान’ का सीक्वल कभी नहीं बनेगा। इस फिल्म को बनाने में ही हमें बहुत वक्त लग गया था और कहानी भी कहीं अधूरी नहीं छोड़ी थी। ये एक क्लासिक फिल्म है, जिसे फिर से दोहराना आसान नहीं है।

 

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