रिम्स प्रबंधन की मांग:स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी ही डेंटल कॉलेज घोटाले के दोषियों पर करे कार्रवाई

 

  • स्वास्थ्य विभाग ने घोटाले के दोषी अधिकारियों के नाम मांगे, कार्रवाई के बजाए चिट्ठीबाजी

रिम्स डेंटल कॉलेज में 37.42 करोड़ रुपए के मशीन-उपकरण खरीद में हुई गड़बड़ी की स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट महालेखाकार ने पिछले साल 20 सितंबर को सौंप दी है। एजी ने माना है कि मशीन खरीद में नियमों का उल्लंघन कर बिना जरूरत के बड़ी संख्या में बाजार दर से अधिक मूल्य पर मशीनों की खरीद की गई है। इससे बड़ी सरकारी राशि की क्षति पहुंची है। रिपोर्ट के पांच महीने बाद भी घोटाले में शामिल दोषियों को चिह्नित नहीं किया जा सका है। मामले में स्वास्थ्य विभाग और रिम्स प्रबंधन के बीच पत्रों का आदान-प्रदान हो रहा है।

दोषियों पर कौन करेगा कार्रवाई – अभी इसी पर हो रहा विवाद

स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त सचिव दिलेश्वर महतो की ओर से भेजे गए पत्र में एजी की स्पेशल ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि रिम्स निदेशक से मेसर्स श्रीनाथ इंजीनियरिंग और डीके मेडिकल्स द्वारा फर्जी कागजातों के आधार पर टेंडर में भाग लेने तथा बाजार दर से अधिक मूल्य पर उपकरणों की आपूर्ति करने के मामले में रिम्स के स्तर से कार्रवाई कर विभाग को अवगत कराए। जवाब में 17 फरवरी को रिम्स प्रबंधन ने कहा है कि रिम्स नियमावली में स्वास्थ्य सचिव की अध्यक्षता में स्थायी वित्त एवं लेखा समिति गठित है। समिति को ही दोषी पदाधिकारियों को चिह्नित कर आरोप निर्धारित कर प्रपत्र-का गठन करना है और अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए निदेशक को निर्देश देना है। ऐसे में स्वास्थ्य सचिव ही कार्रवाई करें।

 

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