यूपी टू पंजाब और पंजाब टू यूपी वाला ‘खेल’ खत्म, क्या अब बाहुबली मुख्तार अंसारी को मिलेगी मुकम्मल सजा?

बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी (Bahubali MLA Mukhtar Ansari) एक VIP की तरह पंजाब (Punjab) से यूपी (UP) की जेल (Jail) में शिफ्ट हो चुका है. पंजाब के रोपड़ से यूपी की बांदा जेल तक तकरीबन चौदह घंटे तक वो अभेद्य सुरक्षा कवच में लाया गया. लेकिन फिक्र ये है कि अब इसके आगे क्या होगा? क्या यूपी टू पंजाब और पंजाब टू यूपी वाले खेल बाद बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को मुकम्मल सजा मिल सकेगी? क्या राजनीति और अपराध का ये दुष्चक्र टूट सकेगा? और मुख्तार की तरह दूसरों को भी इस रास्ते पर चलने का सबक मिल सकेगा? ये फिक्र इसलिए क्योंकि माफिया मुख्तार अंसारी पर अब तक कुल 52 केस दर्ज किए गए हैं. इनमें हत्या, हत्या के प्रयास, षड्यंत्र रचने, धोखाधड़ी, गैंगस्टर एक्ट और अवैध तरीके से संपत्ति बनाने के तमाम मामले हैं. ये मामले गाजीपुर, वाराणसी, मऊ और आजमगढ़ जिलों में हैं. यूपी के अलावा, दिल्ली, पंजाब और बिहार में भी मुख्तार पर मुकदमे दर्ज हैं. कुल मिलाकर सभी राज्यों के 12 जिलों के 24 थानों में 52 मुकदमे दर्ज हैं.

अब आपको मुख्तार की हिस्ट्रीशीट भी पलटकर दिखाते हैं. ताकि ये पता चल जाए कि उसके नाम कौन-कौन से बड़े अपराध दर्ज हैं. मऊ में ठेकेदार मन्ना सिंह डबल मर्डर केस, वाराणसी में कांग्रेस नेता अजय राय के भाई अवधेश राय की हत्या का केस, आजमगढ़ में सड़क ठेकेदार पर फायरिंग और मजदूर की मौत का केस, प्रयागराज की एमपी-एमलए स्पेशल कोर्ट में भी मुख्तार अंसारी पर 19 मुकदमे लंबित हैं. रोपड़ से चलते-चलते उसके एंबुलेंस में हुए फर्जीवाड़े का केस भी सामने आ गया है. यानी मुख्तार अंसारी, जिसके जीवन का डेढ़ दशक से लंबा वक्त जेल में कटा है, जिसे जनता ने पांच बार विधायक चुना. जिसे दो साल पहले तक यूपी की ही जेल से पंजाब ले जाया गया. उसपर आगे कार्रवाई का रोडमैप क्या होगा? दरअसल मुख्तार पर सबसे गंभीर आरोप बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की हत्या का था. जिसमें उसे कोर्ट ने बरी कर दिया. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर पंजाब से यूपी की जेल में आने के बाद मुख्तार अंसारी का आगे क्या होगा? क्या सिर्फ सलाखों के पीछे सजा काटने से इतने बड़े अपराधी को मुकम्मल सजा मिल जाएगी?

हर बार बच निकला मुख्तार!

एक दिन पहले मुख्तार अंसारी जब रोपड़ की जेल से बाहर निकला. तो व्हील चेयर पर सवार होकर निकला. जब बांदा जेल पहुंचा. तो पैदल चलकर बैरक में गया. व्हील चेयर की तरफ देखा तक नहीं. हालाकि ये तस्वीर कैमरे में कैद ना हो सकी. लेकिन सवाल उठता है कि क्या बांदा पहुंचते ही मुख्तार की बीमारी छू मंतर हो गई. या फिर उसकी मुख्तारी की हवा निकल गई? यहां आपको थोड़ा फ्लैशबैक में लिए चलते हैं. एक वक्त था जब यूपी में माफिया डॉन मुख्तार अंसारी की तूती बोलती थी. सरकार किसी की भी होती थी. सिक्का मुख्तार अंसारी का चलता था. ना जाने कितने संगीन अपराधों में इसका नाम आया. लेकिन हर बार वो बच निकला. आरोप तो ये भी लगे कि जेल में रहते हुए भी वो दरबार सजाता रहा. जेल से ही मोबाइल फोन के जरिए अपनी अपराध की दुनिया को कंट्रोल करता रहा. लेकिन वक्त बदला और साल 2017 के बाद यूपी में अपराध और अपराधियों पर सख्ती शुरू हो गई.

