रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र ने भारत से मांगी मदद, इंसानियत का दिया हवाला

नई दिल्ली: बांग्लादेश (Bangladesh) में रह रहे रोहिंग्या शरणार्थियों की मदद के लिए आयोजित हो रहे वैश्विक कांफ्रेंस (Global Aid Conference for Rohingya Refugees) में भारत को आमंत्रित किया गया है. ये कांफ्रेंस 22 अक्टूबर को होगी, जिसमें भारत से शामिल होने और रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए आर्थिक मदद देने की अपील की गई है.

कई रिफ्यूजी एजेंसियां साथ मिलकर कर रही काम
इस कांफ्रेंस का आयोजन यूएस, यूके, ईयू और यूएन की रिफ्यूजी एजेंसियां साथ मिलकर कर रही हैं. इस कांफ्रेंस का मकसद बांग्लादेश में रह रहे म्यांमार के रखाइन प्रांत से जान बचाकर भागे रोहिंग्या शरणार्थियों (Generate Funds to Support Rohingya Refugees) की मदद के लिए धन इकट्ठा करना है.

भारत सरकार देगी मदद!
भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, ‘रोहिंग्या शरणार्थियों की समस्या से भारत भी जुड़ा हुआ है. भारत म्यांमार (Myanmar) और बांग्लादेश (Bangladesh) दोनों का ही पड़ोसी है. हम रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षित और जल्द वापसी चाहते हैं, ताकि वो वापस रखाइन प्रांत लौट जाएं. इसके लिए भारत जो भी मदद कर सकता है, वो करेगा. इस काम में भारत दोनों ही देशों को मदद पहुंचाएगा.

रोहिंग्याओं की मदद के लिए एक अरब डॉलर जुटाने की अपील
संयुक्त राष्ट्र ने मानवीय दृष्टिकोण से बांग्लादेश में रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों (Rohingya refugees in Bangladesh) को मदद पहुंचाने के लिए 1 अरब डॉलर ($1 Billion) जुटाने का लक्ष्य रखा था. लेकिन आधा फंड भी नहीं जुट पाया. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने वर्चुअल कांफ्रेंस का आयोजन 22 अक्टूबर को करने का निर्णय लिया है, ताकि रोहिंग्या शरणार्थियों की मदद के लिए रकम जुटाई जा सके.

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