राज्य विश्वविद्यालयन पेंशनर्स एसोसिएशन्स ने दिया उच्च शिक्षा मंत्री को ज्ञापन

मध्यप्रदेश के शिक्षा मंत्री डॉक्टर मोहन यादव को आज राज्य विश्वविद्यालयीन पेंशनर्स एसोसिएशन्स महासंघ ने ज्ञापन देकर शासकीय विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स को सातवें वेतनमान के आधार पर पेंशन एवं अन्य सुविधाएं दिए जाने की मांग की है। डॉ यादव को उनके प्रवास के दौरान राज्य विश्वविद्यालयीन पेंशनर्स एसोसिएशंस महासंघ के अध्यक्ष डॉ गोपाल कृष्ण शमार् और विक्रम  विश्वविद्यालय की वनस्पति शास्त्र अध्ययनशाला से सेवानिवृत्त हुईं प्रो. डॉ सुधा मल्ल ने ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बताया गया कि मध्यप्रदेश विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 लागू होने के पश्चात राज्यपाल की अघ्यक्षता में गठित समिति द्वारा लिये गए निर्णय के आधार पर समन्वय समिति ने पेंशन एवं ग्रेच्युटी परिनियम 37 पारित किया। इस योजना में मध्यप्रदेश के विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों, अधिकारियों एवं शिक्षकों को भी राज्य शासन के कर्मचारियों के समान पेंशन, ग्रेच्युटी एवं अन्य सेवानिवृति उपादान नियम 1976 के आधार पर समय-समय पर संशोधन के साथ प्रदान किए जाने  हैं।

इसमें प्रावधान किया गया कि विश्वविद्यालयों द्वारा पेंशन हेतु नियोक्ता अंशदान पेंशन फंड में जमा किया जाएगा जिसे आयोग समाप्त होने के बाद कॉरपस फंड नाम दिया गया। यह भी तय किया गया कि नियोक्ता अंशदान में पेंशन हेतु  आवश्यक शेष राशि मध्यप्रदेश शासन द्वारा बजटीय प्रावधान कर मिलाई जाएगी। वर्तमान में यह राशि प्रतिवर्ष 11 करोड़ रूपए मिलाई जा रही है।

ज्ञापन में बताया गया है कि जब राज्य कर्मचारियों को पाँचवें एवं छठवें वेतनमान के आधार पर पेंशन प्रारंभ की गई और वित्तीय कठिनाइयों का हवाला देकर विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स को पाँचवें और छठवे वेतनमान के आधार पर पेंशन प्रदान नहीं की गई तो वैयक्तिक रूप से तथा विवि के पेंशनर्स के विभिन्न संगठन प्रदेश के उच्च न्यायालयों की शरण में जाने पर विवश हुए तथा न्यायालयों द्वारा एक के बाद एक निर्णय करते हुए मप्र शासन के उच्च शिक्षा विभाग को स्पष्ट निदेर्श दिये गये कि विवि पेंशनर्स को शासन द्वारा ही राज्य शासन के अन्य कर्मचारियों के समकक्ष पेंशन एवं अन्य समस्त लाभ प्रदान किए जाएँ।

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