माफिया मुख्तार अंसारी 2017 में भी बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर विधायक चुना गया. लेकिन यूपी में जब बीजेपी की सरकार आई. और मुख्तार अंसारी का सरकारी संरक्षण छिन गया. तो तमाम लोगों की हत्या के आरोपी की आंखों के सामने मौत नाचने लगी. उसे अपनी जान का खतरा सताने लगा. फिर उसने सुरक्षित जगह तलाशना शुरू कर दिया. वो खुद को यूपी की बांदा जेल में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा था. आखिर उसने बड़ी तरकीब से वहां से निकलने का प्लान बनाया. जनवरी 2019 में मुख्तार के नाम से पंजाब के एक बिल्डर को फोन किया गया. बिल्डर ने आरोप लगाया कि उनसे 10 करोड़ की रंगदारी मांगी गई है और रंगदारी ना देने पर जान से मारने की धमकी भी. इसके बाद पंजाब पुलिस ने मोहली में मामला दर्ज कर लिया और केस दर्ज होते ही प्रोडक्शन वारंट लेकर पंजाब से पुलिस टीम यूपी पहुंच गई. हद तो ये है कि यूपी के ही प्रशासन ने तब ये जानने की कोशिश तक नहीं कि थी कि मुख्तार ने फोन किया था या नहीं? आवाज का नमूना तक नहीं मिलाया गया.बांदा कोर्ट से इजाजत ली गई और यूपी पुलिस ने बिना सोचे-समझे 21 जनवरी 2019 को मुख्तार को पंजाब जाने दिया. 24 जनवरी 2019 को मुख्तार को मोहाली कोर्ट में पेश किया गया और उसके बाद मुख्तार अंसारी का नया ठिकाना पंजाब की रोपड़ जेल बन गया. बाद में यूपी सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया. और बांदा जेल के अफसर को निलंबित कर दिया गया.

मुख्तार को वापस लाने के लिए 40 बार हुई कोशिश

इसके बाद यूपी सरकार ने मुख्तार को वापस लाने के लिए कम से कम 40 बार कोशिश की लेकिन पंजाब सरकार की सरपरस्ती में हर बार अड़ंगा लगा दिया जाता था. दर्जनों बार पंजाब पुलिस ने मुख्तार को मेडिकली अनफिट बताकर यूपी नहीं भेजा. कभी शुगर तो कभी बीपी, तो कभी डॉन को डिप्रेशन का शिकार बताया गया. पिछले 27 महीने में मुख्तार को पेशी के लिए 54 तारीखें मिलीं लेकिन कोई न कोई बहाना बनाकर वह एक भी बार पेश नहीं हुआ. इस बीच यूपी पुलिस दो साल में आठ बार मुख्तार को लाने पंजाब गई. लेकिन हर बार पंजाब पुलिस की अड़चनों की वजह से उसे खाली हाथ लौटा दिया गया. हालात ये हो गए कि यूपी सरकार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा. 26 मार्च को शीर्ष अदालत ने मुख्तार को यूपी भेजने का आदेश दिया. जिसके बाद 6 अप्रैल को अभेद्य सुरक्षा घेरे में मुख्तार रोपड़ से निकला. 7 अप्रैल की सुबह बांदा पहुंच गया. लेकिन सवाल वही है कि क्या बांदा जेल पहुंच जाने भर से मुख्तार अंसारी को उसके गुनाहों की सजा मिल जाएगी?

