यूपी पंचायत चुनाव 2021: प्रधानमंत्री मोदी के गोद लिए इस गांव में विकास की सच्चाई

वाराणसी: उत्तर प्रदेश में हो रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर ईटीवी भारत गांव गांव का रुख कर रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचकर हम न सिर्फ लोगों से मिल रहे हैं, बल्कि पांच साल पहले हुए दावों की हकीकत भी जांचने की कोशिश कर रहे हैं. इस क्रम में ईटीवी भारत की टीम पहुंची बनारस के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गोद लिए उस पहले गांव में जो अचानक से चर्चा में आया. इस छोटे से गांव का नाम है जयापुर’ जयापुर गांव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार सत्ता में आने के बाद 7 नवंबर 2014 को जब गोद लिए जाने की घोषणा की. उसके बाद से ही यह गांव विश्व पटल पर अचानक से उबर के सामने आया.

वाराणसी के इस गांव में विकास की कहानी मतदाताओं की जुबानी

इश गांव में विकास की बयार बही, गांव वाले भी समझ नहीं सके कि महज 45 सौ की आबादी वाले इस गांव में इतने काम होने कहां से लगे. सड़के बनी, स्ट्रीट लाइट लग गई, चकाचक स्कूल और महिलाओं के प्रशिक्षण केंद्र के अलावा घर-घर शौचालय भी मिलने लगे, लेकिन समय बढ़ता गया और एक समस्या जस की तस बनी रही. यह समस्या है इस गांव में जल निकासी की. प्रधानमंत्री के गोद लिए जाने के बाद भी भले यहां पर करोड़ों रुपए खर्च हो गए हो, लेकिन अब तक जयापुर गांव में गांव के पानी की निकासी का कोई प्रबंध ही नहीं है. क्या कहा लोगों ने जयापुर की समस्याओं को लेकर जानिए इस खास रिपोर्ट में…

काम तो बहुत हुए लेकिन

हालांकि जयापुर गांव अन्य गांवों से कुछ अलग जरूर दिखाई देगा. गांव में प्रवेश करने के लिए एक गेट आपको मिल जाएगा. अंदर जाने के बाद पक्की सड़कें, बैंक, डाकघर, हाईटेक प्राथमिक विद्यालय, महिला प्रशिक्षण केंद्र, दलितों के रहने के लिए अटल नगर और लगभग दो सौ से ज्यादा सोलर लाइटों को देखकर आपको लगेगा ही नहीं कि आप गांव में आ गए हैं. आरसीसी की सड़कें हर घर के बाहर शौचालय, हर वह सुविधा आपको यहां मिलेगी जो जीवन जीने के लिए जरूरी है. लेकिन इन सबके बीच गांव के लोगों में नाराजगी इस बात को लेकर है कि इतने साल बाद भी शिकायत दर्ज शिकायत करने पर भी गांव में पानी निकासी का प्रबंध नहीं हो पाया है.

सीवर लाइन भी बिछी लेकिन बेकाम की

प्रधानमंत्री के इस गोद लिए गांव में शौचालय तो मिले, लेकिन सोखना विधि से ही शौचालय काम करते हैं. आज तक सीवर पाइप लाइन बिछाए जाने के बाद भी शुरू नहीं हो सकी. लोगों का कहना है कि ग्राम प्रधान से भी कहते कहते थक गए हैं, लेकिन वह सुनते नहीं. वहीं जब हमने ग्राम प्रधान से इस बारे में बात की तो उनका कहना था कि बेंगलूर और पुणे, उड़ीसा और कई अन्य जगह के इंजीनियरों ने गांव में सर्वे किया, लेकिन गांव के अगल-बगल दूसरे गांव की जमीन नीची है. गांव का पानी निकालने के लिए कोई ऐसा स्थान नहीं है, जिससे इसको अटैच किया जा सके. तलाब, पोखरा भी कोई मौजूद नहीं है. गांव की आबादी 45 सौ के आसपास हो चुकी है और इसका प्रबंध ना हो पाने की वजह से सारी उम्मीदें और प्रयास असफल साबित हो रहे हैं.

सवाल हैं कई

फिलहाल जयापुर गांव का बदला रूप देखकर यह तो समझ में आया कि गांव का विकास शायद अकेले प्रधान के बस की बात नहीं. उसके ऊपर भी किसी वजनदार नेता या अधिकारी का होना जरूरी है. फिलहाल जयापुर में बिजली व पानी की समस्या अब नहीं है. 811 परिवार जयापुर में निवास करते हैं और इन्हें फिलहाल 24 घंटे बिजली मिल रही है. कुल मिलाकर जयापुर के लोग भले ही अन्य सुविधाओं को लेकर खुश हों, लेकिन इतने साल बीत जाने के बाद भी इस गांव में पानी निकासी की सुविधा का नाम होना कई सवाल खड़े जरूर करता है, क्योंकि आज के तकनीकी दौर में भी 2014 से लेकर अब तक इस समस्या का निराकरण नहीं ढूंढा जा सका है.

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