क्योंकि वर्ष 2005 में बीजेपी विधायक कृष्णानंद हत्याकांड के बाद वो सबसे ज्यादा लाइमलाइट में आया. तब इस केस में मुख्तार अंसारी समेत 13 आरोपी और 70 गवाह थे.ये केस यूपी के गाजीपुर से दिल्ली में सीबीआई तक ट्रांसफर हुआ. लेकिन किसी आरोपी पर कोई अपराध साबित नहीं हो सका. मुख्तार समेत सभी आरोपी इस जघन्य हत्याकांड से बरी हो गए. तो अब कैसे मान लिया जाए कि मुख्तार अंसारी पर बाकी के मुकदमों में अपराध साबित हो सकेगा. उसे मुकम्मल सजा मिल जाएगी? हालांकि अब यूपी में हालत जुदा हैं. योगी सरकार में मुख्तार और उसके मददगारों पर सख्त कार्रवाई हुई है. गैरकानूनी धंधों से मुख्तार की कमाई गई संपत्ति को सरकार ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क कर लिया. अवैध निर्माणों को गिरा दिया गया. मुख्तार और उसके सहयोगियों की करीब 200 करोड़ रुपए की संपत्ति अभी तक सील की जा चुकी है या जमींदोज की जा चुकी है. मुख्तार गैंग के 98 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. और इस गैंग के 72 हथियारों के लाइसेंस भी रद्द किए जा चुके हैं. कुल मिलाकर ये सरकार तो कम से कम मुख्तार के प्रति नरमी दिखाने के मूड में नहीं लग रही है. आइए अब आपको बांदा लिए चलते हैं. जहां की जेल में एक बार फिर मुख्तार पहुंच चुका है.

मुख्तार को तन्हाई बैरक में रखा गया

चौदह घंटे 16 मिनट में 881 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद सुबह 4 बजकर पचास मिनट पर यूपी पुलिस का काफिला मुख्तार को लेकर बांदा जेल की गेट पर पहुंचा. तो बाकी गाड़ियां बाहर रुक गईं. मुख्तार जिस एंबुलेंस में सवार था. वो जेल के अंदर चली गई. मुख्तार अंसारी को पहले बांदा जेल के बैरक नंबर 15 में रखा जाना था. लेकिन पहुंचने के बाद उसे बैरक नंबर 16 में आइसोलेशन में रखा गया. जेल पहुंचने के बाद मुख्तार का मेडिकल टेस्ट हुआ. जिसके बाद वो नहाया और फिर जाकर अपनी बैरक में सो गया. मुख्तार जिस बैरक में है वो 10 फीट लंबा. 10 फीट चौड़ा और 11 फीट ऊंचा है. इसमें एक कैदी के लायक बनाया गया है. इस बैरक में वॉशरूम भी बना है. चूंकि यहां बाकी कैदियों का आना-जाना नहीं होता है इसलिए इसे तन्हाई बैरक भी कहते हैं. और इसे पूरे बैरक को सीसीटीवी कैमरे से मॉनिटर किया जा रहा है.

मुख्तार अंसारी की शिफ्टिंग के बाद पूरी बांदा जेल की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है. चप्पे-चप्पे की सीसीटीवी से निगरानी की जा रही है. सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक ड्रोन कैमरा, 5 बॉडी वॉर्न कैमरे और 30 अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं. बताया जाता है कि मुख्तार के आसपास जाने वाला हर जेलकर्मी बॉडी वॉर्न कैमरे से लैस रहेगा ताकि उसके और मुख्तार के बीच हुई बातचीत और व्यवहार की रिकॉर्डिंग हो सके. जेल की निगरानी के लिए एक ड्रोन कैमरा भी लखनऊ से भेजा गया है. यहां आपको एक और जानकारी दें कि मुख्तार को पंजाब से बांदा लाए जाने वाले ऑपरेशन का नाम- सीक्रेट मिशन बांदा था. जिसकी कामयाबी पर इस मिशन में शामिल पुलिसकर्मियों की सीएम योगी ने तारीफ भी की. इन्हें आगे सम्मानित भी किया जाएगा.

Check Also

महामारी ने मचाई आफत:कोरोना का स्ट्रेस लोगों के चेहरों पर दिखाई दे रहा; दाह संस्कार के लिए 2 परिवार आपस में भिड़े , वीडियो हुआ वायरल

  उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में कोरोना काल का स्ट्रेस अब लोगों पर साफ …